,

बंजर जमीन पर जैविक खेती से बंपर कमाई, बाबूलाल माली बने किसानों के रोल मॉडल

 समदड़ी (बाड़मेर)  खेती को सिर्फ एक पारंपरिक जीवनयापन का जरिया मानने के बजाय यदि आधुनिक सोच, सही तकनीक और पूरी तरह जैविक पद्धतियों के साथ अपनाया जाए, तो यह बंजर जमीन पर भी बंपर आमदनी का मजबूत जरिया बन सकती है। राजस्थान के बाड़मेर जिले के समदड़ी क्षेत्र स्थित भूरानी गांव के निवासी एवं पूर्व…

बंजर जमीन पर जैविक खेती से बंपर कमाई, बाबूलाल माली बने किसानों के रोल मॉडल

 समदड़ी (बाड़मेर)
 खेती को सिर्फ एक पारंपरिक जीवनयापन का जरिया मानने के बजाय यदि आधुनिक सोच, सही तकनीक और पूरी तरह जैविक पद्धतियों के साथ अपनाया जाए, तो यह बंजर जमीन पर भी बंपर आमदनी का मजबूत जरिया बन सकती है। राजस्थान के बाड़मेर जिले के समदड़ी क्षेत्र स्थित भूरानी गांव के निवासी एवं पूर्व सरपंच बाबूलाल माली इसका एक प्रत्यक्ष और प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरे हैं।

जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाने के बाद, अब उनका पूरा ध्यान पूरी तरह से वैज्ञानिक जैविक खेती पर केंद्रित है। वे अपने निजी फार्म हाउस पर आधुनिक और प्राकृतिक तरीकों से एकीकृत खेती कर न केवल कृषि क्षेत्र में शानदार मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि बाड़मेर और आसपास के जिलों के अन्य किसानों के लिए भी एक मार्गदर्शक और रोल मॉडल बने हुए हैं।

खजूर, गोंदा और करौंदे के साथ सब्जियों का शानदार कॉम्बिनेशन
बाबूलाल माली ने अपने फार्म हाउस में फसलों और फलों का एक बहुत ही सटीक कॉम्बिनेशन तैयार किया है। उनके खेत में वर्तमान में करीब 80 खजूर, 65 गोंदा और 10 करौंदे के उन्नत पेड़ लगे हुए हैं। इन पेड़ों के बीच उपलब्ध खाली जगह का बुद्धिमत्ता से उपयोग करते हुए वे विभिन्न मौसमी सब्जियों की भरपूर पैदावार लेते हैं।

बाबूलाल माली बताते हैं कि इस एकीकृत जैविक मॉडल की बदौलत वे हर साल 20 से 25 लाख रुपए की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से पूरी दूरी बनाकर केवल प्राकृतिक खादों का उपयोग करना ही उनकी इस निरंतर सफलता का मुख्य आधार है।

फॉर्म हाउस पर ही खुद तैयार कर रहे हैं प्राकृतिक जैविक खाद
बाबूलाल माली के अनुसार, वे बाजार की महंगी खाद पर निर्भर रहने के बजाय अपने फार्म हाउस पर ही देसी गाय के गोबर, गोमूत्र और अन्य प्राकृतिक घटकों को मिलाकर उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार करते हैं। उनका अनुभव बताता है कि जैविक खाद के निरंतर प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता और जल-धारण क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है। साथ ही, इससे पैदा होने वाले फलों और सब्जियों का स्वाद, आकार और गुणवत्ता रासायनिक फसलों की तुलना में काफी बेहतर होती है।

क्षेत्रीय किसानों को दे रहे हैं लाभदायक खेती का संदेश
पूर्व सरपंच बाबूलाल माली केवल खुद की प्रगति तक सीमित नहीं हैं, वे आसपास के क्षेत्र के अन्य किसानों को भी रसायन-मुक्त और टिकाऊ जैविक खेती अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि किसान सही तकनीक, लगन और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करें, तो खेती को बेहद टिकाऊ और अत्यधिक लाभप्रद बनाया जा सकता है। वर्तमान में पूर्व सरपंच के इस सफल जैविक मॉडल को देखने, समझने और खेती की नई-नई तकनीकों की जानकारी लेने के लिए आसपास के दर्जनों गांवों से किसान रोजाना उनके खेत पर पहुंच रहे हैं।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed