लखनऊ
लाखों घरों पर लगे बिजली के स्मार्ट मीटरों ने एक बार फिर लोगों को छकाया है। प्रीपेड से पोस्ट पेड हो चुके इन स्मार्ट मीटरों से राहत मिलने की जगह लोगों को आफत झेलनी हो रही है। एक बार फिर हजारों लोगों की बिजली अचानक कट गई। इस बिजली कट के पीछे बिल बकाया होना कारण बताया गया। राजधानी लखनऊ में लेसा ने करीब 5 हजार स्मार्ट मीटर वाले बिजली कनेक्शन काट दिए। इस दौरान लखनऊ सेंट्रल में करीब 3500 से अधिक परिवार प्रभावित हुए। बिजली कनेक्शन कटते ही अफरातफरी मच गई।
हुसैनगंज, अमीनाबाद और चौक सहित कई बिलिंग केंद्रों पर बकाया बिल जमा करने के लिए उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। बिल का पूरा भुगतान करने के बावजूद तकनीकी खामियों के चलते ऑटोमैटिक प्रणाली से बिजली कनेक्शन चालू नहीं हो सके। घंटों तक बिजली न आने से परेशान उपभोक्ता बर्लिंगटन चौराहे स्थित ओल्ड 1912 उपकेंद्र और लेसा कार्यालय पहुंच गए। वहां बिजली आपूर्ति बहाल न होने से नाराज लोगों ने विरोध जताया।
तुरंत काटने की सुविधा तो तुरंत जुड़ता क्यों नहीं
इस दौरान उपभोक्ताओं और लेसा कर्मचारियों के बीच जमकर तीखी नोकझोंक हुई। उपभोक्ताओं का कहना था कि जब स्मार्ट मीटर तकनीक के जरिए तुरंत कनेक्शन काटने की सुविधा है, तो बिल जमा होने के बाद तुरंत आपूर्ति चालू क्यों नहीं की जा रही है? इससे कई उपभोक्ताओं के कनेक्शन देर रात तक नहीं जुड़ सके। उमस भरी गर्मी में बच्चे, बुजुर्ग और मरीज घंटों बिना बिजली के रहने को मजबूर रहे। वहीं इस मामले में लेसा अधिकारियों का कहना है कि ईईएसएल मीटर में तकनीकी कारणों से री-कनेक्शन प्रक्रिया में थोड़ा समय लगा।
समस्याओं के निस्तारण में घोर लापरवाही
राजधानी में बिजली समस्याओं के समाधान को लेकर लेसा का लचर रवैया एक बार फिर उजागर हुआ है। मध्यांचल विद्युत निगम के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 पर मिले उपभोक्ता फीडबैक की समीक्षा बैठक में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जनसमस्याओं के निस्तारण में घोर लापरवाही बरती जा रही है।
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों ने कुल 18,957 शिकायतों का बिना किसी जमीनी समाधान के ही फर्जी निस्तारण दर्ज कर दिया। कागजी खानापूरी के इस खेल में अमौसी जोन के उपभोक्ता सबसे अधिक परेशान और खफा नजर आए।
ज्यादातर मामलों में विभागीय कर्मियों ने उपभोक्ताओं से बिना कोई संपर्क किए और बिना तकनीकी खराबी दूर किए ही शिकायतों को पोर्टल पर क्लोज (बंद) दिखा दिया। इस फर्जीवाड़े से नाराज उपभोक्ताओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मजबूरी में शिकायतें दोबारा ‘रि-ओपन’ करानी पड़ीं। आंकड़ों के मुताबिक, अमौसी जोन में सबसे ज्यादा 6,892 मामले रि-ओपन हुए हैं, जो यह दर्शाता है कि इस क्षेत्र में शिकायतों को लेकर लीपापोती की गई है। जानकीपुरम जोन में 6,014 और गोमतीनगर जोन में 5,927 मामले दोबारा दर्ज किए गए। लखनऊ सेंट्रल जोन की स्थिति बेहतर रही, 124 शिकायतें ही रि-ओपन हुई हैं।
अमौसी जोन के मुख्य अभियंता राम कुमार के अनुसार अधिकारियों को निर्देश हैं कि शिकायतों का नियम संगत निस्तारण करें। फर्जी तरीके से निस्तारण किया है तो पूरे प्रकरण की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
बिजली सप्लाई से लेकर स्मार्ट मीटर की शिकायत
उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों में मुख्य रूप से अनियोजित बिजली कटौती, सप्लाई में खराबी, गलत और बढ़े हुए बिजली बिल, मीटर से जुड़ी तकनीकी कमियां तथा नए स्मार्ट मीटरों से उत्पन्न आ रही परेशानियां शामिल हैं। निगम स्तर पर हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों की इस कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया गया है। शिकायत दर्ज होने के बाद जब उपभोक्ता से फीडबैक लिया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना निस्तारण के ही केस क्लोज दिखाया जा रहा है। उच्चाधिकारियों ने लापरवाही बरतने वाले अफसरों और कर्मियों को चेतावनी देते हुए सभी रि-ओपन मामलों का प्राथमिकता के आधार पर पारदर्शी समाधान करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
















