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बाढ़ से कितने घर डूबेंगे, अब पहले बताएगा ‘गरुड़’, 413 निकायों का GIS डेटा तैयार करने वाला MP पहला राज्य

भोपाल  मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जहां सभी 413 नगरीय निकायों के हर घर और शहरी व्यवस्थाओं का GIS डेटा तैयार किया गया है। ‘गरुड़ MP’ (GARUD MP) सिस्टम के जरिए अब बाढ़ आने से पहले ही संभावित खतरे का पता लगाया जा सकेगा। इंदौर, भोपाल समेत सभी छोटे-बड़े शहरों में…

बाढ़ से कितने घर डूबेंगे, अब पहले बताएगा ‘गरुड़’, 413 निकायों का GIS डेटा तैयार करने वाला MP पहला राज्य

भोपाल 

मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जहां सभी 413 नगरीय निकायों के हर घर और शहरी व्यवस्थाओं का GIS डेटा तैयार किया गया है। ‘गरुड़ MP’ (GARUD MP) सिस्टम के जरिए अब बाढ़ आने से पहले ही संभावित खतरे का पता लगाया जा सकेगा। इंदौर, भोपाल समेत सभी छोटे-बड़े शहरों में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने पर प्रभावित होने वाले इलाकों, घरों और आबादी का पहले ही नक्शा तैयार किया जाएगा। इससे राहत और बचाव की तैयारी समय रहते की जा सकेगी।

जलस्तर बढ़ते ही दिखेगा असर
गरुड़ ऐप में अलग-अलग जलस्तर के आधार पर सिमुलेशन की सुविधा विकसित की गई है। पानी तय स्तर से ऊपर बढ़ने पर सिस्टम नक्शे पर बता सकेगा कि कौन सा वार्ड प्रभावित होगा, कितने घर और संपत्तियां पानी की चपेट में आ सकती हैं और कितनी आबादी प्रभावित होगी।

इसके साथ ही संभावित बाढ़ की चपेट में आने वाले स्कूल, अस्पताल और दूसरी जरूरी सुविधाओं की भी पहचान की जा सकेगी। इससे प्रशासन राहत और बचाव की तैयारी पहले से कर सकेगा।

413 निकायों का डेटा एक सिस्टम में
मध्यप्रदेश ने सभी 413 नगरीय निकायों के भौगोलिक आंकड़ों को एक ही सिस्टम में जोड़ा है। इसमें इंदौर, भोपाल समेत बड़े शहरों और छोटे कस्बों के घरों के साथ सड़क, पानी की पाइपलाइन, सीवरेज, जलाशय और जमीन के उपयोग से जुड़ी जानकारी शामिल है।

इस डेटा के जरिए किसी इलाके को उसके वास्तविक स्थान और आसपास की शहरी व्यवस्थाओं के साथ देखा जा सकेगा।

टैक्स और अवैध निर्माण की भी निगरानी
गरुड़ का इस्तेमाल सिर्फ बाढ़ प्रबंधन के लिए नहीं होगा। इसके जरिए संपत्ति कर की वसूली, अवैध निर्माण, मास्टर प्लान के उल्लंघन, पानी और सीवरेज की पाइपलाइन की निगरानी तथा झुग्गी बस्तियों के सर्वे का काम भी किया जाएगा।

सरकारी जमीनों के रखरखाव, शहर में वृक्षारोपण और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को भी इसी GIS मैप से जोड़ा गया है।

 

 सबकुछ होगा ऑनलाइन, 24 सेवाओं में खत्म होगी झंझट

मध्यप्रदेश के 413 शहरों के लोगों को बड़ी सुविधा मिल रही है। लोगों की सहूलियत के लिए यहां ई-नगर पालिका 2.0 विकसित की जा रही है। ई-नगर पालिका के अपग्रेडेशन से इन शहरों में सबकुछ ऑनलाइन हो जाएगा, नागरिकों की झंझटें खत्म होंगी, उन्हें पूरी 24 सेवाएं ऑनलाइन मिलेंगी। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा इन सभी शहरों को कम्प्यूटरीकृत करने के उद्देश्य से वेब आधारित ई-नगर पालिका योजना प्रारंभ की गई है। ई-नगर पालिका के माध्यम से सभी शहरों में समस्त नागरिक सेवाओं, जन शिकायत सुविधाओं से लेकर निकायों की आंतरिक कार्य प्रणाली, समस्त भुगतान और बजट प्रक्रिया को एकीकृत कर ऑनलाइन सुविधा देने का प्लान बनाया गया है।

देश में मध्यप्रदेश ऐसा पहला राज्य है, जहां प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों को एक सिंगल पोर्टल पर लाया गया है। ई-नगर पालिका 1.0 को डेटाबेस के साथ प्लेटफार्म पर विकसित किया गया। वर्तमान में ई-नगर पालिका के माध्यम से 22 नागरिक सेवाएं प्रदाय की जा रही हैं, इसमें 15 मॉड्यूल शामिल हैं। अब इसके द्वितीय चरण का विकास किया जा रहा है।

ई-नगर पालिका को उद्योग, राजस्व, पंजीयन विभाग जैसे विभिन्न विभागों के साथ भारत सरकार के महत्वपूर्ण मोबाइल एप उमंग से भी एकीकृत किया गया है। ई-नगर पालिका 1.0 पोर्टल के माध्यम से दी जा रही सभी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए ई-नगर पालिका परियोजना के दूसरे चरण का विकास कराने का निर्णय लिया गया है।

ई-नगर पालिका 2.0 के अंतर्गत 16 मॉड्यूल और 24 नागरिक सेवाएं शामिल होंगी। इसमें जीआईएस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उपयोग किया जाएगा। ई-नगर पालिका 2.0 में भौतिक संरचना को क्लाउड सेवाओं द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा।

ई-नगर पालिका 2.0 का कॉमन सर्विस सेंटर, एम ऑनलाइन, कियोस्क सेंटर और भुगतान गेटवे के साथ एकीकरण किया जायेगा। खास बात यह है कि इससे जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं।

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