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अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न

भोपाल  अपराधों की विवेचना को अत्याधुनिक, वैज्ञानिक एवं पुख्ता साक्ष्य-आधारित बनाने के उद्देश्य से अपराध अनुसंधान विभाग (CID), द्वारा आयोजित 03 दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला आज पुलिस मुख्यालय, भोपाल में सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धतियों के प्रभावी उपयोग, साक्ष्यों के संकलन…

अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न

भोपाल 

अपराधों की विवेचना को अत्याधुनिक, वैज्ञानिक एवं पुख्ता साक्ष्य-आधारित बनाने के उद्देश्य से अपराध अनुसंधान विभाग (CID), द्वारा आयोजित 03 दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला आज पुलिस मुख्यालय, भोपाल में सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धतियों के प्रभावी उपयोग, साक्ष्यों के संकलन एवं उनके न्यायालयीन प्रस्तुतीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

समापन अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी)  पंकज वास्‍तव ने कहा कि वर्तमान समय में अपराधों की प्रकृति दिन-प्रतिदिन जटिल होती जा रही है, ऐसे में विवेचना को वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधार पर सुदृढ़ करना समय की आवश्यकता है।

 वास्तव ने बताया कि किसी विशेषज्ञ की अनुपस्थिति में अनुसंधान अधिकारी को किस प्रकार दक्षतापूर्वक कार्य संपादित करना चाहिए तथा विभाग द्वारा प्रदाय अत्याधुनिक उपकरणों का अधिक से अधिक व्यावहारिक उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने डीएनए एवं डिजिटल साक्ष्य संकलन के संबंध में विस्तृत एवं इंटरेक्टिव सत्र भी लिया, जिसमें उन्होंने स्वयं प्रशिक्षणार्थियों के साथ प्रश्नोत्तर एवं संवाद किया।  वास्तव ने सीआईडी में पदस्थापना के दौरान समस्त कर्मचारियों को अपना व्यावसायिक स्तर औरों की तुलना में ऊँचा बनाए रखने हेतु प्रेरित किया, जिससे उनकी व्यावसायिक दक्षता में वृद्धि हो और वे पीड़ितों को त्वरित एवं सटीक न्याय दिलाने में अपनी सही भूमिका निभा सकें।

उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से आह्वान किया कि वे कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान एवं तकनीकी दक्षता का अपने-अपने क्षेत्राधिकार में समुचित उपयोग करें, जिससे विवेचना की गुणवत्ता में सुधार हो तथा प्रकरणों में न्यायालयीन साक्ष्य अधिक सुदृढ़ एवं प्रामाणिक बन सकें। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए समस्त आयोजक टीम, विशेषज्ञ वक्ताओं एवं प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

कार्यशाला में उप पुलिस अधीक्षक (फोटो), अपराध अनुसंधान विभाग, भोपाल  अमिताभ तिवारी एवं निरीक्षक  जाम सिंह ने अपराध घटनास्थल फोटोग्राफी के तकनीकी एवं वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घटनास्थल की फोटोग्राफी विवेचना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील हिस्सा है, जिसमें साक्ष्यों को उनकी मूल स्थिति में, व्यवस्थित क्रम (Overall, Mid-range एवं Close-up Photography) में तथा बिना किसी छेड़छाड़ के दस्तावेजीकृत किया जाना आवश्यक है। सत्र में घटनास्थल की वीडियोग्राफी, मृत शरीर, अस्त्र-शस्त्र, रक्त के धब्बे, पद-चिन्ह एवं अन्य भौतिक साक्ष्यों के फोटोग्राफिक साक्ष्यीकरण की मानक प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) पर चर्चा की।

 तिवारी ने फोटोग्राफिक साक्ष्यों के न्यायालयीन प्रमाणीकरण (Court Authentication) की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया, जिसमें फोटोग्राफ की चेन ऑफ कस्टडी (Chain of Custody) बनाए रखना, समय-दिनांक एवं जियो-लोकेशन का उल्लेख तथा न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुतीकरण के दौरान बरती जाने वाली विधिक सावधानियाँ शामिल हैं। उन्होंने डिजिटल फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी में साक्ष्यों की प्रामाणिकता बनाए रखने के तकनीकी उपायों पर भी प्रकाश डाला, जिससे विवेचना अधिकारी न्यायालय में मजबूती से साक्ष्य प्रस्तुत कर सकें।

कार्यशाला के अंतिम सत्र में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों, विषय-वस्तु एवं व्यावहारिक उपयोगिता के संबंध में फीडबैक लिया गया।

समापन कार्यक्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक  साकेत पाण्डेय एवं  प्रशांत खरे, सहायक पुलिस महानिरीक्षक  मनीष खत्री के अतिरिक्त FSL, डॉक्यूमेंट, फिंगरप्रिंट, कम्प्यूटर्स एवं फोटो शाखा के विषय-विशेषज्ञ तथा समस्त प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।

वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रभावी पुलिसिंग का आधार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में पुलिसिंग एवं अपराध अनुसंधान से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रतिभागियों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तकनीकी एवं व्यावहारिक दक्षता को बढ़ाना तथा अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक साक्ष्यों के अधिक प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करना रहा।

कार्यशाला के सफल समापन के साथ प्रतिभागियों को अपराध घटना स्थल के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, फोटोग्राफिक साक्ष्यों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण तथा न्यायालयीन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक, तकनीक आधारित एवं साक्ष्य-केंद्रित बनाने की दिशा में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिसिंग की गुणवत्ता और न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की प्रभावशीलता को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

 

 

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