भोपाल
मध्यप्रदेश में टोल व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सुगम और निर्बाध बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा एक महत्वपूर्ण नवाचार की शुरुआत की गई है। भोपाल–देवास मार्ग के फंदा टोल प्लाजा पर प्रदेश में पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम (SLFF) का पायलट परीक्षण शुरू किया गया है। इस व्यवस्था में वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी और पारंपरिक बूम बैरियर के कारण होने वाली अनावश्यक ब्रेकिंग एवं समय की बर्बादी से भी यात्रियों को राहत मिलेगी।
मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के अधिकारियों ने इस नवाचार और इसके क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया का लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के समक्ष प्रस्तुतीकरण किया। प्रस्तुतीकरण के बाद मंत्री सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समय-सीमा में लागू किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि पायलट परीक्षण के दौरान प्राप्त परिणामों का विधिवत मूल्यांकन किया जाए और इसके आधार पर इसे प्रदेश में वृहद स्तर पर लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जाए।
मंत्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में सड़क अधोसंरचना के विकास के साथ आधुनिक तकनीक के उपयोग को भी प्राथमिकता दी जा रही है। सड़क निर्माण और यातायात व्यवस्था का उद्देश्य केवल बेहतर सड़क उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित, सुगम और समय की बचत वाली यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना भी है। बैरियर-लेस टोलिंग इसी सोच के अनुरूप किया जा रहा एक महत्वपूर्ण नवाचार है।
मंत्री सिंह ने कहा कि जनता की सुविधा की दृष्टि से यह एक उपयोगी पहल है। वर्तमान व्यवस्था में टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के कारण रुकना पड़ता है, जिससे कई बार वाहनों की कतार और अनावश्यक यातायात दबाव की स्थिति बनती है। नई व्यवस्था में वाहन बिना रुके टोल प्लाजा से गुजर सकेंगे। इससे यात्रियों के समय और ईंधन की बचत होगी तथा टोल प्लाजा पर लगने वाली अनावश्यक भीड़ को कम करने में मदद मिलेगी।
चलते वाहन से स्वतः होगा टोल संग्रह
नई तकनीक में चलते हुए वाहन की स्वतः पहचान, वर्गीकरण और फास्टेग के विवरण के आधार पर टोल राशि का संग्रह किया जाएगा। वाहन लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गुजरते हुए भी टोल प्लाजा को पार कर सकेगा। इससे बूम बैरियर के कारण होने वाली ब्रेकिंग और समय की बर्बादी समाप्त होगी।
SLFF लेन में फास्टेग/RFID रीडर, हाई-रिजॉल्यूशन ANPR कैमरे, वाहन डिटेक्शन एवं क्लासिफिकेशन सेंसर, लेन कंट्रोलर तथा ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग सिस्टम लगाए गए हैं। वाहन के लेन से गुजरते ही सिस्टम फास्टेग को स्वतः रीड कर वाहन की पहचान करता है, वाहन की श्रेणी के अनुसार टोल राशि की गणना करता है और फास्टेग खाते से राशि काटने की प्रक्रिया पूरी करता है।
फास्टेग में समस्या होने पर ई-चालान
नई व्यवस्था में फास्टेग से संबंधित तकनीकी समस्याओं के समाधान की व्यवस्था भी की गई है। यदि फास्टेग में पर्याप्त बैलेंस नहीं है, वाहन का पंजीकरण नंबर गलत दर्ज है अथवा किसी अन्य तकनीकी कारण से टोल राशि तत्काल प्राप्त नहीं हो पाती है, तो संबंधित वाहन को ई-चालान के माध्यम से टोल राशि की सूचना दी जाएगी। निर्धारित तीन दिवस में राशि जमा नहीं करने पर नियमानुसार पेनल्टी सहित वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
सफल परीक्षण के बाद होगा व्यापक विस्तार
वर्तमान में फंदा टोल प्लाजा की एक लेन में इस व्यवस्था का पायलट परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण के परिणामों का विधिवत मूल्यांकन करने के बाद सफल पाए जाने पर 1 जनवरी 2027 से भोपाल–देवास मार्ग के तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में इसे लागू करने की योजना है।
मंत्री सिंह ने निर्देश दिये कि पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर इस तकनीक की उपयोगिता, कार्यक्षमता और यात्रियों को मिलने वाली सुविधा का आकलन किया जाए। इसके बाद प्रदेश के अन्य उपयुक्त टोल प्लाजा पर भी बैरियर-लेस टोलिंग लागू करने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा शुरू किया गया यह नवाचार प्रदेश में टोलिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का प्रयास है कि सड़क पर नागरिकों को कम से कम रुकना पड़े, यात्रा में कम समय लगे और आधुनिक तकनीक के माध्यम से उन्हें अधिकतम सुविधा मिले। बैरियर-लेस टोलिंग जैसी तकनीक आधारित व्यवस्थाएं भविष्य में प्रदेश की सड़क यात्रा को और अधिक सुगम एवं निर्बाध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
















