अभिजीत दीपके से क्यों भिड़े मनीष ब्रह्मभट्ट? जानें कौन हैं CJP-D बनाने वाले नेता

नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी बनी और टूटकर दो हिस्से होने की कगार पर भी है। खबर है कि सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी D का ऐलान कर दिया है। इसका मतलब 'डेमोक्रेटिक' या 'लोकतांत्रिक' से है। उन्होंने सीजेपी पर राजनीति करने के आरोप लगाए हैं। कौन हैं ब्रह्मभट्ट जो…

अभिजीत दीपके से क्यों भिड़े मनीष ब्रह्मभट्ट? जानें कौन हैं CJP-D बनाने वाले नेता

नई दिल्ली

कॉकरोच जनता पार्टी बनी और टूटकर दो हिस्से होने की कगार पर भी है। खबर है कि सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी D का ऐलान कर दिया है। इसका मतलब 'डेमोक्रेटिक' या 'लोकतांत्रिक' से है। उन्होंने सीजेपी पर राजनीति करने के आरोप लगाए हैं। कौन हैं ब्रह्मभट्ट जो सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के बाद अब अलग सीजेपी की शुरुआत कर रहे हैं।

ब्रह्मभट्ट के आरोप हैं कि संगठन अब AAP यानी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों की 'मनमाने ढंग से चुनी गई टीम' बन गया है। साथ ही कहा कि इसमें आंदोलन में शामिल रहे लोगों को प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिल रहा है। ब्रह्मभट्ट ने कहा, 'आज हम कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक की शुरुआत कर रहे हैं।'

कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के माय नेता पर दर्ज जानकारी के अनुसार, ब्रह्मभट्ट गुजरात के पालनपुर के हैं। उन्होंने हेमचंद्राचार्य यूनिवर्सिटी से साल 2006 में एलएलबी की है। इससे पहले इसी विश्वविद्यालय से 2005 में बीकॉम की थी। खास बात है कि वह चुनावी राजनीत में भी किस्मत आजमा चुके हैं, लेकिन कुछ खास सफलता नहीं मिली।

उन्होंने साल 2022 में पालनपुर सीट से ही गुजरात विधानसभा चुनाव लड़ा था। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे ब्रह्मभट्ट को हार का सामना करना पड़ा था और महज 964 वोट ही हासिल किए थे। इस सीट पर तब भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार अनिकेत ठक्कर ने 95 हजार से ज्यादा वोट लेकर जीत हासिल की थी।

अलग होकर क्या बोले मनीष ब्रह्मभट्ट
CJP-डेमोक्रेटिक के फाउंडर ब्रह्मभट्ट ने कहा, 'आज हम 'कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक' लॉन्च कर रहे हैं… हमें ऐसा क्यों करना पड़ा? यह आंदोलन देश का था। यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना बहाया था, लेकिन आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया और इसका राजनीतिकरण कर दिया गया। अब यह 'टीम केजरीवाल' बन गई है क्योंकि अभिजीत दीपके और अन्य लोगों ने अपने घरों में आराम से बैठकर 12 सदस्यों की टीम बना ली।'

उन्होंने कहा, 'आंदोलन की सफलता के बाद किसी भी वॉलंटियर या प्रदर्शनकारी को न तो बुलाया गया और न ही उनसे राय ली गई। सोशल मीडिया या इंस्टाग्राम से जुड़े लोगों से भी जरूरी शर्तों के बारे में नहीं पूछा गया। इसके बजाय उन्होंने आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों, एक महिला मित्र और कॉलेज के दोस्तों को शामिल करके टीम बना ली।'

उन्होंने कहा, 'हम चाहते थे कि यह एक राष्ट्रीय टीम हो, जिसमें हर राज्य से पांच लोग हों और उन क्षेत्रों से प्रदर्शनकारियों और वॉलंटियर्स को चुना जाए। हमने इच्छा जताई थी कि चयन प्रक्रिया 'हाई कमांड' या किसी मनमाने अधिकारी के इशारे पर न हो, लेकिन उन्होंने इस इच्छा को ठुकरा दिया और मनमाने ढंग से टीम बना ली। इस टीम को बनाने का विचार भी अरविंद केजरीवाल का ही था क्योंकि वे शुरू से ही धोखेबाज रहे हैं। जब अन्ना आंदोलन शुरू हुआ, तो उन्होंने अन्ना का फायदा उठाया…।'

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports