,

पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी बने सचिन पायलट, वड़िंग और चन्नी गुट को साधना होगा सबसे बड़ा टास्क

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की अटकलों के बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस मामलों का प्रभारी नियुक्त किया है। उन्हें भूपेश बघेल की जगह यह जिम्मेदारी दी गई है। इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी विवाद को साधने की हाईकमान की…

पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी बने सचिन पायलट, वड़िंग और चन्नी गुट को साधना होगा सबसे बड़ा टास्क

चंडीगढ़
 पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की अटकलों के बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस मामलों का प्रभारी नियुक्त किया है। उन्हें भूपेश बघेल की जगह यह जिम्मेदारी दी गई है। इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी विवाद को साधने की हाईकमान की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

सचिन पायलट का पंजाब से कोई सीधा राजनीतिक आधार नहीं रहा है। उनकी राजनीति मुख्य रूप से राजस्थान तक केंद्रित रही है। वह टोंक से कांग्रेस विधायक हैं और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तथा उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। इससे पहले वह दौसा और अजमेर से लोकसभा सांसद भी रहे हैं। फिलहाल वह कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं और दिसंबर 2023 में उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रभारी महासचिव बनाया गया था।

पंजाब के पूर्व CM चरणजीत सिंह चन्नी और उनका गुट बघेल और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से नाराज था। उनका आरोप था कि बघेल ने प्रदेश प्रभारी होने के बावजूद हाईकमान को जमीनी हकीकत नहीं बताई।

उनका कहना था कि चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के लिए किसी मजबूत नेता को कमान सौंपी जाए। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। हाईकमान ने यह मांग मान ली।

पायलट को दोनों गुटों को करना होगा एकजुट
पंजाब में उनकी सबसे बड़ी परीक्षा पार्टी की गुटबाजी को नियंत्रित करना होगी। प्रदेश कांग्रेस में एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का खेमा है, जबकि दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों की अलग राजनीतिक सक्रियता दिखाई देती रही है। ऐसे में पायलट को दोनों पक्षों के बीच समन्वय कायम कर संगठन को एकजुट करना होगा।

इसके अलावा प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाना भी उनके लिए अहम होगा। खास बात यह है कि रंधावा इस समय राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी हैं। ऐसे में पायलट और रंधावा का संगठनात्मक तालमेल दोनों राज्यों में कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। पंजाब में बदलाव के पीछे भूपेश बघेल की कार्यशैली को लेकर पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल भी अहम माने जा रहे हैं।

पायलट को नया प्रभारी क्यों बनाया..3 पॉइंट

    पंजाब कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी और मतभेदों से जूझ रही है। हाईकमान का मानना है कि पायलट संगठन को एकजुट कर सकते हैं।

    राजस्थान में 2013 के चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद पायलट प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए। उन्होंने पांच साल ग्राउंड पर काम किया और अलग-अलग गुटों से तालमेल बैठाते हुए 2018 के चुनाव में कांग्रेस को बहुमत दिला दिया। हाईकमान को उम्मीद है कि इसका फायदा पंजाब में मिलेगा।

    पायलट का यूथ में बड़ा क्रेज है। पायलट ने जैसे 2018 में राजस्थान में कांग्रेस को जीत दिलाई थी, हाईकमान को उनसे पंजाब में वैसा ही करने उम्मीद है।

पंजाब को लेकर लगातार मंथन
उन पर राजा वड़िंग के पक्ष में अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय रहने के आरोप लगाए जाते रहे हैं, जिससे पार्टी के दूसरे धड़ों में असंतोष की धारणा बनी। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल समेत वरिष्ठ नेताओं के बीच पंजाब को लेकर लगातार मंथन हुआ।

इसके बाद बदलाव का फैसला सामने आया। अब पायलट के सामने 2027 के लिए कांग्रेस की नई चुनावी रणनीति तैयार करने, नेताओं को एक मंच पर लाने और जमीनी संगठन को मजबूत करने की चुनौती है। युवा चेहरे के तौर पर उनकी स्वीकार्यता और राजस्थान में संगठन चलाने का अनुभव पंजाब कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports