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बिहार में बाढ़ का कहर, 11 जिलों की 330 पंचायतें प्रभावित; NDRF-SDRF की 37 टीमें तैनात

पटना  बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति के बीच राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ राहत कार्य में जुटा हुआ है। प्रभावित आबादी को तत्काल सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से राज्यभर में कई त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में…

बिहार में बाढ़ का कहर, 11 जिलों की 330 पंचायतें प्रभावित; NDRF-SDRF की 37 टीमें तैनात

पटना
 बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति के बीच राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ राहत कार्य में जुटा हुआ है। प्रभावित आबादी को तत्काल सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से राज्यभर में कई त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं।

विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 110 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 1.98 लाख लोगों को गर्म और पौष्टिक भोजन कराया जा चुका है।

इसके साथ ही, विस्थापित लोगों के लिए 01 राहत शिविर भी शुरू किया गया है, जहां 326 बाढ़ शरणार्थियों के रहने, भोजन और चिकित्सा देखभाल की पुख्ता व्यवस्था की गई है।

आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए जमीनी स्तर पर राहत सामग्री का वितरण तीव्र गति से किया जा रहा है।

ऐसे परिवारों को तात्कालिक आश्रय और खान-पान की सुविधा देने के लिए अब तक लगभग 55,500 पॉलीथीन शीट और 10,400 ड्राई राशन पैकेट बांटे जा चुके हैं।

जलभराव वाले इलाकों में आवागमन को सुगम बनाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राज्य भर में कुल 1,345 नावों को परिचालित किया गया है।

मौजूदा समय में राज्य के 11 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल के 66 प्रखंडों की 330 ग्राम पंचायतों की लगभग 19.57 लाख आबादी जलभराव से प्रभावित है, जहां प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

NDRF और SDRF की टीम तैयार
साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने और त्वरित राहत-बचाव कार्य के लिए राज्य में एनडीआरएफ (एनडीआरएफ) की 10 टीमें और एसडीआरएफ (एसडीआरएफ) की 27 टीमें विभिन्न प्रभावित जिलों में तैनात की गई हैं।

नदियों के जलस्तर पर भी लगातार पैनी नजर रखी जा रही है। 6 सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार, वाल्मीकिनगर बराझ पर गंडक नदी का जलस्राव 1,29,000 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति स्थिर बनी हुई है।

वहीं, वीरपुर बराझ पर कोसी नदी का जलस्राव 1,73,255 क्यूसेक है। सोन नदी के इन्द्रपुरी बराझ पर जलस्राव 2,27,717 क्यूसेक दर्ज हुआ है, जिसमें घटने की प्रवृत्ति देखी जा रही है।

गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती जैसी नदियां कुछ स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार सतर्कता बरती जा रही है।

वर्षापात के आंकड़ों के अनुसार, 01 जून से 06 सितंबर के दौरान राज्य में औसतन 590.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। बिहार मौसम सेवा केन्द्र के अनुसार अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।

इसके मद्देनजर आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी स्थिति पर सतत निगरानी बनाए हुए हैं और हर प्रभावित नागरिक तक त्वरित राहत पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

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