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बिना काम कराए राशि आहरण से मृतकों के जॉब कार्ड पर भुगतान तक, पंचायतों में मिलीं गंभीर अनियमितताएं

पंचायतों में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई, पांच सचिव निलंबित बिना काम कराए राशि आहरण से लेकर मृतकों के जॉब कार्ड पर भुगतान तक मिलीं अनियमितताएं, 11 लोगों पर कार्रवाई मुरैना  जिले की ग्राम पंचायतों में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही, वित्तीय अनियमितता और निर्माण कार्यों में गड़बड़ी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने…

बिना काम कराए राशि आहरण से मृतकों के जॉब कार्ड पर भुगतान तक, पंचायतों में मिलीं गंभीर अनियमितताएं

पंचायतों में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई, पांच सचिव निलंबित

बिना काम कराए राशि आहरण से लेकर मृतकों के जॉब कार्ड पर भुगतान तक मिलीं अनियमितताएं, 11 लोगों पर कार्रवाई

मुरैना
 जिले की ग्राम पंचायतों में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही, वित्तीय अनियमितता और निर्माण कार्यों में गड़बड़ी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देश पर हुई जांच के बाद पांच पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया है। वहीं सरपंच, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

जिला पंचायत के सीईओ कमलेश कुमार भार्गव के अनुसार इमलिया, शहदपुर, अगरोता, रंछोरपुरा, भदावली, बर्रेण्ड, ऐसाह और टिकटोली दूमदार सहित अन्य पंचायतों में जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आईं। प्रशासन ने संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की है।

– मृतक के जॉब कार्ड पर भुगतान, सरपंच पर धारा 40 की कार्रवाई
ग्राम पंचायत इमलिया में मृतक के जॉब कार्ड और परिवार के सदस्यों की पुष्टि किए बिना राशि का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया। इस पर तत्कालीन रोजगार सहायक मधु रामपुरे और रोजगार सहायक व प्रभारी पंचायत सचिव आदिराम मावई को शासकीय कार्य से विरत किया गया। वहीं अनियमित भुगतान और अपूर्ण निर्माण कार्यों के मामले में सरपंच गुड्डी पत्नी राकेश बघेल के खिलाफ मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई की गई है।

– बिना निर्माण राशि निकालने पर सचिव निलंबित
ग्राम पंचायत शहदपुर में मृत व्यक्ति के जॉब कार्ड पर डिमांड डालने और निर्माण कार्यों के नाम पर राशि आहरित करने के आरोप में रोजगार सहायक विनोद कुमार को शासकीय कार्य से विरत किया गया। वहीं बर्रेण्ड और वर्तमान में हुसेनपुर पंचायत में बिना निर्माण कार्य कराए राशि निकालने के मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव महेश चन्द्र जाटव को निलंबित किया गया है।

– मृत व्यक्ति को पेंशन का लाभ दिलाने का मामला
ग्राम पंचायत अगरोता में एक मृत व्यक्ति के संबंध में दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाने और उनके आधार पर नियम विरुद्ध शासकीय पेंशन का लाभ दिलाने के आरोप में पंचायत सचिव रामाधार सिंह जाटव को निलंबित किया गया है।

– निर्माण कार्यों में लापरवाही पर भी गिरी गाज
रंछोरपुरा पंचायत में तालाब और पत्थर नाली का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप नहीं कराने पर तत्कालीन पंचायत सचिव नीरज कर्ण को निलंबित किया गया। रोजगार सहायक गजेन्द्र सिंह धाकड़ को भी शासकीय कार्य से विरत किया गया है। भदावली में जनसुनवाई नहीं करने, मुख्यालय पर अनुपस्थित रहने और हितग्राहीमूलक योजनाओं में लापरवाही के आरोप में पंचायत सचिव विनोद कुमार तोमर को निलंबित किया गया।

– सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें नहीं सुलझाईं, सचिव निलंबित
अम्बाह की ग्राम पंचायत ऐसाह में सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का निराकरण नहीं कराने, मुख्यालय पर उपस्थित नहीं रहने, जनप्रतिनिधियों से अनुचित भाषा का प्रयोग करने और नोटिस का जवाब नहीं देने के आरोप में पंचायत सचिव दिनेश शर्मा को निलंबित किया गया है। वहीं टिकटोली दूमदार में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की कमी और तकनीकी मापदंडों की अनदेखी के मामले में क्षेत्रीय उपयंत्री मातादीन शाक्य को शासकीय कार्य से विरत किया गया है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पंचायतों में शासकीय राशि के उपयोग, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और हितग्राहीमूलक योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधि अथवा अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

– इमलिया पंचायत की जांच पर उठे सवाल, पहले क्लीनचिट फिर कार्रवाई

जांच करते अधिकारी 

इमलिया पंचायत में अनियमितताओं को लेकर अब पूर्व की जांच पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि जनपद पंचायत मुरैना की ओर से पूर्व में कराई गई जांच में पंचायत को क्लीनचिट दे दी गई थी। इसके बाद जिला पंचायत स्तर पर टीम गठित कर दोबारा जांच कराई गई, जिसमें पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और सरपंच की भूमिका में अनियमितताएं पाए जाने पर कार्रवाई की गई है।
अब सवाल यह है कि एक ही मामले की दो जांचों में इतना बड़ा अंतर कैसे आया? क्या जनपद पंचायत की पहली जांच में गंभीर तथ्यों की अनदेखी हुई थी या फिर जिला पंचायत की जांच के निष्कर्षों पर सवाल खड़े होते हैं? यदि पहली जांच में पंचायत को क्लीनचिट दी गई थी तो उस जांच में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा क्यों न हो? कहीं ऐसा तो नहीं कि जिम्मेदारों को बचाने के लिए पहली जांच को प्रभावित किया गया हो? हालांकि इस संबंध में किसी मिलीभगत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में दोनों जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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