इंदौर
बस दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत चलने वाली बसों में कई आधुनिक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। बस शुरू करने से पहले ड्राइवर को अपनी सीट पर लगे ब्रीथ एनालाइजर में फूंक मारनी होगी। यदि उसने शराब पी रखी है तो बस स्टार्ट ही नहीं होगी। इसके साथ ही यात्रियों की सुविधाओं के लिए बस के टिकट ऑनलाइन मिलेंगे।
ड्राइवर को झपकी आने पर सेंसर अलार्म के जरिये सचेत करेगा और बस के अपनी लेन से लहराने या रूट बदलने पर भी सुरक्षा सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। गुरुवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यात्री परिवहन विजन समिट में पुणे की एरो ईगल कंपनी की मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए तैयार बस प्रदर्शित की गई। यह बस कंपनी ने संचालन के लिए रीवा को दी है।
बसों में ये सुरक्षा इंतजाम
80 किमी की तय रफ्तार : बस की अधिकतम गति 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित रहेगी। इससे ज्यादा गति से बस नहीं चलाई जा सकेगी।
सीसीटीवी कैमरे : यात्रियों की निगरानी के लिए बस के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
साइबर सुरक्षा : बस के इलेक्ट्रानिक सिस्टम को हैकिंग से बचाने के लिए गेटवे सॉफ्टवेयर के जरिये सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
आग से सुरक्षा : बस निर्माण में अग्निरोधी प्लाइवुड का इस्तेमाल किया गया है। बैटरी के लिए बस के निचले हिस्से में अलग कंपार्टमेंट है। इसके ऊपर फायर एक्टिंग्विशर लगा है। आग बुझाने के लिए केमिकल और पानी, दोनों की व्यवस्था होगी।
झपकी आई तो अलार्म : ड्राइवर को झपकी आने पर सेंसर उसे अलर्ट करेगा। बस के लहराने पर भी सेंसर सक्रिय होगा, जिससे बस को सीधा रखने में मदद मिलेगी।
दूसरे वाहनों से दूरी : आगे-पीछे करीब 1.5 मीटर की दूरी पर दूसरा वाहन आने पर ड्राइवर को अलर्ट मिलेगा। रिवर्स पार्किंग के लिए भी सेंसर लगाए गए हैं।
इंदौर में अभी सात बसें पहुंचीं
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत इंदौर में अभी सात बसें पहुंची हैं। 45 सीटर इन बसों का डिपो में रंगरोगन किया जा रहा है। 25 दिसंबर से इंदौर में 23 रूट पर सेवा शुरू करने की योजना है। एआइसीटीएसएल के माध्यम से इंदौर से सागर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, नरसिंहपुर, छतरपुर, बीना, नर्मदापुरम और बालाघाट के लिए बसें चलाने की योजना है। इसके अलावा खंडवा-शाजापुर, धार-मंदसौर, धार-पचमढ़ी, झाबुआ-भोपाल, खरगोन-नीमच, बुरहानपुर-नीमच, बड़वानी-आगर मालवा, बड़वानी-शाजापुर और बुरहानपुर-रतलाम सहित अन्य मार्गों पर भी बस सेवा प्रस्तावित है।
अंदर आरामदायक सफर पर चर्चा, बाहर बस में ठसाठस यात्री
ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में यात्री परिवहन समिट के दौरान विशेषज्ञ पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए चार प्रमुख बिंदुओं- रीच, रिलायबिलिटी, कंफर्टेबिलिटी और अफोर्डेबिलिटी पर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान विजयनगर क्षेत्र में एआईसीटीएसएल की अरविंदो से विजयनगर की ओर आने वाली बस में यात्री ठसाठस भरे थे। कई यात्रियों को बैठने की जगह तक नहीं मिली। खुली खिड़कियों से धूल भी यात्रियों को परेशान कर रही थी। इससे आधुनिक और आरामदायक सार्वजनिक परिवहन की जरूरत साफ नजर आई।
यात्रा परिवहन विजन समिट-2026 में विशेषज्ञों के मिले सुझाव
ईवी ट्रांजिशन के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस हो।
बस स्टेशनों को आधुनिक ‘बस पोर्ट’ के रूप में विकसित करें।
छोटे व कम यात्री वाले रूट पर छोटी बसों का संचालन।
बस डिपो पर कमर्शियल गतिविधि, रिटेल और लाजिस्टिक्स से गैर-किराया राजस्व अर्जित करें।
स्मार्ट टिकटिंग और पैसेंजर इंफार्मेशन सिस्टम के माध्यम से बसों के आने-जाने व रूट की रियल टाइम जानकारी।
डिजिटल फीडबैक एवं पारदर्शी शिकायत निवारण व्यवस्था।
आरक्षित, अनारक्षित और नियमित यात्री पास डिजिटल मिलें।
मप्र में परिवहन सेवा
96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें संचालित हैं।
6 महीनों में 486 नई पीएम ई-बसें व 34 नई इंटरसिटी बसें बढ़ेंगी।
2027 तक बसों की संख्या बढ़कर 1,100 पहुंचेगी।
7 डिपो हैं व अगले छह माह में सौ-सौ बस क्षमता के 9 नए अत्याधुनिक डिपो बनेंगे।
प्रति वर्ष 70 हजार टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
300 बसें चल रहीं, जरूरत तीन हजार की
इंदौर में वर्तमान में करीब 300 बसें चल रही हैं, जबकि शहर की जरूरत करीब तीन हजार बसों की बताई गई है। प्रदेश में अभी निजी ऑपरेटर करीब 87 प्रतिशत बसों का संचालन कर रहे हैं। फिलहाल 11 हजार बसें प्रदेश में निजी आपरेटर चला रहे हैं और अगले चार वर्ष में 15 हजार बसें चलाने की योजना है। इंदौर में एआईसीटीएसएल के अलावा भोपाल, ग्वालियर, रीवा, जबलपुर, उज्जैन और सागर में अन्य परिवहन कंपनियां संचालन करेंगी।
2030 तक प्रदेश के 30 प्रतिशत हिस्से में होगा पब्लिक ट्रांसपोर्ट
वर्तमान में 87 फीसद बसे निजी ऑपरेटर चला रहे हैं । मप्र में अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पुर्नजीवित होगा। पीएम ई सेवा व मुख्यमंत्री परिवहन सेवा के तहत फिलहाल 10 हजार बसे प्रदेश के शहरों में चलाई जा रही है। 2030 तक प्रदेश के 169 शहरों में 38 हजार बसें चलाई जाएगी। देश के 30 प्रतिशत सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा उपलब्ध होगी। – शेखर एन धोले, हेड टेक्नीकल सेक्रेटेरिएट, सेंट्रल इंस्टि्टयुट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट
















