BRICS में अमेरिका की नीतियों पर निशाना, फिर भी भारत का रुख संतुलित; क्या बदली विदेश नीति?

नई दिल्ली 8वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में 11 सदस्य देशों की सर्वसम्मति से जारी "नई दिल्ली घोषणापत्र" के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। अमेरिका की तरफ से लगाए जा रहे प्रतिबंधों, टैरिफ युद्ध और मध्य-पूर्व संकट पर जिस कड़े लहजे में घोषणापत्र तैयार किया गया है, उससे यह…

BRICS में अमेरिका की नीतियों पर निशाना, फिर भी भारत का रुख संतुलित; क्या बदली विदेश नीति?

नई दिल्ली
8वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में 11 सदस्य देशों की सर्वसम्मति से जारी "नई दिल्ली घोषणापत्र" के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। अमेरिका की तरफ से लगाए जा रहे प्रतिबंधों, टैरिफ युद्ध और मध्य-पूर्व संकट पर जिस कड़े लहजे में घोषणापत्र तैयार किया गया है, उससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत अपनी पारंपरिक गुटनिरपेक्ष और संतुलित विदेश नीति से

हटकर पश्चिमी विरोधी खेमे की ओर झुक रहा है?
विदेश मामलों के विशेषज्ञों और रिपोर्टों का विश्लेषण यह साफ करता है कि यह भारत का कोई "नीतिगत बदलाव" नहीं, बल्कि ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत की जटिल 'बैलेंसिंग एक्ट' (संतुलन बनाने की कला) की एक बड़ी सफलता है।
अमेरिका और ईरान का नाम नहीं, लेकिन इजरायल पर सीधा निशाना

घोषणापत्र में भाषा के इस्तेमाल और कूटनीतिक शब्दों का चयन बेहद महत्वपूर्ण है।

एकतरफा प्रतिबंध: घोषणापत्र में लिखा, "हम अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ एकतरफा प्रतिबंधों और सेकेंडरी सैंक्शंस की निंदा करते हैं, जो गरीबों को प्रभावित करते हैं।" इसमें अमेरिका का नाम नहीं लिया गया, लेकिन रूस और ईरान को सीधा कूटनीतिक राहत और समर्थन मिला।

परमाणु ठिकानों पर हमले: घोषणापत्र में लिखा, "IAEA की देखरेख वाले शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों और असैन्य बुनियादी ढांचों पर हमलों पर गंभीर चिंता।" यहां भी अमेरिका, इजरायल या ईरान किसी का नाम नहीं, लेकिन तेहरान (ईरान) के उस तर्क को समर्थन मिला कि उनके परमाणु केंद्रों पर हमले अवैध हैं।

लेबनान और इजराइल: घोषणापत्र में लिखा, "हम इजरायल से अपील करते हैं कि वह लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करे और अपनी कब्जाधारी सेना को लेबनानी क्षेत्र से पूरी तरह हटाए।" इसमें इजरायल का स्पष्ट रूप से नाम लिया गया और UN प्रस्ताव 1701 का पालन करने को कहा गया।

ट्रंप 2.0 का दबाव और भारत का अपना रुख
यह घोषणापत्र ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों में टैरिफ और रूसी तेल खरीद को लेकर पहले से ही खिंचाव देखा जा रहा है।

ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को "अमेरिका विरोधी" करार देते हुए डॉलर को कमजोर करने या इस गुट से जुड़ने वाले देशों पर 10% से लेकर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है।

भारत ने रूसी तेल पर अमेरिका की आपत्तियों और अतिरिक्त टैरिफ को "अनुचित और तर्कहीन" करार दिया है। हालांकि, ब्रिक्स घोषणापत्र में अमेरिकी नीतियों की आलोचना के बावजूद, भारत ने संवाद और कूटनीति का रास्ता खुला रखा है।

क्या भारत चीन-रूस के करीब जा रहा है?
नई दिल्ली घोषणापत्र के बाद भारत के कूटनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों में दो अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।

विशेषज्ञ कहते हैं, "भारत का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स को ऐसा मंच बनने से रोकना होना चाहिए जिसका इस्तेमाल चीन अपनी महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षाओं के लिए करे।"

अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला का कहना है, "भारत का भविष्य पश्चिम (अमेरिका और यूरोप) का वैश्विक साझेदार बनने में है। अगर भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते नहीं करता है, तो इससे किसे फायदा होगा, यह सोचने की जरूरत है।"

यह 'शिफ्ट' नहीं, भारत की कूटनीतिक महारत है
11 ऐसे देशों, जिनमें ईरान-UAE या चीन-भारत जैसे विरोधी हित वाले देश शामिल हैं, को एक साझा बयान पर दस्तखत कराना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के इतर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात में स्पष्ट किया कि भारत मध्य-पूर्व में संवाद, कूटनीति और जहाजों की सुरक्षा चाहता है। भारत आज भी रूस, यूक्रेन, अमेरिका, इजराइल और ईरान- सभी विरोधी खेमों से एक साथ संवाद बनाए रखने की अपनी अद्वितीय क्षमता को साबित कर रहा है।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports