,

अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी अग्रिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में सदैव मानवाधिकार आयोग का ध्येय वाक्य "हम सब बराबर, बराबर हमारे अधिकार" चरितार्थ होता रहा है। हमारे वेद वाक्य में यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे अर्थात् जैसे मुझ में है, वैसा ही ब्रह्मांड में है, का भाव समाहित है। हमने सदैव प्रकृति सहित सभी…

अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी अग्रिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में सदैव मानवाधिकार आयोग का ध्येय वाक्य "हम सब बराबर, बराबर हमारे अधिकार" चरितार्थ होता रहा है। हमारे वेद वाक्य में यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे अर्थात् जैसे मुझ में है, वैसा ही ब्रह्मांड में है, का भाव समाहित है। हमने सदैव प्रकृति सहित सभी के साथ यही भाव रखा है। सनातन संस्कृति में मनुष्य योनि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। हमारे पुण्य कर्म मानव जाति के कल्याण के लिए हमें प्रेरित करते हैं। प्रसन्नता और गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग पिछले तीन दशकों से अपने ध्येय वाक्य को चरितार्थ कर रहा है। यह वाक्य हमारे लोकतंत्र की उस मूलभावना का प्रतीक है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को समान गरिमा, समान अधिकार और न्याय का समान अवसर प्राप्त हो। मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग की तीन दशकों की यात्रा मानवाधिकारों के संरक्षण, संवर्धन और मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए समर्पित रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस पर प्रशासन अकादमी आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अजजा वर्ग के मानवाधिकारों पर केंद्रित स्मारिका एवं त्रैमासिक न्यूज लेटर का किया विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह में स्मारिका, आयोग के त्रैमासिक न्यूज लेटर और आयोग की डायरी का विमोचन भी किया। मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग द्वारा इस अवसर पर अनुसूचित जनजाति वर्ग के मानवाधिकारों के संरक्षण और शासकीय योजनाओं की उन तक पहुंच विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मिशन कर्मयोगी अंतर्गत श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मिशन कर्मयोगी स्थापना सप्ताह में जनजातीय कार्य विभाग ने प्रदेश के सभी विभागों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था।

प्रदेशवासियों की सुरक्षा और सम्मान राज्य सरकार की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आयोग ने यह विश्वास मजबूत किया है कि लोकतंत्र में अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी अग्रिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की है। मानवता यही है कि सभी के लिए समानता के भाव के साथ कार्य किया जाये। राज्य मानवाधिकार आयोग निष्पक्षता और अपने मूल्यों के आधार पर कार्य करता रहेगा। प्रदेशवासियों की सुरक्षा और सम्मान राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेशवासियों की सेवा में सक्रिय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी भारतीय संविधान में निहित लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों के प्रति पूर्णत: प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री  मोदी जो कहते हैं, करके दिखाते हैं। कोविड 2019 महामारी के दौर में प्रधानमंत्री  मोदी ने कई देशों के नागरिकों को वैक्सीन उपलब्ध कराई और जियो और जीने दो के भाव को चरितार्थ किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में अनेक वीर क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया। काकोरी कांड के बाद जब क्रांतिकारी पकड़े गए तो अंग्रेज अफसरों ने उन्हें यातनाएं दीं और कई अमानवीय कृत्य किए। प्रदेश में बालाघाट सहित देश के कई क्षेत्रों में नक्सलवाद की समस्या रही लेकिन तत्कालीन सरकारों ने नक्सलवादियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। हमारी सरकार ने लाल सलाम को देश में सबसे पहले अंतिम सलाम किया। विश्व में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मानवाधिकारों के हनन से वर्तमान में भी कष्ट का वातावरण बना हुआ है।

जनजातीय समाज का विकास हमारा सामाजिक और नैतिक दायित्वः जनजातीय कार्य मंत्री  विजय शाह

मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए जनजातीय कार्य मंत्री  कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजातीय समाज का विकास मात्र सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि हम सभी का सामाजिक और नैतिक कर्तव्य भी है। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आत्मसम्मान नहीं आता, तब तक हमारी विकास यात्रा अधूरी है। मंत्री  शाह ने प्रदेश में मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में पूरी संवेदनशीलता के साथ नेतृत्व करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संवेदनशीलता के कारण ही प्रदेश में अंत्योदय की भावना के अनुरूप योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सबसे पहले नक्सल मुक्त हुआ और अब विकास की सौगात नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक भी पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप प्रदेश में विशेष रूप से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह(पीवीटीजी) तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

मंत्री  शाह ने बताया कि मध्यप्रदेश में जनजातीय विकास के लिए 8 हजार करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके माध्यम से जनजातीय वर्ग, विशेष रूप से पीवीटीजी (बैगा, भारिया और सहरिया) को लाभान्वित करने के लिए उनके 14 गांवों में स्कूल, छात्रावास, स्वास्थ्य केंद्र, पक्के आवास और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

जीवन की स्वतंत्रता और गरिमा रखने वाले अधिकार ही मानवाधिकार

आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि-उद्योग सहित सभी क्षेत्रों में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। मानव अधिकारों से आशय उस पर्यावरण और परिस्थितियों से होता है, जो मानव को उसके जीवन की रक्षा, व्यक्तित्व के विकास और निर्माण के लिए अनिवार्य होती हैं। किसी व्यक्ति के जीवन की स्वतंत्रता और गरिमा रखने वाले अधिकार ही मानवाधिकार हैं। आजादी के बाद हमारे संविधान में मानवाधिकारों को प्रस्तावना के साथ ही नागरिकों के मूल अधिकारों के रूप में शीर्ष स्थान दिया गया है। आम नागरिकों में मानवाधिकारों के प्रति जागरुकता लाने के लिए आयोग ने जिले-जिले में जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए हैं। मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों का त्वरित निराकरण करने के साथ ही अब तक जनजातीय वर्ग के पीड़ितों को अब तक 6 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है। इन योजनाओं की जानकारी स्थानीय बोली में उपलब्ध कराना आवश्यक है

ये अधिकारी एवं कर्मचारी हुये सम्मानित

चिन्हित कुल 27 पुरस्कारों में से आज मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मंत्री  शाह ने 09 अधिकारि/कर्मचारी/कार्यालयों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इनमें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले चंबल संभाग के संभागीय उपायुक्त  बृजेश चन्द्र पाण्डेय, उज्जैन संभाग के संभागीय उपायुक्त  गणेश भांवर तथा इंदौर संभाग के संभागीय उपायुक्त  गणेश भांवर शामिल हैं। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिले में बड़वानी की सहायक आयुक्त मती रंजना सिंह, जिला डिंडोरी के सहायक आयुक्त  राजेंद्र कुमार जाटव तथा जिला झाबुआ की सहायक आयुक्त मती सुचित्रा बिसेन शामिल रहे। व्यक्तिगत रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली सु साक्षी नरवरिया, शीघ्रलेखक, सु कामिनी कुपासिया, डाटा एंट्री ऑपरेटर और  रामदयाल चौधरी, निज सहायक शामिल हैं।

जनजातीय समुदायों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलवाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध

आयोग के प्रभारी सचिव  मुकेश कुमार वास्तव ने कहा कि 13 सितंबर 1995 को मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई थी। यह आयोग का 32वां स्थापना दिवस है। अनुसूचित जनजाति समुदाय ने प्रकृति और अपने सांस्कृतिक जीवन मूल्यों को सदियों से संजो कर रखा है। यह उनके अधिकारों के संरक्षण पर गंभीर चिंतन का मंच है। जनजातीय समुदायों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलवाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध हैं। कार्यक्रम में मानवाधिकार आयोग, जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed