सोना खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर, हॉलमार्किंग चार्ज ₹45 से बढ़कर ₹75 हुआ

मुंबई  त्योहारों और शादी के सीजन से ठीक पहले सोना-चांदी खरीदने वालों को झटका लगने वाला है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की हॉलमार्किंग फीस अब 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दी गई है। सरकार ने हॉलमार्किंग कराने की कॉस्ट तीन गुना बढ़ा दी है। यानी एक झटके…

सोना खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर, हॉलमार्किंग चार्ज ₹45 से बढ़कर ₹75 हुआ

मुंबई 
त्योहारों और शादी के सीजन से ठीक पहले सोना-चांदी खरीदने वालों को झटका लगने वाला है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की हॉलमार्किंग फीस अब 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दी गई है। सरकार ने हॉलमार्किंग कराने की कॉस्ट तीन गुना बढ़ा दी है। यानी एक झटके में करीब 67 फीसदी की बढ़ोतरी। नए सिस्टम के तहत अब गोल्ड ज्वेलरी के हर आर्टिकल की हॉलमार्किंग के लिए 75 रुपये चुकाने होंगे। सोने के भाव पहले ही ऊंचे स्तर पर हैं और अब हॉलमार्किंग फीस में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के लिए ज्वेलर्स अपनी तैयारियां तेज कर रहे हैं।

कब से लागू हुई नई हॉलमार्किंग फीस?
BIS ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (हॉलमार्किंग) रेगुलेशन, 2026 में रिवीजन किया है। इससे जुड़ा नोटिफिकेशन 14 सितंबर 2026 को जारी किया गया और नई फीस आधिकारिक गजट में नोटिफिकेशन प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी हो गई है। नए नियमों के मुताबिक ज्वेलर्स को मान्यता प्राप्त हॉलमार्किंग सेंटर्स (AHCs) पर गोल्ड के हर एक आर्टिकल के लिए 75 रुपये की हॉलमार्किंग फीस देनी होगी। एक कंसाइनमेंट पर न्यूनतम चार्ज 200 रुपये होगा। वहीं, चांदी के प्रत्येक आर्टिकल के लिए हॉलमार्किंग फीस 35 रुपये तय की गई है। सिल्वर आर्टिकल के एक कंसाइनमेंट पर कम से कम 150 रुपये का शुल्क देना होगा।

इसके अलावा भी लगेगा चार्ज
नोटिफिकेशन के मुताबिक हॉलमार्किंग सेंट की ओर से बीआईएस के लिए भी एक शुल्क लिया जाएगा। गोल्ड आर्टिकल पर यह 7.50 रुपये प्रति आर्टिकल होगा और एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम 20 रुपये देने होंगे। सिल्वर के मामले में यह शुल्क 3.50 रुपये प्रति आर्टिकल और न्यूनतम 15 रुपये प्रति कंसाइनमेंट होगा। लागू टैक्स इसके एक्स्ट्रा होंगे।

ज्वेलरी पर कितना लगता है GST?
कीमती मेटल की ज्वेलरी पर 3 फीसदी जीएसटी लगता है। राज्य के अंदर सेल होने पर इसमें 1.5 फीसदी CGST और 1.5 फीसदी SGST शामिल है, जबकि इंटर-स्टेट खरीद पर 3 फीसदी IGST लगता है। गोल्ड की प्योरिटी अलग होने पर भी जीएसटी की यह दर नहीं बदलती। सितंबर से ज्वेलरी मार्केट में फेस्टिव डिमांड की तैयारियां तेज होने लगती हैं। इसके बाद नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और फिर वेडिंग सीजन आता है। ऐसे में हॉलमार्किंग फीस में बदलाव ज्वेलर्स की लागत में एक और फैक्टर जोड़ सकता है। ये ऐसे समय में किया गया है जब देश में पहले ही 10 ग्राम सोने का भाव 1,51,894 रुपये है।

हल्की ज्वेलरी पर ज्यादा पड़ेगा असर
फीस बढ़ने का असर खासतौर पर हल्की और कम कीमत वाली ज्वेलरी पर ज्यादा पड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि हॉलमार्किंग शुल्क वजन के हिसाब से नहीं, बल्कि प्रति आर्टिकल लगाया जाता है। यानी 1 ग्राम की ज्वेलरी और ज्यादा वजन वाले आर्टिकल पर भी 75 रुपये का समान शुल्क लगेगा। राजेश रोकड़े ने कहा कि जीजेसी का कहना है कि सोने की कीमतें पहले से ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में प्रति आर्टिकल तय शुल्क बढ़ने से छोटे और मास-मार्केट ग्राहकों के लिए लागत का असर ज्यादा हो सकता है।

ज्वैलर्स एसोसिएशन कर रही हैं विरोध
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए या समीक्षा करनी चाहिए। GJC का कहना है कि जब हॉलमार्किंग अनिवार्य है, तो इसकी लागत बढ़ाने के बजाय सिस्टम में मौजूद फर्जी हॉलमार्किंग और दूसरी गड़बड़ियों पर पहले सख्ती होनी चाहिए। जीजेसी ने कहा कि वह हॉलमार्किंग के खिलाफ नहीं है। संगठन इसे सोने की शुद्धता, पारदर्शिता और ग्राहकों के भरोसे के लिए जरूरी मानता है। लेकिन करीब 67 फीसदी की सीधे बढ़ोतरी को लेकर संगठन ने सवाल उठाए हैं।

60 करोड़ से ज्यादा ज्वेलरी हो चुकी हॉलमार्क
जीजेसी के मुताबिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 जुलाई 2021 से 5 मार्च 2026 के बीच 60 करोड़ से ज्यादा सोने के आर्टिकल HUID के साथ हॉलमार्क किए जा चुके हैं। वहीं, मार्च 2026 तक अनिवार्य हॉलमार्किंग का दायरा बढ़कर 380 जिलों तक पहुंच गया था।

हॉलमार्किंग फीस में कितना बदलाव हुआ?

आभूषण    पुरानी फीस    नई फीस
सोना    ₹45 प्रति आर्टिकल    ₹75 प्रति आर्टिकल
चांदी    ₹35 प्रति आर्टिकल    ₹35 प्रति आर्टिकल

BIS के नियमों के मुताबिक हॉलमार्किंग शुल्क प्रति आर्टिकल होता है, न कि आभूषण के वजन के हिसाब से। 

ग्राहक के लिए हॉलमार्किंग क्यों जरूरी है?
हॉलमार्किंग का उद्देश्य सोने की शुद्धता को लेकर ग्राहक को भरोसा देना है. BIS के अनुसार हॉलमार्क यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि ग्राहक को बताई गई शुद्धता के अनुरूप सोना मिले. सोने का गहना खरीदते समय ग्राहक BIS मार्क, शुद्धता और HUID जरूर जांच सकता है. BIS Care App के जरिए HUID की जानकारी भी सत्यापित की जा सकती है। 

हाल में BIS ने चेन्नई में बिना हॉलमार्क के बिक्री के लिए रखे गए करीब 804 ग्राम सोने के आभूषण जब्त किए थे. इससे त्योहारों के सीजन में गहने खरीदते समय हॉलमार्क और बिल की जांच करने की अहमियत भी बढ़ जाती है। 

सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
ग्राहक गहना खरीदने से पहले उसका वजन, शुद्धता, HUID और BIS हॉलमार्क जरूर जांचें. साथ ही ज्वेलर से पूरा और वैध बिल लें। 

ज्वैलर्स एसोसिएशन ने सरकार से क्या मांग की?
GJC के चेयरमैन राजेश रोकड़े के मुताबिक जब हॉलमार्किंग का कारोबार और वॉल्यूम लगातार बढ़ा है, तो इससे AHCs को बड़े स्तर पर काम करने का फायदा और लागत में कमी लानी चाहिए थी। ऐसे में फीस बढ़ाने से पहले इसकी वास्तविक लागत को ट्रांसपेरेंट बनाने की जरूरी है। राजेश रोकड़े ने कहा कि इंडस्ट्री हॉलमार्किंग का समर्थन करता है, लेकिन लागत में करीब 67 फीसदी बढ़ोतरी करने से पहले समीक्षा होनी चाहिए।

जीजेसी ने हॉलमार्किंग सिस्टम में मौजूद कथित गड़बड़ियों को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन के मुताबिक बीआईएस की कार्रवाई में फर्जी हॉलमार्किंग, बिना अनुमति चल रहे सेंटर और वैध HUID के बिना ज्वेलरी जैसे मामले सामने आते रहे हैं। GJC का कहना है कि ऐसे मामलों पर निगरानी और कार्रवाई मजबूत करना ज्यादा जरूरी है।

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