₹1,200 करोड़ के सचिवालय प्रोजेक्ट पर बढ़ा विवाद, मछुआरों के विरोध के बीच सरकार ने साफ किया रुख

चेन्नई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी सरकार एक मुश्किल में फंस गई है। सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई के पट्टिनापक्कम में नए सचिवालय और विधानसभा कॉम्प्लेक्स बनाने का फैसला लिया था। लेकिन अब सत्ता में समर्थन देने वाली पार्टियों और विपक्ष के विरोध के बीच सरकार इस फैसले…

₹1,200 करोड़ के सचिवालय प्रोजेक्ट पर बढ़ा विवाद, मछुआरों के विरोध के बीच सरकार ने साफ किया रुख

चेन्नई
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी सरकार एक मुश्किल में फंस गई है। सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई के पट्टिनापक्कम में नए सचिवालय और विधानसभा कॉम्प्लेक्स बनाने का फैसला लिया था। लेकिन अब सत्ता में समर्थन देने वाली पार्टियों और विपक्ष के विरोध के बीच सरकार इस फैसले से पीछे हटती हुई नजर आ रही है। बढ़ते विवाद के बीच तमिलनाडु सरकार में मंत्री आधव अर्जुन ने इस मुद्दे पर सरकार का स्टैंड साफ करते हुए कहा कि अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

थलपति विजय सरकार में नंबर दो माने जाने वाले आधव अर्जुन ने राजनीतिक पार्टियों के ऊपर इस पर बिना मतलब राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। अभी तक इस मामले में केवल एक आदेश जारी किया गया था। मुख्यमंत्री विजय इस प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले प्रोजेक्ट की डीपीआर रिपोर्ट की जांच करेंगे। इसके बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।

अभी इस पट्टिनापक्कम के बारे में कोई फैसला नहीं- आधव अर्जुन
आधव अर्जुन ने कहा, "हमने पट्टिनापक्कम सचिवालय के बारे में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। वे इस मामले का राजनीतिकरण कर रहे हैं। हमने सिर्फ एक सरकारी आदेश जारी किया है, और DPR तैयार होने के बाद, हमारे मुख्यमंत्री तय करेंगे कि सचिवालय बनाना है या नहीं।"

इस मामले से प्रभावित होने वाले मछुआरों को संबोधित करते हुए आधव अर्जुन ने भरोसा दिलाया कि किसी को भी परेशानी नहीं आने दी जाएगी और उनके हितों का भी ख्याल रखा जाएगा। आधव ने कहा, "प्यारे मछुआरों हमारे मुख्यमंत्री ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। अभी तो बस यह देखा जा रहा है कि लोगों को कोई आपत्ति तो नहीं है। राजनीतिक दल तुरंत इस पर राजनीति कर रहे हैं।"

सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली सीपीआई एम ने किया था विरोध
थलपति विजय की गठबंधन सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली वामपंथी पार्टी सीपीआई एम ने भी इस मामले पर सरकार को समर्थन वापस लेने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार इस जगह पर नया सचिवालय बनाने के फैसले को वापस ले लेना चाहिए। सीपीआई एम के राज्य सचिव पी. षणमुगम ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को कोई भी फैसला लेने के लिए लोकतांत्रिक तरीका अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर विजय की पार्टी इस फैसले पर फिर से विचार नहीं करती है, तो वह सरकार को समर्थन देने के फैसले पर फिर से विचार करेंगे।

क्या है पट्टिनापक्कम में प्रस्तावित सचिवालय बनाने में परेशानी?
थलपति विजय ने सरकार में आने के बाद से नए सचिवालय और विधानसभा कॉम्प्लेक्स के लिए काम करना शुरू किया था। इसके लिए तमिलनाडु सरकार ने 25.55 एकड़ जमीन को चिह्नित किया था। बता दें, यह जमीन विजय के घर के पास ही है। हालांकि, जल्दी ही इस फैसले का विरोध होना शुरू हो गया। 1,200 करोड़ के इस मेगा प्रोजेक्ट का जल्दी ही मछुआरों और पर्यावरण प्रेमियों ने विरोध करना शुरू कर दिया। इस जगह पर रहने वाले मछुआरों ने चेतावनी दी कि अगर इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाता है, तो वह बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि करीब 1500 से ज्यादा मछुआरा परिवार इस जगह का उपयोग अपने जाल सुखाने और नावों को खड़ा करने के लिए करते हैं। ऐसे में अगर यहां पर कोई निर्माण कार्य होता है, तो उन सभी की आजीविका पर भी असर पड़ेगा। इसके अलावा उनके लिए समुद्र में जाने का रास्ता भी बंद हो सकता है।

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