,

इंदौर एयरपोर्ट के सामने जमीन के नीचे उतरेगी TBM नर्मदा, मेट्रो टनल का काम शुरू

इंदौर  इंदौरवासियों के लिए अंडरग्राउंड मेट्रो का सपना अब जमीन पर उतरने जा रहा है। मंगलवार से शहर में मेट्रो टनल की खुदाई का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगा। यह शहर के इतिहास में पहला मौका होगा जब एयरपोर्ट के ठीक सामने टनल बोरिंग मशीन (TBM) जमीन के भीतर खुदाई करेगी। शुरुआती दौर…

इंदौर एयरपोर्ट के सामने जमीन के नीचे उतरेगी TBM नर्मदा, मेट्रो टनल का काम शुरू

इंदौर 

इंदौरवासियों के लिए अंडरग्राउंड मेट्रो का सपना अब जमीन पर उतरने जा रहा है। मंगलवार से शहर में मेट्रो टनल की खुदाई का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगा। यह शहर के इतिहास में पहला मौका होगा जब एयरपोर्ट के ठीक सामने टनल बोरिंग मशीन (TBM) जमीन के भीतर खुदाई करेगी।

शुरुआती दौर में धीमी रहेगी रफ्तार
    जमीन के अंदर मौजूद मिट्टी और चट्टानों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए, शुरुआत में टीबीएम को 'सॉफ्ट लॉन्चिंग' के तहत बेहद धीमी गति से चलाया जाएगा।

    भूमिगत हिस्से के निर्माण के लिए अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने वाली 'मिक्स्ड फेस शील्ड' टीबीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सुरंग जमीन की सतह से लगभग 9 से 28 मीटर की गहराई में बनाई जाएगी। सुरंग को स्थायी मजबूती देने के लिए इसके भीतर प्रीकास्ट आरसीसी (RCC) रिंग्स लगाई जाएंगी।

आसपास की इमारतों की 24 घंटे होगी निगरानी
    चूंकि एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन तक का यह अंडरग्राउंड रूट घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, इसलिए सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है। मशीन और पूरे निर्माण क्षेत्र में अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं।

    जैसे-जैसे टीबीएम आगे बढ़ेगी, ये सेंसर जमीन और आसपास के भवनों में होने वाले किसी भी मामूली बदलाव को रियल-टाइम में दर्ज करेंगे। यदि कोई भी अप्रत्याशित बदलाव नजर आता है, तो इंजीनियरिंग टीम तुरंत आवश्यक कदम उठाएगी।

खुदाई के बाद डलेगी रिंग
सामान्य बोरिंग मशीन वर्टिकल (सीधी) खुदाई करती है, लेकिन टीबीएम जमीन के समानांतर खुदाई करती है। यह मशीन 'थ्री-टियर सिस्टम' पर काम करती है, जिसमें तीन काम एक साथ होते हैं- पहला ड्रिलिंग, दूसरा प्रीकास्ट सेगमेंटल रिंग (केसिंग पाइप की तरह) डालना और तीसरा मलबा बाहर निकालना।

    काम की गति: काम को बिना रोके 24 घंटे चलाने के लिए तीन शिफ्टें तय की गई हैं। सुरक्षा के लिए हर 1 मीटर की खुदाई के तुरंत बाद रिंग लगा दी जाएगी।

    रूट और मशीन: टीबीएम 'नर्मदा' एयरपोर्ट से बड़ा गणपति के बीच 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग तैयार करेगी, जिसमें 4 अंडरग्राउंड स्टेशन भी बनेंगे। इस भारी-भरकम टीबीएम का कुल वजन लगभग 410 मीट्रिक टन है।

भोपाल की तर्ज पर काम और मलबे का बेहतरीन इंतजाम
    जिस तरह राजधानी भोपाल में मेट्रो टनलिंग का काम रोजाना औसतन 1 से 2 मीटर की गति से चल रहा है, उसी तरह इंदौर में भी सुरक्षा के मद्देनजर शुरुआती रफ्तार 1 से 2 मीटर प्रतिदिन या इससे कम ही रखी जाएगी। 

टनलिंग के दौरान निकलने वाले करीब 4 लाख टन मलबे को बाहर निकालने के लिए कन्वेयर बेल्ट का इस्तेमाल होगा, जहां से इसे डंपरों में भरकर हटाया जाएगा।

शहर में 17.5 किलोमीटर का एलिवेटेड (हवा में) कॉरिडोर पहले ही पूरा हो चुका है। अब अंडरग्राउंड काम के दौरान नागरिकों की सुविधा और सड़क यातायात पर कम से कम असर पड़े, इसके लिए मशीन की रफ्तार को नियंत्रित रखा जा रहा है।

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports