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आहार-विचार और व्यवहार में संतुलन है स्वस्थ जीवन का आधार

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय योग और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति पुन: विश्व में प्रतिष्ठित हुई है। भारतीय संस्कृति और जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है। हमारी रसोई की वस्तुएं और भोजन में मसाले भी आयुर्वेद पर आधारित हैं। भारतीय संस्कृति और वेदों के…

आहार-विचार और व्यवहार में संतुलन है स्वस्थ जीवन का आधार

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय योग और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति पुन: विश्व में प्रतिष्ठित हुई है। भारतीय संस्कृति और जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है। हमारी रसोई की वस्तुएं और भोजन में मसाले भी आयुर्वेद पर आधारित हैं। भारतीय संस्कृति और वेदों के ज्ञान में सर्वे भवन्तु सुखिन: और वसुधैब कुटुम्बकम की भावना छिपी है। हम दुनिया के सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं और पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखते हैं। आयुर्वेद एकमात्र पैथी है, जो इस सिद्धांत में विश्वास करती है कि स्वास्थ्य केवल रोग का उपचार नहीं, रोग से बचाव भी है। आयुर्वेद, आहार-विचार और व्यवहार में संतुलन रखना सिखाता है। इसमें बीमारी से पहले ही व्यक्ति को स्वस्थ रखना महत्वपूर्ण है। कोरोना काल में मानव जीवन की रक्षा में योग, प्राणायाम और आयुर्वेद ने अपनी सामर्थ्य सिद्ध की है। भारत का गौरवशाली अतीत पश्चिमी देशों में पुन: प्रतिष्ठित हो रहा है। इस साल स्कॉटलैंड के एडिनबरा में दुनिया के सबसे पुराने सर्जिकल संस्थान रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स में शल्य क्रिया के जनक महर्षि सुश्रुत की प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 तक आयुष का बाजार लगभग 3 बिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 43 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। राज्य सरकार आयुर्वेद को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुष इंटर्न चिकित्सकों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर कहा कि इस विषय पर आयुष मंत्री  इंदर सिंह परमार से चर्चा उपरांत समुचित निर्देश दिए जा चुके हैं। शीघ्र ही इंटर्न चिकित्सकों को शुभ समाचार प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

आयुर्वेद प्रदर्शनी का हुआ शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाविद्यालय के रजत जयंती ऑडिटोरियम में भगवान धन्वंतरि जी की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इससे पहले परिसर में रक्त चंदन का पौधा रोपा तथा पारम्परिक चिकित्सा पद्धति से जनसामान्य को जोड़ने के लिए लगाई गई आयुर्वेद प्रदर्शनी का शुभारंभ कर विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन भी किया।

स्टेट कंपोजिट हर्बल गार्डन का हुआ लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुर्वेद दिवस पर प्रदेशवासियों को कई सौगातें प्रदान की। इसके अंतर्गत 184 करोड़ रुपए की लागत से बने 25 आयुष भवनों, अस्पतालों और महाविद्यालयों की सौगात प्रदेशवासियों को सौंपी। उन्होंने 4 करोड़ 70 लाख रुपए की लागत से बने 12 आयुष भवनो का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 179 करोड रुपए की लागत से 13 आयुष भवन चिकित्सालयों और आयुर्वेद महाविद्यालयों की आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुर्वेद महाविद्यालय परिसर में 6 एकड़ क्षेत्र में बने स्टेट कंपोजिट हर्बल गार्डन का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय बहुल डिंडौरी जिले में आयुर्वेद को प्रोत्साहन देने के लिए स्थापित 102 करोड़ रुपए लागत के महाविद्यालय का शुभारंभ भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुष वेलनेस पर्यटन केंद्र के नामों का अनावरण किया, अब ये केंद्र आयुष आरोग्यम धाम के रूप में जाने जाएंगे। साथ ही उन्होंने प. खुशीलाल महाविद्यालय में स्थापित हर्बल गार्डन ऑफ स्टेट इंपोर्टेंस के जन प्रवेश का शुभारंभ भी किया।

खगोलीय गणना पर निर्धारित हुआ है आयुर्वेद दिवस

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत ने दुनिया को अष्ट सिद्धियों के माध्यम से अपना महत्व बताया है। इन सिद्धियों में शून्य, दशमलव, योग, आयुर्वेद, खगोल विद्या, ज्योतिष विद्या, वास्तुकला और आध्यात्म भी शामिल है। खगोल शास्त्र की गणना अनुसार 23 सितंबर को दिन और रात का समय बराबर है। इसीलिए इस दिन को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने की पहल की गई है। इसी प्रकार 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। दुनिया के 200 से अधिक देशों में योग दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 21 जून को सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायण में प्रवेश करता है। भारतीय संस्कृति सूर्य आधारित रही है।

शरीर मंदिर जैसा पवित्र है, इसे आयुर्वेद से रखें निरोगी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आयुर्वेद के विशेषज्ञ मानते हैं कि जब किसी इलाके में कोई बीमारी फैलती है तो उसकी औषधि आसपास 25 से 30 किलोमीटर के दायरे में मौजूद होती है। हम बीमार होने पर ही इलाज क्यों ढूंढें। इसीलिए वेलनेस की संकल्पना रखी गई है। हमें अपनी दिनचर्या और खानपान के बल पर स्वयं को स्वस्थ रखने का प्रयास करना चाहिए। योग और आयुर्वेद आधारित जीवनशैली अपनाकर हम बिना किसी कठिनाई के निरोग रह सकते हैं। ईश्वर ने हमें शरीर रूपी मंदिर दिया है, जिसे हमें स्वस्थ रखने का प्रयास करना चाहिए। कोविड के दौर में आयुर्वेद की महिमा सबने देखी है। आयुर्वेद ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जो जीवनभर हमें निरोग रखती है।

पर्यटन से भी आयुष चिकित्सा पद्धति को प्रदेश में प्रोत्साहित किया जा रहा है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में पहला आयुर्वेदिक महाविद्यालय भवन 1916 में ग्वालियर में बना। उसके बाद 1972 में तीन भवन जबलपुर, इंदौर और उज्जैन में बने। इसके बाद बुरहानपुर और फिर भोपाल में पंडित खुशीलाल महाविद्यालय की स्थापना की गई। हमारी सरकार ने प्रदेश में 9 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय स्थापित करने की शुरुआत की है। आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2002-03 के मुकाबले आयुष विभाग के बजट में 16 गुना वृद्धि की है। प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 12 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले जा रहे हैं। राज्य सरकार पर्यटन के माध्यम से आयुष चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहित कर रही है।

प्रदेश में 1,773 आयुर्वेदिक औषधालय, 800 आयुष्मान आरोग्य मंदिर और 58 आुयष विंग संचालित

उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धति के भविष्य में आयुर्वेद का अपना अलग स्थान होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में लगातार मेडिकल और आयुर्वेदिक महाविद्यालयों की संख्या बढ़ रही है। प्रदेश में 2023 तक 7 आयुर्वेदिक और 2 होम्योपैथी व यूनानी पद्धति के महाविद्यालय थे। प्रदेश में 9 आयुष महाविद्यालयों का संचालन किया जा रहा है और अभी 8 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय निर्माणाधीन हैं। प्रदेश में 1,773 आयुर्वेदिक औषधालय, 800 आयुष्मान आरोग्य मंदिर और 58 आयुष विंग काम कर रहे हैं। प्रदेश के 31 सिकल सेल प्रभावित जिलों में भी आयुष विभाग सक्रिय है। आम नागरिकों को योग सिखाने के लिए कक्षाएं प्रारंभ की गई है।

आयुष विभाग आयुर्वेदिक चिकित्सा और चिकित्सकों को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित

प्रमुख सचिव आयुष  शोभित जैन ने कहा कि आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि हमारी समातन सभ्यता का महत्वपूर्ण अंग है। यह दवाओं के साथ मन, शरीर और आत्माओं के संतुलन पर आधारित है। आयुर्वेद ने सदियों पहले वेलनेस की अवधारणा को बता दिया था। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में इसका उल्लेख मिलता है। आयुष विभाग आयुर्वेदिक चिकित्सा और चिकित्सकों को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित है।

कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, विधायक  भगवानदास सबनानी, म.प्र. हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष  ओम जैन,  रविंद्र यति, आयुष आयुक्त मती ऊषा महेश्वरी सहित विभागीय अधिकारी, आयुष चिकित्सक तथा अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या आयुष के विद्यार्थी में उपस्थित थे।

 

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