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स्कूल-कॉलेज के 100 मीटर दायरे में तंबाकू बिक्री पर रोक, फिर बच्चों तक कैसे पहुंच रहा?

रांची  जगन्नाथपुर के सरकारी स्कूल में किशोर विद्यार्थियों के तंबाकू सेवन का मामला सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ बच्चों की आदत तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि जिन उत्पादों की बिक्री पर शिक्षण संस्थानों के आसपास स्पष्ट कानूनी रोक है, वे बच्चों और किशोरों तक आसानी से कैसे पहुंच रहे…

स्कूल-कॉलेज के 100 मीटर दायरे में तंबाकू बिक्री पर रोक, फिर बच्चों तक कैसे पहुंच रहा?

रांची
 जगन्नाथपुर के सरकारी स्कूल में किशोर विद्यार्थियों के तंबाकू सेवन का मामला सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ बच्चों की आदत तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि जिन उत्पादों की बिक्री पर शिक्षण संस्थानों के आसपास स्पष्ट कानूनी रोक है, वे बच्चों और किशोरों तक आसानी से कैसे पहुंच रहे हैं।

शहर के जेवियर कॉलेज, मरवाड़ी कॉलेज समेत कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों के आसपास ऐसी दुकानों में तंबाकू उत्पादों की बिक्री होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में स्कूल-कॉलेजों के आसपास तंबाकू की उपलब्धता और कानून के पालन की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मालूम हो कि झारखंड में कोटपा संशोधन के बाद शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है। साथ ही 21 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को तंबाकू उत्पाद बेचना भी दंडनीय है। उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान भी बढ़ाया गया है।

कानून में रोक, फिर भी दुकानों तक पहुंच :
केंद्र के कोटपा कानून में शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू बिक्री पर रोक का प्रावधान है। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के दिशा-निर्देश भी स्कूल और शैक्षणिक संस्थानों के अंदर तथा निर्धारित दायरे में तंबाकू बिक्री रोकने और संस्थान के बाहर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाने की बात कहते हैं। झारखंड के संशोधन में इस दूरी को 100 मीटर किया गया है और प्रतिबंध का दायरा शिक्षण संस्थानों के अलावा अस्पताल, स्वास्थ्य संस्थान, सार्वजनिक कार्यालय और न्यायालयों तक बढ़ाया गया है।

बच्चों तक पहुंच का रास्ता रोकना सबसे जरूरी :
जगन्नाथपुर के स्कूल में हुई मुख जांच में करीब 200 बच्चों में 10 से अधिक विद्यार्थियों के गाल और मसूड़ों के अंदर सफेद धब्बे मिले थे। कुछ बच्चों से तंबाकू सेवन की जानकारी भी सामने आई। चिकित्सकों ने इसे गंभीरता से लेते हुए आगे की जांच और तंबाकू से दूरी बनाने की सलाह दी है। सफेद धब्बा अपने आप में कैंसर की पुष्टि नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में यह कैंसर-पूर्व बदलाव का संकेत हो सकता है।

इस मामले ने यह सवाल और गंभीर कर दिया है कि यदि किशोर उम्र में बच्चे तंबाकू का सेवन कर रहे हैं तो उन्हें उत्पाद उपलब्ध कराने वाले स्रोतों की भी पहचान क्यों नहीं की जाए।

21 साल से कम को बिक्री पर रोक :
झारखंड संशोधन के अनुसार 21 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को तंबाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित किया गया है। 2021 के संशोधन में शिक्षण संस्थानों समेत निर्धारित स्थानों के 100 मीटर के दायरे में बिक्री पर भी रोक लगाई गई है।

उल्लंघन की स्थिति में एक हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। इसके बावजूद यदि स्कूल-कालेज के आसपास दुकानें तंबाकू उत्पाद बेच रही हैं तो केवल जागरूकता कार्यक्रम पर्याप्त नहीं होंगे। नियमित जांच, दुकानों का सत्यापन और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी जरूरी होगी।

अब स्कूल से बाहर भी हो निगरानी :
बच्चों को तंबाकू से दूर रखने की जिम्मेदारी केवल स्कूल और अभिभावकों की नहीं हो सकती। स्कूल के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र में बिक्री रोकना, नाबालिगों को बिक्री की जांच करना, दुकानदारों को नियमों की जानकारी देना और उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करना भी तंबाकू नियंत्रण व्यवस्था का हिस्सा है।

 

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