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बिहार के शहरों में घटेगा प्रदूषण और गर्मी, मियावाकी तकनीक से बनेंगे माइक्रो-फॉरेस्ट

पटना बिहार के प्रमुख शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण और कंक्रीट के जंगलों के कारण उत्पन्न हो रही अत्यधिक गर्मी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक ठोस कदम उठाया है। शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जापान की प्रसिद्ध 'मियाबाकी' तकनीक का सहारा लिया जाएगा। पर्यावरण,…

बिहार के शहरों में घटेगा प्रदूषण और गर्मी, मियावाकी तकनीक से बनेंगे माइक्रो-फॉरेस्ट

पटना
बिहार के प्रमुख शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण और कंक्रीट के जंगलों के कारण उत्पन्न हो रही अत्यधिक गर्मी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक ठोस कदम उठाया है। शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जापान की प्रसिद्ध 'मियाबाकी' तकनीक का सहारा लिया जाएगा। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग ने संयुक्त रूप से इसका विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया है। पानी के अस्थाई छिड़काव जैसे उपायों के बजाय अब प्राकृतिक और स्थाई समाधान के रूप में इस तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया गया है। जल्द ही राज्य मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलते ही इस पर धरातल पर काम शुरू हो जाएगा।

बढ़ते पीएम-10 और हीट वेव से समाधान की पहल
बिहार के शहरी क्षेत्रों में धूलकणों (PM-10) की बढ़ती मात्रा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है। कंक्रीट के विस्तार से शहरों में सामान्य तापमान पर भी तीखी गर्मी और हीट वेव का अनुभव हो रहा है। पहले अपनाए गए पानी के छिड़काव जैसे तात्कालिक उपाय अपर्याप्त साबित हो रहे थे। इसी समस्या के दीर्घकालिक और स्थाई समाधान के लिए दोनों विभागों ने मियावाकी विधि से सघन पौधरोपण करने की योजना बनाई है।

जानिए क्या है जापानी मियावाकी तकनीक

  • कम जगह में घना जंगल विकसित करने की यह जापानी विधि शहरी पर्यावरण के लिए बेहद प्रभावी मानी जाती है।
  • इस तकनीक के जरिए बहुत ही कम समय और सीमित क्षेत्र में स्थानीय प्रजातियों के अधिक से अधिक पौधे लगाए जाते हैं।
  • इसमें पौधों को अत्यंत पास-पास लगाया जाता है, जिससे यह बहुत कम समय में एक घने जंगल का रूप ले लेता है।
  • इसमें अलग-अलग ऊंचाई वाले पौधे जैसे झाड़ी, छोटे पेड़, मुख्य पेड़ और कैनोपी (ऊंचे पेड़) एक साथ रोपे जाते हैं।
  • पारंपरिक पौधरोपण की तुलना में मियावाकी तकनीक से लगाए गए पौधे 10 गुना तेजी से विकसित होते हैं।
  • ये विधि आम पौधरोपण से थोड़ी खर्चीली है, फिर भी सीमित जगह वाले शहरों के लिए इसे सर्वोत्तम विकल्प माना जाता है।

सार्वजनिक स्थलों और खाली जमीनों का होगा चयन
मियावाकी तकनीक से पौधरोपण करने के लिए शहरों के प्रमुख चौक-चौराहों, भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक इलाकों, सार्वजनिक स्थानों और सड़कों के किनारे उपलब्ध खाली जमीनों को प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय नगर निकायों से आवश्यक सहमति प्राप्त कर इन स्थलों पर सघन पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा।

आम नागरिकों को भी पौधरोपण के लिए किया जाएगा प्रेरित
सार्वजनिक स्थलों के साथ-साथ आम जनता को भी इस हरित अभियान से जोड़ने की योजना है। नागरिकों को उनके घरों के आसपास मौजूद खाली जमीनों पर मियावाकी शैली में छोटे-छोटे सघन उपवन (माइक्रो-फॉरेस्ट) विकसित करने के लिए प्रोत्साहित और जागरूक किया जाएगा, ताकि पूरे शहर का हरित आवरण तेजी से बढ़ सके।

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