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योगी सरकार की संवेदनशील पहल: चाइल्ड हेल्पलाइन ने 5 महीने के मासूम को मां की गोद वापस दिलाई

योगी सरकार की संवेदनशील पहल: चाइल्ड हेल्पलाइन ने 5 महीने के मासूम को मां की गोद वापस दिलाई तत्काल कार्रवाई होने से फईमा खातून ने..

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योगी सरकार की संवेदनशील पहल: चाइल्ड हेल्पलाइन ने 5 महीने के मासूम को मां की गोद वापस दिलाई

योगी सरकार की संवेदनशील पहल: चाइल्ड हेल्पलाइन ने 5 महीने के मासूम को मां की गोद वापस दिलाई
तत्काल कार्रवाई होने से फईमा खातून ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद व्यक्त किया
पारिवारिक विवाद में पिता ने दुधमुंहे बच्चे को मां से किया था अलग
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 ने एएचटीयू और बाल कल्याण अधिकारी के साथ त्वरित हस्तक्षेप किया
काउंसलिंग के बाद शहाबुद्दीन ने बच्चे को पत्नी को सौंपा
मिशन वात्सल्य योजना के तहत बच्चों की सुरक्षा पर सरकार का विशेष फोकस
लखनऊ 
 उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में लगातार संवेदनशील और प्रभावी कदम उठा रही है। खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा, गुमशुदा बच्चों की तलाश और पारिवारिक विवाद के चलते मां से अलग हुए मासूमों की मदद को लेकर राज्य सरकार की पहल लगातार असर दिखा रही है। इसका ताजा उदाहरण बिजनौर जिले में सामने आया, जहां चाइल्ड हेल्पलाइन की सक्रियता से 5 माह के दुधमुंहे बच्चे को उसकी मां से मिलाया गया है। 
बच्चे को अपने पास रख पत्नी को घर से दिया था निकाल
दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित महिला कल्याण विभाग की मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत चल रही चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अब जरूरतमंद बच्चों और परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर उभर रही है। बीती 3 मई चाइल्ड हेल्पलाइन टीम को सूचना मिली थी कि बिजनौर जिले में पारिवारिक विवाद के चलते शहाबुद्दीन नाम के शख्स ने अपने पांच महीने के बच्चे को अपने पास रख उसकी मां को घर से निकाल दिया है। मामला बेहद संवेदनशील था, क्योंकि बच्चा बहुत कम उम्र का था और पूरी तरह अपनी मां की देखभाल और मातृ दुग्ध पर निर्भर था। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने इसे गंभीरता से लिया और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी। बताते चलें कि योगी सरकार के निर्देश पर प्रदेश में महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। 
अधिकारियों ने माता-पिता से अलग-अलग बातचीत कर समझाया
इसी क्रम में चाइल्डलाइन टीम ने बिना देरी किए संबंधित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और स्थानीय थाना के बाल कल्याण अधिकारी से संपर्क किया। संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन किया और दोनों पक्षों से अलग-अलग एवं संयुक्त रूप से बातचीत की। पारिवारिक विवाद का सीधा असर पांच माह के मासूम पर पड़ रहा था। शिशु की उम्र बेहद कम होने के कारण उसे मां की गोद, मातृ दुग्ध और निरंतर देखभाल की जरूरत थी। अधिकारियों ने बच्चे के पिता शहाबुद्दीन को समझाया कि इतनी कम उम्र में बच्चे को मां से अलग रखना उसके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
काउंसलिंग के बाद पिता ने बच्चे को मां के सुपुर्द किया
चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम और बाल कल्याण अधिकारियों ने कानूनी एवं सामाजिक पहलुओं से भी पिता को अवगत कराया। टीम ने काउंसलिंग करते हुए मां फईमा और पिता शहाबुद्दीन के बीच संवाद स्थापित कराया और विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया। इसका नतीजा यह रहा है कि शहाबुद्दीन बच्चे को अपनी पत्नी फईमा को सुपुर्द करने के लिए सहमत हो गया था। संयुक्त टीम की मौजूदगी में 5 महीने के मासूम को सुरक्षित रूप से उसकी मां की देखरेख में सौंप दिया गया। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि बच्चे को आवश्यक मातृ पोषण और उचित देखभाल मिलती रहे। फिलहाल मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 लगातार ऐसे मामलों में अहम भूमिका निभा रही है। 
फईमा ने बच्चे के पालन पोषण के लिए मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
गाजियाबाद के लोनी की रहने वाली फईमा खातून ने बताया कि परिवारिक विवाद के चलते पति शहाबुद्दीन ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया था और बच्चा भी छीन लिया था। जिसकी शिकायत उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर की थी। चाइल्ड हेल्पलाइन ने तत्काल मामले को संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की थी। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने मुझे मेरा बच्चा दिला दिया है। जिसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी और उनकी टीम का धन्यवाद व्यक्त करती हूं। हम सदैव उनके आभारी रहेंगे। फिलहाल पीड़ित फईमा बच्चे को लेकर अपने मायके चली गई है। उन्होंने बच्चे के पालन-पोषण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है। 
भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रहेगीः उप निदेशक
महिला कल्याण निदेशालय के उप निदेशक पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। बिजनौर में 5 माह के शिशु को उसकी मां से मिलाने का मामला इसी संवेदनशील और प्रभावी कार्यप्रणाली का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि शिशु की कम आयु को देखते हुए उसकी सुरक्षा, पोषण और मातृ देखभाल सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक था। चाइल्ड हेल्पलाइन टीम, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और बाल कल्याण अधिकारियों के समन्वित प्रयास से मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकाला गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी।

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