कलकत्ता
पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद सत्ता गंवाने वालीं ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ विपक्ष की एकता का आह्वान किया था। लेकिन अब उनके इस आह्वान को कांग्रेस और वाम दलों ने सिरे से खारिज कर दिया है। सीपीआई (एम) ने साफ किया है कि वह किसी भी ऐसी पार्टी के साथ मंच साझा नहीं करेंगे, जो कि अपराध, जबरन वसूली और भ्रष्ट हों। वहीं कांग्रेस ने ममता बनर्जी द्वारा अति-वामपंथियों के साथ जाने वाली बात पर निशाना साधा है।
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस प्रवक्ता सौम्य आइच राय ने ममता बनर्जी के विपक्षी एकता के आह्वान पर सबसे पहले प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हमें अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा है। आपने (ममता बनर्जी ने) राष्ट्रीय दलों को, कांग्रेस और वाम और अति-वामपंथियों को एक साथ शामिल होने का निमंत्रण दिया है। अति वामपंथियों से आपका क्या तात्पर्य है? क्या आपका मतलब माओवादियों से है, जिन्होंने 25 मई, 2013 को छत्तीसगढ़ में 18 कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी थी?”
सीपीआई (एल) का भी इनकार
कांग्रेस के बाद सीपीआई (एल) के सचिव मोहम्मद सलीम बनर्जी ने ममता बनर्जी के प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी के साथ हम बिलकुल नहीं जाएंगे। हम ऐसी किसी भी अपराधी, जबरन वसूली करने वाली भ्रष्ट और सांप्रदायिक व्यक्ति को स्वीकार नहीं करेंगे। हम जनता और हाशिए पर खड़े लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।”
आपको बता दें, अपनी पूरी राजनीति कांग्रेस और वामपंथियों के विरोध पर खड़ी करने वाली ममता बनर्जी ने इसी दम पर बंगाल में 15 साल तक शासन चलाया है। लेकिन विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी प्रमुख ने इन सभी दलों को भाजपा के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान दे दिया।
ममता ने किया था एकता का आह्वान
शनिवार को बंगाल में सुभेंदु अधिकारी की सत्ता आने के बाद ममता बनर्जी ने वीडियो संदेश जारी करके विपक्षी एकता का आह्वान किया था। उन्होंने कहा, “मैं बंगाल के सभी विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और गैर सरकारी संगठनों से भाजपा के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह करती हूं। भाजपा का विरोध करने वाले सभी राजनीतिक दलों के साथ एक संयुक्त मंच बनाया जा सकता है।”
उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय दलों के साथ-साथ, मैं वामपंथियों और अति-वामपंथियों से भी बंगाल और दिल्ली में एकजुट होने का आग्रह करती हूं। अगर कोई राजनीतिक दल मुझसे बात करना चाहता है, तो मैं उपलब्ध हूं। यह याद रखना चाहिए कि हमारा पहला दुश्मन भाजपा है।”
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा विपक्षी एकता का यह आह्वान राज्य की सच्चाई को प्रदर्शित करता है। पिछले एक दशक में भाजपा के उदय ने ममता बनर्जी को उन्हीं वाम दलों से सहयोग मांगने के लिए मजबूर कर दिया, जिनका तीन दशक पुराना ढहाकर उन्होंने सत्ता हासिल की थी। भले ही ममता ऊपरी स्तर पर इस विपक्षी एकता के सपने देख रही हैं, लेकिन ऐसा होना आसान नहीं है। क्योंकि न तो कांग्रेस और न ही वाम दल ममता सरकार से खुश नजर आए थे। पश्चिम बंगाल में निचले स्तर पर वाम दलों के कार्यकर्ताओं और टीएमसी के कार्यकर्ताओं का खूनी संघर्ष अभी भी लोगों को याद है। ऐसे में भले ही ममता बनर्जी भाजपा के हिंदुत्व कार्ड का जवाब देने के लिए तृणमूल और लाल झंडे को एक साथ लाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन ऐसा होना आसान नहीं है, क्योंकि वह ममता ही थीं, जिन्होंने बंगाल से वामपंथ को उखाड़ फेंका था। विधानसभा चुनाव में वामपंथ ज्यादातर सीटों पर अपनी जमानत भी नहीं बचा पाया है।
करारी हार के बाद ममता बनर्जी को झटका, कांग्रेस और लेफ्ट ने BJP के खिलाफ गठबंधन से किया इनकार
कलकत्ता पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद सत्ता गंवाने वालीं ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ विपक्ष की एकता का आह्वान किया था। लेकिन अब उनके इस आह्वान को कांग्रेस और वाम दलों ने सिरे से खारिज कर दिया है। सीपीआई (एम) ने साफ किया है कि वह किसी भी ऐसी पार्टी के साथ मंच…

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