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देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतलों की तैयारी, दिल्ली-पंचकूला में 221 फीट और देहरादून में 181 फीट ऊंचाई

अंबाला देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतले का रिकार्ड कायम करने वाले अंबाला के बराड़ा ब्लॉक से तेजेंद्र चौहान इस बार देश की राजधानी दिल्ली समेत पंचकूला और देहरादून में रावण के पुतले तैयार कर रहे हैं। हालांकि इस बार राजस्थान के कोटा में चौहान अपने कारीगरों के साथ नहीं पहुंचे हैं, जबकि उक्त…

देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतलों की तैयारी, दिल्ली-पंचकूला में 221 फीट और देहरादून में 181 फीट ऊंचाई

अंबाला
देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतले का रिकार्ड कायम करने वाले अंबाला के बराड़ा ब्लॉक से तेजेंद्र चौहान इस बार देश की राजधानी दिल्ली समेत पंचकूला और देहरादून में रावण के पुतले तैयार कर रहे हैं।

हालांकि इस बार राजस्थान के कोटा में चौहान अपने कारीगरों के साथ नहीं पहुंचे हैं, जबकि उक्त तीनों स्थानों पर साढ़े तीन माह से रावण के पुतलों को तैयार किया जा रहा है।

इन तीनों पुतलों पर स्थानीय रामलीला कमेटियों द्वारा कुल एक करोड़ दस लाख रुपये का खर्च होगा। इन में ही इन दिनों तेजेंद्र चौहान जुटे हैं और दशहरे से पहले इन रावण के पुतलों को खड़ा कर दिया जाएगा।

बता दें कि बराड़ा से शुरु हुआ यह सफर साल 2017 में खत्म हो गया था जब चौहान ने यहां पर 210 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण किया था।

जगह कम होने के कारण इसे पंचकूला शिफ्ट कर दिया गया था जहां पर 221 फीट का पुतला तैयार किया गया था। अब इसी ऊंचाई का पुतला दिल्ली और पंचकूला में तैयार होगा, जबकि देहरादून में इसकी ऊंचाई 181 फीट रखी गई है।

तीनों पुतलों पर 20.5 टन लोहा लगेगा
चौहान ने बताया कि तीनों स्थानों पर बनने वाले रावण के पुतलों में 20.50 टन लोहे का इस्तेमाल किया जाएगा। ऊचाई के हिसाब से यह तय होता है।

दिल्ली और पंचकूला में जो रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं, उनमें प्रति पुतले में सात टन लोहा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह देहरनादून में बनने वाले रावण के पुतले में साढ़े छह टन लोहा इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा प्रति पुतले में दो लाख रुपये की आतिशबाजी भी लगाई जाएगी, जो ईको फ्रेंडली होगी।

बराड़ा के कारीगर जुटे हैं निर्माण
इन तीनों पुतलों को बनाने में अंबाला के ही कारीगर जुटे हैं। बराड़ा से चौहान अपनी टीम लेकर चलते हैं। एक पुतला बनाने में चालीस करीगरों की टीम लगती है यानी तीनों पुतले बनाने में कुल 120 कारीगर जुटे हैं।

खास है कि इन पुतलों को बनाने के बाद खड़ा करने के लिए क्रेन का सहारा लेना पड़ता है। यह पुतले भी टुकड़ों में बनते हैं। पुतले का हर हिस्सा अलग तैयार किया जाता है और बाद में इनको जोड़ा जाता है। यह पुतले कई किलोमीटर दूर से दिखाई देने लगते हैं। देश में बनने वाले रावण के यह सबसे बड़े पुतले हैं।

इस तरह से है ऊंचाई
 रावण के जो पुतले 221 फीट ऊंचे बनाए जा रहे हैं। उनमें हर हिस्से की अलग ऊंचाई है। इसके तहत रावण के सिर पर 58 फीट का मुकुट, चेहरा 25 फीट, गर्दन 8 फीट और धड़ 90 फीट, पैरों की ऊंचाई 40 फीट, जूतियों की ऊंचाई दस फीट, रावण के हाथ में तलवार 50 फीट, जूते की लंबाई 40 फीट है।

इसी तरह रावण का जो पुतला 181 फीट का है, उसमें मुकुट 45 फीट, चेहरा 20 फीट, गर्दन 6 फीट, धड़ 80 फीट, पैर 32 फीट, जूते की ऊंचाई छह फीट तथा लंबाई 36 फीट तथा रावण की तलवार र35 फीट की है।

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