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मेहनत की मिसाल बनी किसान की बेटी, प्रियंका सिहाग ने तीसरे प्रयास में हासिल की 40वीं रैंक; बनीं SDM

हनुमानगढ़  सफलता किसी की मोहताज नहीं होती, और जब इरादे मजबूत हों तो गांव-देहात से निकलकर भी देश-प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षाओं को फतह किया जा सकता है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की रावतसर तहसील के बरमसर गांव की रहने वाली प्रियंका सिहाग ने इस बात को साबित कर दिखाया है। एक साधारण किसान परिवार…

मेहनत की मिसाल बनी किसान की बेटी, प्रियंका सिहाग ने तीसरे प्रयास में हासिल की 40वीं रैंक; बनीं SDM

हनुमानगढ़ 
सफलता किसी की मोहताज नहीं होती, और जब इरादे मजबूत हों तो गांव-देहात से निकलकर भी देश-प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षाओं को फतह किया जा सकता है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की रावतसर तहसील के बरमसर गांव की रहने वाली प्रियंका सिहाग ने इस बात को साबित कर दिखाया है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाली प्रियंका ने लगातार तीन बार राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा पास की और अब अपने तीसरे प्रयास में प्रदेशभर में 40वीं रैंक हासिल कर एसडीएम (SDM) बनने का सपना पूरा किया।

21 वर्ष की उम्र में शुरुआत और लगातार 3 बार सफलता
प्रियंका सिहाग की यह यात्रा महज एक बार में मिली सफलता नहीं, बल्कि धैर्य, निरंतरता और कड़ी मेहनत की मिसाल है।

पहला प्रयास (RAS-2021): महज 21 वर्ष की उम्र में प्रियंका ने पहली बार परीक्षा दी और पूरे राजस्थान में 599वीं रैंक हासिल की। हालांकि, केवल 1 अंक से सेवा आवंटन रुक जाने के कारण उन्हें पद नहीं मिल सका, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

दूसरा प्रयास (RAS-2023): प्रियंका ने अपनी गलतियों से सीख लेते हुए दूसरे प्रयास में 265वीं रैंक प्राप्त की और उनका चयन असिस्टेंट कमर्शियल टैक्स ऑफिसर (ACTO – GST) के पद पर हुआ।

तीसरा प्रयास (RAS-2024): शादी के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और तीसरे प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल राजस्थान 40वीं रैंक हासिल की। इसके बाद सितंबर 2026 में हुए सेवा आवंटन में उन्हें SDM का पद मिला।

प्रियंका की शादी बीकानेर जिले के खाजूवाला निवासी दिलीप कुमार भांभू से हुई है, जो राजस्थान तहसील सेवा (2018 बैच) के अधिकारी हैं और वर्तमान में तहसीलदार के पद पर कार्यरत हैं। उनके ससुर आसाराम भांभू भी एक सरकारी शिक्षक हैं। प्रियंका ने बताया कि शादी के बाद RAS-2024 परीक्षा की तैयारी करने और अपना लक्ष्य हासिल करने में उन्हें अपने पति और ससुर का पूरा प्रोत्साहन और मार्गदर्शन मिला।

पारिवारिक संघर्ष और प्रेरणा की कहानी
प्रियंका के पिता पुरुषोत्तम सिहाग एक साधारण किसान हैं जो गांव में ही खेती-बाड़ी करते हैं, जबकि मां उर्मिला देवी गृहिणी हैं। कॉलेज के दूसरे वर्ष के दौरान प्रियंका ने मोबाइल पर प्रशासनिक अधिकारियों के प्रेरणादायक वीडियो देखे थे, जिसके बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का मन बनाया।

युवाओं के लिए प्रेरणादायक सीख
प्रियंका सिहाग का संदेश बिल्कुल साफ है कि यदि पहली बार में मनचाही सफलता या रैंक न मिले, तो निराश होने की बजाय अपनी कमियों को सुधारना चाहिए। सही रणनीति, परिवार के सहयोग और लगातार मेहनत के दम पर जीवन में किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। सही दिशा में किया गया प्रयास हमेशा रंग लाता है।

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