कोरबा.
चांपा से उरगा और फिर आगे कटघोरा तक बनने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का मामला पिछले चार वर्षों से अटका हुआ है. दो चरणों में बंटी महत्वकांक्षी परियोजना का चांपा से उरगा तक का पहला चरण जैसे तैसे पूरा हो गया है, लेकिन दूसरा चरण उलझा हुआ है.
इसके कारण 51 गांवों में रजिस्ट्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है. यह पाबंदी आज हटेगी. इसके साथ ही प्रभावित गांव के हजारों ग्रामीणों को बड़ी राहत मिल जाएगी. राष्ट्रीय राजमार्ग के एलाइनमेंट तय न होने का खामियाजा आसपास के 51 गांव के भूविस्थापितों और किसानों को भुगतना पड़ रहा है. सड़क निर्माण के संभावित दायरे की वजह से इन गांवों में जिला प्रशासन द्वारा जमीनों की खरीदी बिक्री और रजिस्ट्री पर पूरी तरह रोक लगाई गई है. लोग अपनी ही जमीन के मालिक होने के बावजूद न तो उस पर कोई निर्णय ले पा रहे हैं और न ही प्रशासनिक पाबंदियों के कारण कोई राहत पा रहे हैं. वर्षों से परेशानी झेल रहे 51 गांव के ग्रामीणों के लिए बुधवार का दिन राहत की खबर लेकर आएगा. बताया जा रहा है कि 51 गांवों की रजिस्ट्री पर लगी पाबंदी को आज हटा दिया जाएगा. पाबंदी हटाने संबंधित आदेश आज जारी होगी.
रजिस्ट्री पर लगी पाबंदी हट जाने से ग्रामीणों को राहत मिलेगी.चांपा-कटघोरा राष्ट्रीय राजमार्ग की महत्वकांक्षी परियोजना को वर्ष 2017 में मंजूरी मिली थी. उरगा से चांपा 38.2 किमी की लागत 630 करोड़ थी. जिसे पूर्ण कर लिया गया है. इसका दूसरा चरण उरगा से कटघोरा 38 किमी है. जिसकी लागत पहले 999 करोड़ थी. समय बीतने के साथ लागत बढ़कर अब 1200 करोड़ हो गई है. लेटलतीफी पर और भी लागत बढ़ने की संभावना है. महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी केंद्रीय राजमार्ग और सड़क परिवहन मंत्रालय से मिली थी.
















