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मध्यप्रदेश में खनन का नया मॉडल, निजी कंपनियों को मिलेगी हिस्सेदारी; 30 हजार करोड़ राजस्व का लक्ष्य

भोपाल  प्रदेश की धरती में छिपे खनिज संसाधनों की तलाश अब राज्य सरकार निजी कंपनियों के माध्यम से कराएगी। इसके लिए खनिज विभाग ने मिनरल एक्सप्लोरेशन पॉलिसी तैयार की है। इसमें कंपनियों को खनिजों की खोज के बदले उत्खनन में हिस्सेदारी देने का प्रावधान किया जा रहा है। इससे सरकार को खनिजों की खोज पर…

मध्यप्रदेश में खनन का नया मॉडल, निजी कंपनियों को मिलेगी हिस्सेदारी; 30 हजार करोड़ राजस्व का लक्ष्य

भोपाल 

प्रदेश की धरती में छिपे खनिज संसाधनों की तलाश अब राज्य सरकार निजी कंपनियों के माध्यम से कराएगी। इसके लिए खनिज विभाग ने मिनरल एक्सप्लोरेशन पॉलिसी तैयार की है। इसमें कंपनियों को खनिजों की खोज के बदले उत्खनन में हिस्सेदारी देने का प्रावधान किया जा रहा है। इससे सरकार को खनिजों की खोज पर सीधे राशि खर्च नहीं करनी पड़ेगी और पर कार खनिज धडार मिलने पर राजस्व अवसर भी बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पॉलिसी पर आगे काम बढ़ाने का अनुमोदन कर दिया है।

पॉलिसी में खासतौर पर क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ एलीमेंट की खोज (Critical Rare Earth Minerals Mining) पर जोर दिया गया है। इन खनिजों की पहचान के लिए अत्याधुनिक तकनीक और महंगी मशीनों की जरूरत होती है। मप्र खनिज निगम के माध्यम से कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित कर उन्हें अलग अलग क्षेत्रों में खोजबीन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। कंपनियां अपने संसाधनों से सर्वे और खोज करेंगी। इसके बदले उन्हें उत्खनन व उद्योग में भागीदारी भी मिलेगी।

सैटेलाइट से निगरानी, अवैध खनन पर पेनाल्टी
दूसरी ओर, खनिज विभाग ने गौण खनिजों के खनन को नियंत्रित करने के लिए नए माइनर मिनरल रूल्स का ड्राफ्ट तैयार कर शासन को भेजा है। मंजूरी मिलने के बाद इन्हें लागू किया जाएगा। नए नियमों में पर्यावरण संरक्षण के साथ खनन गतिविधियों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। इसके तहत सैटेलाइट से खदानों की निगरानी, ऑनलाइन चालान और ई-चेकगेट के माध्यम से परिवहन संबंधी प्रक्रियाओं को डिजिटल किया जाएगा। निर्धारित क्षेत्र और गहराई से अधिक खनन करने या बिना अनुमति खनन करने पर पेनाल्टी बढ़ाने का प्रस्ताव है।

पांच साल में राजस्व दोगुने करने का लक्ष्य
सीएम डॉ. मोहन यादव ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ किया जाए। निवेश के साथ प्रदेश में रोजगार के अवसर भी सृजित हों। खनिज से होने वाली आय का अधिकतम हिस्सा जनहित पर खर्च करें। खनिज विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल के अनुसार, 2026-27 में खनिज राजस्व 13,720 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। वहीं, 2030-31 तक इसे बढ़ाकर 30 हजार करोड़ करने की योजना है। नई एक्सप्लोरेशन पॉलिसी और खनन नियमों में बदलाव को इस लक्ष्य की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

पॉलिसी से ये फायदा?
सरकार पर खर्च का बोझ कमः
निजी कंपनियां अपने संसाधनों से खनिजों की खोज करेंगी। सरकार को सीधे निवेश नहीं करना पड़ेगा।

दुर्लभ खनिजों की तलाश में तेजीः क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ एलीमेंट की खोज के लिए आधुनिक तकनीक व मशीनों का उपयोग बढ़ेगा।

निवेश को प्रोत्साहनः खनिजों की खोज और उत्खनन में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी। खनिज आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

राजस्व में वृद्धिः नए खनिज भंडार मिलने व व्यावसायिक उत्खनन से सरकार की आय बढ़ सकती है।

रोजगार के नए अवसरः खनन, खनिज प्रसंस्करण और उनसे जुड़े उद्योगों में स्थानीय स्तर पर रोजगार बढेगा।

अवैध खनन पर अंकुशः सैटेलाइट निगरानी, ई-चेकगेट व ऑनलाइन चालान से अवैध खनन पर निगरानी मजबूत होगी।

पर्यावरण संरक्षणः खदानों के आसपास पर्यावरण सुधार को अनिवार्य बनाने और उल्लंघन पर पेनाल्टी से पर्यावरणीय नुकसान कम करने में मदद मिलेगी।

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