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त्रिवर्षीय आबकारी नीति से निर्यात उछला तो यूपी में किसानों और उद्योगों के लिए बढ़े अवसर

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) का असर विदेशी बाजारों से आगे किसानों और उद्योगों तक दिखाई देने लगा है। निर्यात बढ़ने के साथ कच्चे माल की मांग में भी तेजी आई है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, जबकि ग्रेन आधारित आसवनियों…

त्रिवर्षीय आबकारी नीति से निर्यात उछला तो यूपी में किसानों और उद्योगों के लिए बढ़े अवसर

लखनऊ

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) का असर विदेशी बाजारों से आगे किसानों और उद्योगों तक दिखाई देने लगा है। निर्यात बढ़ने के साथ कच्चे माल की मांग में भी तेजी आई है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, जबकि ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने के कारण अनाज की खरीद में वृद्धि हुई है। इससे कृषि और उद्योग के बीच आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है।

नई इकाइयों से औद्योगिक गतिविधियों को बल

प्रदेश में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों के बीच नई इकाइयों की स्थापना का सिलसिला भी आगे बढ़ रहा है। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने इकाई स्थापित की है। इससे संबंधित क्षेत्रों में उत्पादन और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की दिशा में कदम बढ़े हैं।

चीनी मिलों के शीरे की बढ़ी मांग

आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में नीति का लाभ प्रदेश के किसानों तक पहुंच रहा है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है। वहीं ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने के कारण अनाज की खरीद में भी वृद्धि हुई है। इससे किसानों के उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ कृषि और उद्योग के बीच आर्थिक गतिविधियों का संबंध मजबूत हुआ है।

बंद इकाई फिर हुई सक्रिय

मुरादाबाद में एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने बंद इकाई को फिर सक्रिय किया है। वहीं गोरखपुर में कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है। आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि निर्यात के विस्तार के साथ प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। नई इकाइयों की स्थापना और बंद इकाइयों के पुनर्जीवन से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ संबंधित क्षेत्रों में कारोबारी अवसर भी पैदा हो रहे हैं। नीति में किसानों के हितों को भी ध्यान में रखा गया है। जिस आसवनी अथवा उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई या चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान की वसूली प्रमाण-पत्र प्रभावी है, उसे नीति की छूट नहीं दी जाएगी। इसके जरिए नीति के लाभ को निर्धारित नियामकीय शर्तों से जोड़ा गया है।

4 माह में 183 लाख डॉलर का निर्यात, 66 लाख डॉलर अतिरिक्त विदेशी मुद्रा

अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात 183 लाख डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 117 लाख डॉलर था। इस तरह चार माह में 56.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि राष्ट्रीय वृद्धि 20.4 प्रतिशत रही। प्रदेश ने इस अवधि में 66 लाख डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अर्जित की। राष्ट्रीय निर्यात में हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई और प्रदेश चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच गया। निर्यात लाइनें 29 से बढ़कर 39 तथा संचालित बंदरगाहों की संख्या सात से बढ़कर 10 हो गई।

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