Orkut की वापसी की तैयारी? 12 साल बाद फिर चर्चा में आया पुराना सोशल मीडिया, जानें क्या है फाउंडर का प्लान

क्या आपको Orkut याद है? अगर आप मिलेनियल हैं तो पता ही होगा, लेकिन GenZ के लिए ये नाम नया लग सकता है. बता दें कि इसे सोशल मीडिया का OG प्लेटफॉर्म कहा जाता था. वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जहां दोस्तों के प्रोफाइल देखना, एक-दूसरे की प्रोफाइल पर मैसेज छोड़ना और अपनी पसंद की कम्युनिटी…

Orkut की वापसी की तैयारी? 12 साल बाद फिर चर्चा में आया पुराना सोशल मीडिया, जानें क्या है फाउंडर का प्लान

क्या आपको Orkut याद है? अगर आप मिलेनियल हैं तो पता ही होगा, लेकिन GenZ के लिए ये नाम नया लग सकता है. बता दें कि इसे सोशल मीडिया का OG प्लेटफॉर्म कहा जाता था. वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जहां दोस्तों के प्रोफाइल देखना, एक-दूसरे की प्रोफाइल पर मैसेज छोड़ना और अपनी पसंद की कम्युनिटी से जुड़ना इंटरनेट का खास एक्सपीरिएंस हुआ करता था.

फीड की जगह स्क्रैप होते थे. लोग अपने दोस्तों को स्क्रैप लिखते थे, जिनके ज्यादा स्क्रैप होते थे वो पॉपुलर माने जाते थे. अब करीब 12 साल बाद Orkut एक बार फिर चर्चा में है. इसके फाउंडर Orkut Buyukkokten ने लोगों से एक नए सोशल नेटवर्क को बनाने के लिए सपोर्ट मांगा है. उनका मकसद ऐसा इंटरनेट तैयार करना है, जहां लाइक, व्यूज और एल्गोरिदम से ज्यादा अहमियत असली लोगों, दोस्ती और आपसी जुड़ाव को मिले.

गूगल और Orkut कनेक्शन
गूगल में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऑर्कुट बायूकॉकटेन ने 2004 में Orkut नाम का प्लेटफॉर्म बनाया था. इसे गूगल के इंटर्नल प्रोजेक्ट के तौर पर तैयार किया गया था. हालांकि Orkut को गूगल ने 2014 में शटडाउन कर दिया, लेकिन Orkut.com के मालिक ऑर्कुट बायूकॉकटेन ही रहे, क्योंकि उन्हीं के पास इसके ट्रेडमार्क और राइट्स हैं.

यह खबर ऐसे समय आई है, जब Instagram, Facebook और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI से तैयार कंटेंट, फर्जी प्रोफाइल और एल्गोरिदम के बढ़ते असर को लेकर चर्चा हो रही है. Orkut के फाउंडर का मानना है कि सोशल मीडिया लोगों को जोड़ने के बजाय उनका ध्यान खींचने और उन्हें ज्यादा समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने पर केंद्रित हो गया है. ऐसे में वह इंटरनेट को फिर से इंसानों के करीब लाना चाहते हैं.

बेहद पॉपुलर था Orkut
Orkut की शुरुआत 2004 में हुई थी और दिलचस्प ये है कि इसके फाउंडर ने अपने ही नाम पर प्लेटफॉर्म का नाम रखा. इसके फाउंडर का नाम भी Orkut है. वो गूगल के इंजीनियर थे. ये भारत और ब्राजील में सबसे ज्यादा पॉपुलर हुआ. 2014 में इसे गूगल ने बंद कर दिया.

क्या सच में वापस आ रहा है Orkut?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Orkut की पुरानी वेबसाइट और उसके पुराने अकाउंट अभी दोबारा शुरू नहीं हुए हैं. फिलहाल इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर एक अभियान चल रहा है, जिसके जरिए लोगों से पूछा जा रहा है कि क्या वे असली लोगों, दोस्ती और कम्युनिटी पर आधारित नया सोशल नेटवर्क चाहते हैं.

इस अभियान के लिए लोग अपना नाम दर्ज करा सकते हैं और एक सपोर्टर कार्ड भी पा सकते हैं. लेकिन नाम दर्ज कराने का मतलब यह नहीं है कि आपका पुराना अकाउंट वापस मिल जाएगा या नए प्लेटफॉर्म पर आपका यूजरनेम सुरक्षित हो गया है. कंपनी ने अभी यह भी नहीं बताया है कि नया सोशल नेटवर्क कब लॉन्च होगा.

क्यों खास था Orkut?
Orkut को जनवरी 2004 में लॉन्च किया गया था. इसे Google के इंजीनियर Orkut Buyukkokten ने बनाया था. उस दौर में भारत और ब्राजील जैसे देशों में यह काफी पॉपुलर हुआ. लोग अपनी प्रोफाइल बनाते थे, दोस्तों को जोड़ते थे और अपनी पसंद के सबजेक्ट पर बनी कम्युनिटी में बातचीत करते थे.

इसकी खासियत सिर्फ दोस्तों की लिस्ट बनाना नहीं थी. यूजर्स एक-दूसरे की प्रोफाइल पर स्क्रैप यानी पब्लिक मैसेज छोड़ सकते थे और अपने दोस्तों के लिए टेस्टिमोनियल लिख सकते थे. कम्युनिटी में लोग फिल्मों, संगीत, कॉलेज, शहरों और अपनी रोजमर्रा की पसंद से जुड़े विषयों पर बातचीत करते थे.

आज के सोशल मीडिया की तरह हर पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की होड़ उस समय इतनी बड़ी नहीं थी. Orkut पर लोगों को अपनी पसंद के समूहों में जुड़ने और एक-दूसरे से बातचीत करने का अलग अनुभव मिलता था. हालांकि, समय के साथ Facebook और दूसरे प्लेटफॉर्म ज्यादा लोकप्रिय हो गए. आखिरकार Google ने सितंबर 2014 में Orkut को बंद कर दिया.

AI से क्यों परेशान हैं Orkut के संस्थापक?
Orkut ने अपनी वेबसाइट पर लिखे खुले पत्र में आज के सोशल मीडिया के बदलते स्वरूप पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि सोशल नेटवर्किंग का असली मकसद लोगों को जोड़ना था, लेकिन अब कई प्लेटफॉर्म का जोर यूजर्स का ध्यान बनाए रखने पर है.

उनके मुताबिक, AI से तैयार पोस्ट, बॉट्स और नकली तस्वीरों या वीडियो के बढ़ते इस्तेमाल से यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि स्क्रीन के दूसरी तरफ असली इंसान है या नहीं. सोशल मीडिया की खास बात यही थी कि लोग किसी दूसरे इंसान से जुड़ते थे. अगर यह भरोसा कमजोर होता है, तो ऑनलाइन बातचीत का अनुभव भी बदल सकता है.

हालांकि, ऑर्कुट AI को पूरी तरह खारिज नहीं करते. उनकी सोच है कि AI का इस्तेमाल लोगों की जगह लेने के बजाय उन्हें नए दोस्त बनाने, पुराने दोस्तों को खोजने और अपनी पसंद की कम्युनिटी से जुड़ने में मदद करने के लिए होना चाहिए. यानी तकनीक का इस्तेमाल इंसानी रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए हो, न कि उनकी जगह लेने के लिए.

क्या लोग सच में पुराने सोशल मीडिया को मिस कर रहे हैं?
Orkut की वापसी की चर्चा के पीछे पुरानी यादें जरूर हैं, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है. क्या लोग आज के सोशल मीडिया से थक चुके हैं और ऐसा प्लेटफॉर्म चाहते हैं, जहां उन्हें हर समय ट्रेंडिंग पोस्ट, वायरल वीडियो और एल्गोरिदम से तय होने वाले कंटेंट के बीच न रहना पड़े?

Orkut की आधिकारिक वेबसाइट पर चल रहे अभियान को दुनिया के कई देशों से समर्थन मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 115 देशों के लोगों से 2.6 लाख से ज्यादा सपोर्ट दर्ज किए जा चुके थे. यह आंकड़ा लोगों की दिलचस्पी दिखाता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि नया सोशल नेटवर्क सफल होगा या सभी पुराने यूजर्स उस पर लौट आएंगे.

किसी भी नए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सिर्फ पुरानी यादें काफी नहीं होंगी. उसे यूजर्स की प्राइवेसी, फर्जी अकाउंट, ऑनलाइन सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन जैसी चुनौतियों का भी हल निकालना होगा. साथ ही यह भी देखना होगा कि लोग रोजमर्रा की जिंदगी में इसे इस्तेमाल करने के लिए क्यों चुनेंगे.

अब आगे क्या होगा?
फिलहाल Orkut की वापसी को एक शुरुआती पहल के तौर पर देखना सही होगा. संस्थापक लोगों का समर्थन जुटा रहे हैं और एक ऐसे सोशल नेटवर्क की कल्पना पेश कर रहे हैं, जिसमें असली लोग, दोस्ती और कम्युनिटी सबसे अहम हों. फिलहाल ये साफ नहीं है कि इसे लॉन्च किया जाएगा भी या नहीं.

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