,

बिहार में गंगा कटाव से उजड़े 65 परिवार, किसी ने खेत तो किसी ने गंवाया अपना आशियाना; पुनर्वास की मांग तेज

भागलपुर  गंगा के भीषण कटाव ने राघोपुर पंचायत के कई परिवारों से उनका आशियाना छीन लिया है। वर्षों की मेहनत और जीवनभर की कमाई से बनाए गए पक्के मकान आंखों के सामने गंगा में समा गए। अब इन परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बच्चों और परिजनों को सुरक्षित रखने तथा सिर छिपाने के…

बिहार में गंगा कटाव से उजड़े 65 परिवार, किसी ने खेत तो किसी ने गंवाया अपना आशियाना; पुनर्वास की मांग तेज

भागलपुर
 गंगा के भीषण कटाव ने राघोपुर पंचायत के कई परिवारों से उनका आशियाना छीन लिया है। वर्षों की मेहनत और जीवनभर की कमाई से बनाए गए पक्के मकान आंखों के सामने गंगा में समा गए।

अब इन परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बच्चों और परिजनों को सुरक्षित रखने तथा सिर छिपाने के लिए ठिकाना तलाशने की है।

घर उजड़ने के बाद पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन से जमीन और मकान के नुकसान का उचित मुआवजा देने के साथ स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है।

कटाव से प्रभावित परिवारों की सूची जिला प्रशासन को सौंपी गई है। इसमें पूर्व जिला पार्षद प्रेमशीला देवी, मधुसूदन मंडल, सुनील मंडल, पुरण यादव, कैलाश यादव, मोनू यादव, शिव मंडल मांझी और राजू मंडल सहित अन्य पीड़ितों के नाम शामिल हैं।

बताया गया कि सूची में कुल 65 कटाव पीड़ित परिवारों को शामिल किया गया है, जिनके घर गंगा के कटाव से प्रभावित हुए हैं।

पहले खेत गंवाया, अब घर भी छिन गया
कटाव पीड़ितों कनिक मंडल अनिल मंडल मणिकांत मंडल मनोहर मंगल रेखा देवी अवधेश यादव वकील यादव रजिया देवी अविनाश कुमार बृजेश यादव पूनम देवी सरवन यादव का दर्द यह है कि कई परिवारों की खेती योग्य जमीन पहले ही गंगा में समा चुकी थी

इसके बाद उन्होंने ठेका पर जमीन लेकर खेती की और किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हुए अपना आशियाना बनाया। लेकिन गंगा के लगातार कटाव ने उनका यह सहारा भी छीन लिया।

एक पीड़ित ग्रामीण ने दर्द बयां करते हुए कहा, “हमारी जमीन तो पहले ही गंगा में चली गई थी। परिवार चलाने के लिए ठेका पर खेती करते थे। मेहनत करके किसी तरह घर बनाया था, लेकिन अब वह घर भी गंगा में समा गया। आखिर हम अपने परिवार को लेकर कहां जाएं? सरकार हमारे नुकसान का मुआवजा दे और रहने के लिए जमीन व मकान की व्यवस्था करे।”

65 परिवारों के पुनर्वास की उठी मांग
कटाव पीड़ितों का कहना है कि घर और जमीन गंवाने के बाद उनके सामने आजीविका के साथ-साथ रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे में केवल राहत सामग्री देना पर्याप्त नहीं होगा।

सरकार को नुकसान का आकलन कर प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देना चाहिए, ताकि वे दोबारा अपना आशियाना बना सकें।

पीड़ितों ने मांग की है कि जिला प्रशासन सौंपी गई सूची के आधार पर प्रत्येक परिवार के नुकसान का सत्यापन कराए। जिन लोगों के मकान और जमीन गंगा में समा चुके हैं, उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया जाए। साथ ही, बेघर परिवारों के लिए सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।

जिनके घर बचे हैं, वे भी दहशत में
गंगा की धारा जिस तेजी से गांव की ओर बढ़ रही है, उससे आसपास के परिवार भी भयभीत हैं। जिनके मकान अभी कटाव की चपेट में नहीं आए हैं, उन्हें भी हर पल अपना आशियाना उजड़ने का डर सता रहा है। कई परिवार जरूरी सामान समेटकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कटाव से बचाव के लिए प्रभावी कदम उठाने के साथ-साथ पहले से बेघर हो चुके परिवारों की सुध लेना भी जरूरी है।

उनके लिए यह केवल घर टूटने का मामला नहीं, बल्कि जीवनभर की मेहनत, जमा-पूंजी और भविष्य की उम्मीदों के उजड़ जाने का दर्द है।

कटाव पीड़ितों की मांग है कि सरकार उनके नुकसान का आकलन कर जमीन और मकान का उचित मुआवजा दे तथा सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की व्यवस्था करे, ताकि वे फिर से अपना घर-परिवार बसा सकें।

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed