,

बिहार के भागलपुर को मिलेगी बड़ी सौगात, डिजिटल तारामंडल के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू

भागलपुर  Bhagalpur Digital Planetarium: भागलपुर में शिक्षा, विज्ञान, शोध और नवाचार को नई ऊंचाई देने के लिए सरकार की ओर से ऐतिहासिक पहल की गई है। रेशमी नगरी में अब लोग अपनी आंखों से ब्रह्मांड के रहस्यमयी दृश्यों का सजीव नजारा देख सकेंगे। शहर में अत्याधुनिक 'डिजिटल तारामंडल सह स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी एजुकेशन सेंटर' स्थापित…

बिहार के भागलपुर को मिलेगी बड़ी सौगात, डिजिटल तारामंडल के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू

भागलपुर
 Bhagalpur Digital Planetarium: भागलपुर में शिक्षा, विज्ञान, शोध और नवाचार को नई ऊंचाई देने के लिए सरकार की ओर से ऐतिहासिक पहल की गई है। रेशमी नगरी में अब लोग अपनी आंखों से ब्रह्मांड के रहस्यमयी दृश्यों का सजीव नजारा देख सकेंगे। शहर में अत्याधुनिक 'डिजिटल तारामंडल सह स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी एजुकेशन सेंटर' स्थापित करने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है।

बिहार सरकार का विज्ञान, प्रावैधिकी व तकनीकी शिक्षा विभाग इस भव्य केंद्र का निर्माण कराएगा। जमीन चिह्नित कर विभाग को हस्तांतरित होते ही निर्माण कार्य धरातल पर उतरेगा। इस केंद्र की स्थापना को भागलपुर ही नहीं, बल्कि पूरे अंग क्षेत्र के शैक्षणिक और पर्यटन परिदृश्य में मील का पत्थर माना जा रहा है।

इस संबंध में विज्ञान, प्रावैधिकी व तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव हिमांशु शर्मा ने प्रमंडलीय आयुक्त एवं जिलाधिकारी को आधिकारिक पत्र भेजकर दो एकड़ उपयुक्त भूमि चिह्नित कर विभाग के नाम हस्तांतरित करने का अनुरोध किया है।

जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया तेज
परियोजना को गति देने के लिए सदर अनुमंडल प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। सदर एसडीओ ने अनुमंडल के सभी अंचल अधिकारियों (सीओ) को पत्र जारी कर तारामंडल निर्माण के लिए न्यूनतम दो एकड़ उपयुक्त, हस्तांतरण योग्य, अतिक्रमण मुक्त और विवादरहित सरकारी भूमि का चयन करने का निर्देश दिया है।

7 दिनों में मांगी रिपोर्ट
सभी अंचलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे जमीन के मौजा, थाना नंबर, खाता, खेसरा, रकबा, भूमि की प्रकृति और वर्तमान स्थिति की स्पष्ट जानकारी के साथ सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं, ताकि आगे की प्रक्रिया बिना देरी शुरू हो सके।

क्या होता है डिजिटल तारामंडल?
डिजिटल तारामंडल एक ऐसा अत्याधुनिक केंद्र होता है, जहां 3D या 4D डिजिटल प्रोजेक्टर, डोम स्क्रीन और अत्याधुनिक साउंड सिस्टम के जरिए ब्रह्मांड के दृश्यों का सजीव और रोमांचक अनुभव कराया जाता है। यहां दर्शक कृत्रिम रात के आकाश के नीचे बैठकर तारों, ग्रहों, आकाशगंगाओं (गैलेक्सी), ब्लैक होल और उपग्रहों की गति को बेहद करीब से देख और समझ सकते हैं।

3D/4D में दिखेगा ब्रह्मांड
यह महज सिनेमा की तरह फिल्म देखने की जगह नहीं होती, बल्कि यहां खगोल विज्ञान (एस्ट्रोनॉमी) और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी प्रदर्शनियां, लाइव मॉडल्स, इंटरैक्टिव कियोस्क और कार्यशालाओं का आयोजन भी नियमित रूप से किया जाता है।

स्थानीय रोजगार और पर्यटन को मिलेगी नई संजीवनी
इस केंद्र की स्थापना से शहर के आर्थिक और पर्यटन ढांचे को नया विस्तार मिलेगा। छात्रों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे किताबों में पढ़ी जाने वाली खगोलीय घटनाओं जैसे चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण और सौरमंडल की जटिल संरचना को अपनी आंखों के सामने सजीव रूप में समझ सकेंगे।

भागलपुर डिजिटल तारामंडल परियोजना
    परियोजना का नाम: डिजिटल तारामंडल सह स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी एजुकेशन सेंटर

    नोडल विभाग: विज्ञान, प्रावैधिकी व तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार सरकार

    आवश्यक भूमि: न्यूनतम 02 एकड़ (विवादरहित व अतिक्रमण मुक्त सरकारी भूमि)

    अंचल अधिकारियों को डेडलाइन: 7 दिनों के अंदर मौजा, खाता, खेसरा, रकबा और स्थिति की रिपोर्ट उपलब्ध कराना

    प्रमुख तकनीकी सुविधाएं: 3D/4D डिजिटल प्रोजेक्टर, डोम स्क्रीन, सराउंड साउंड सिस्टम, इंटरैक्टिव कियोस्क, प्रदर्शनी गैलरी और टेलीस्कोप से रात्रि अवलोकन

    लाभान्वित जिले: भागलपुर, बांका, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, खगड़िया और मधेपुरा

यह तारामंडल जिले का प्रमुख आकर्षण केंद्र बनेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और होटल, परिवहन व पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा। यहां समय-समय पर स्पेस क्विज, साइंस फेयर और टेलीस्कोप के जरिए रात्रि-आकाश अवलोकन (नाइट स्काई वॉचिंग) जैसे वैज्ञानिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

अंग व सीमांचल के छात्रों को नहीं जाना पड़ेगा पटना
डिजिटल तारामंडल का सबसे बड़ा लाभ स्कूली छात्र-छात्राओं, विज्ञान प्रेमियों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को मिलेगा। अब तक भागलपुर, बांका, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, खगड़िया और मधेपुरा के बच्चों को खगोल व अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियां समझने के लिए पटना या कोलकाता जैसे महानगरों का रुख करना पड़ता था। भागलपुर में ही यह विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध होने से स्थानीय प्रतिभाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का शानदार मंच मिलेगा |

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports