रोहित शर्मा की राह पर टीम इंडिया की बेटियां, शेफाली-मंधाना की आक्रामक बल्लेबाजी से दिखा निडर अंदाज

नई दिल्ली  जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज के शुरुआती दो मैच भारतीय महिला टीम ने आसानी से जीत लिए हैं। इसके साथ ही 3 टी20 मैच की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। इस सीरीज में भारत की जीत पहले ही तय मानी जा रही थी। ऐसे में भारत की जीत बड़ी…

रोहित शर्मा की राह पर टीम इंडिया की बेटियां, शेफाली-मंधाना की आक्रामक बल्लेबाजी से दिखा निडर अंदाज

नई दिल्ली
 जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज के शुरुआती दो मैच भारतीय महिला टीम ने आसानी से जीत लिए हैं। इसके साथ ही 3 टी20 मैच की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। इस सीरीज में भारत की जीत पहले ही तय मानी जा रही थी। ऐसे में भारत की जीत बड़ी बात नहीं है, लेकिन जिस तरीके से भारतीय टीम ने दोनों मैच खेले हैं, उससे साफ होता है कि भारत की महिला टीम भी अब वनडे और टी20 में फियरलेस क्रिकेट खेलेगी, जिसकी शुरुआत 2022 टी20 विश्व कप के बाद रोहित शर्मा ने की थी।

2011 में विश्व चैंपियन बनने के बाद भारतीय टीम ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के अलावा कोई आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत सकी। इसकी सबसे बड़ी वजह टॉप ऑर्डर पर भारत निर्भरता थी। वहीं, क्रिकेट के बदलते स्वरूप के साथ जब 2022 में इंग्लैंड ने बड़ी आसानी से भारत के खिलाफ सेमीफाइनल में टारगेट चेज कर लिया तो रोहित शर्मा ने बल्लेबाजी का टेंपलेट बदलने की बात कही। यहीं से भारत के ट्रॉफी जीतने का रास्त खुला।

अब खुलकर खेलती है टीम इंडिया
2023 वनडे विश्व कप में टीम इंडिया खुलकर खेली। कप्तान रोहित ने पारी की शुरुआत करते हुए हर मैच में आगे बढ़कर निडर होकर बल्लेबाजी की। टीम फाइनल तक पहुंची, लेकिन टूर्नामेंट की पहली और एकमात्र हार टीम इंडिया को फाइनल में ही मिली। अगले साल भारतीय टीम टी20 विश्व कप जीतने में सफल रही। टीम को राह दिखाकर रोहित और विराट ने संन्यास ले लिया। हालांकि, इसके बाद भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी भी अपने नाम की और 2026 में भी टी20 विश्व कप जीता। अब भारत टी20 में दुनिया की सबसे खतरनाक टीमों में शामिल है।

पुराने तरीके में क्या कमी थी?
भारत के पुराने तरीके में अधिकतर रन टॉप तीन बल्लेबाज ही बनाते थे। रोहित के साथ विराट और शिखर ने खूब रन बनाए। ऐसे में बड़े मैच में टीमें सिर्फ इन्हें आउट करते ही मैच जीत जाती थीं, क्योंकि अन्य बल्लेबाजों को पूरे टूर्नामेंट में बल्लेबाजी का मौका ही नहीं मिलता था। फाइनल या सेमीफाइनल में अचानक बल्लेबाजी मिलने पर वह दबाव में आ जाते थे और विकेट फेंककर निकल जाते थे। अब ऐसा नहीं होता है। हर मैच में भारत के विकेट गिरते हैं। मध्यक्रम को लगातार बल्लेबाजी मिलती है। कई बार दबाव में भी बल्लेबाजी आती है और लीग मैच में भारत को हार का सामना भी करना पड़ सकता है, लेकिन अब अगर टीम इंडिया नॉक आउट मैच तक पहुंचती है तो जीत हासिल करने की बेहतर स्थिति में होती है। वहीं, आक्रामक बल्लेबाजी से विपक्षी गेंदबाज भी अपनी लय नहीं हासिल कर पाते हैं।

महिला टीम में भी दिखा निडर अंदाज
शेफाली वर्मा ने कहा था कि स्मृति मंधाना की कप्तानी में भारतीय टीम निडर होकर खेलेगी और शुरुआती दो मुकाबलों में यही दिखा है। पहले मैच में छोटे स्कोर का पीछा करते हुए भारत के विकेट एक-एक कर गिरते चले गए। 19 रन पर 4 विकेट गंवाने के बाद निकी प्रसाद और दीप्ती ने थोड़ी देर तक संभलकर बल्लेबाजी की और साझेदारी बनते ही तेजी से रन बनाए। वहीं, दूसरे मैच में शेफाली ने सिर्फ 25 गेंद में 55 रन जड़ दिए। कप्तान स्मृति ने 25 गेंद में नाबाद 47 रन बनाए। इससे साफ है कि भारतीय महिला टीम भी अब खुलकर खेलेगी और भारत की बेटियां का लक्ष्य टी20 विश्व कप की ट्रॉफी है।

 

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