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मध्यप्रदेश के ग्रामीण पर्यटन को दुनिया के सामने पेश करने की तैयारी, डॉ. इलैया राजा टी ने बताई खासियत

वास्तिविक ग्रामीण परिवेश से रूबरू होने आए मध्यप्रदेश : सचिव डॉ. इलैया राजा टी अंतर्राष्ट्रीय ट्रैवल ट्रेड शो आईटीबी एशिया के नेशनल टूरिज्म ऑर्गेनाइजेशन के टॉक सेशन को किया संबोधित भोपाल  सचिव पर्यटन एवं प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैया राजा टी ने कहा कि पर्यटकों को वास्तविक, विशुद्ध और ग्रामीण परिवेश से रूबरू…

मध्यप्रदेश के ग्रामीण पर्यटन को दुनिया के सामने पेश करने की तैयारी, डॉ. इलैया राजा टी ने बताई खासियत

वास्तिविक ग्रामीण परिवेश से रूबरू होने आए मध्यप्रदेश : सचिव डॉ. इलैया राजा टी

अंतर्राष्ट्रीय ट्रैवल ट्रेड शो आईटीबी एशिया के नेशनल टूरिज्म ऑर्गेनाइजेशन के टॉक सेशन को किया संबोधित

भोपाल 

सचिव पर्यटन एवं प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैया राजा टी ने कहा कि पर्यटकों को वास्तविक, विशुद्ध और ग्रामीण परिवेश से रूबरू होनेके लिए मध्यप्रदेशआना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि मध्यप्रदेश केवल भौगोलिक रूप से ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विविधता और आतिथ्य के कारण सही मायनों में 'अतुल्य भारत का दिल' है। सचिव डॉ. इलैया राजा, सिंगापुर के सैंड्स एक्सपो एंड कन्वेंशन सेंटर में अंतर्राष्ट्रीय ट्रैवल ट्रेड शो 'आईटीबी एशिया' के नेशनल टूरिज्म ऑर्गेनाइजेशन (एनटीओ) टॉक सेशन को संबोधित कर रहे थे। सचिव सचिव डॉ. इलैया राजा ने पर्यटन में नवाचार और खोज पर बल देते हुए कहा कि "यदि आवश्यकता आविष्कार की जननी है, तो जिज्ञासा खोज का पिता है। सचिव डॉ. इलैया राजा ने बताया कि कोविड महामारी के बाद वैश्विक पर्यटन का स्वरूप तेजी से बदला है और यात्री अब स्थापित स्थलों से आगे बढ़कर नए अनुभवों की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन में अत्यधिक भीड़ का मूल कारण कुछ सीमित स्थानों और सीमित समय पर केंद्रित होना है, जिसका सबसे प्रभावी समाधान पर्यटन मांग का पुनर्वितरण और अनछुए स्थलों की निरंतर खोज है।

'रीडिस्ट्रिब्यूटिंग डिमांड थ्रू डिस्कवरी' सत्र में प्रदेश के वन्यजीव, विरासत और कला का प्रभावी प्रदर्शन

एनटीओ टॉक सेशन में 'रीडिस्ट्रिब्यूटिंग डिमांड थ्रू डिस्कवरी' विषय पर प्रेजेंटेशन प्रस्तुत करते हुए सचिव डॉ. इलैया राजा टी ने मध्यप्रदेश के पर्यटन सामर्थ्य को वैश्विक पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि 25 प्रतिशत से अधिक वनाच्छादित क्षेत्र के साथ मध्यप्रदेश देश का सबसे हरित राज्य है। इसके साथ ही यह एक प्रमुख जनजातीय राज्य है, जहाँ 7 प्रमुख जनजातियाँ और 45 उप-जनजातियाँ अपनी अनूठी परंपराओं और जीवन शैली को संजोए हुए हैं। प्रदेश 5 प्रमुख सांस्कृतिक अंचलों में विभाजित है, जहाँ चंदेरी और महेश्वरी का समृद्ध टेक्सटाइल क्रॉफ्ट, विश्वप्रसिद्ध गोंड चित्रकला तथा भोपाल का पारंपरिक जरी-जरदोजी शिल्प अद्वितीय पहचान रखते हैं।

सचिव डॉ. इलैया राजा ने प्रदेश को एक जीवंत 'वाइल्ड किंगडम' बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश देश का अग्रणी 'टाइगर स्टेट' है। यहाँ 9 से अधिक टाइगर रिजर्व हैं। साथ ही मध्यप्रदेश चीता, लेपर्ड, वल्चर और घड़ियाल स्टेट भी है। पेंच नेशनल पार्क से जुड़ी विश्वविख्यात 'मोगली' और 'द जंगल बुक' की कहानियाँ पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण हैं। यहाँ पेंच में रोमांचक 'नेचर वॉक' और ऐतिहासिक नगरी ओरछा में बेतवा नदी पर 'रिवर रॉफ्टिंग' जैसे अनूठे साहसिक अनुभव उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 22 यूनेस्को धरोहर स्थल (सांची स्तूप, खजुराहो मंदिर और भीमबेटका के प्राचीन शैलचित्र सहित 3 स्थायी व 19 संभावित स्थल) मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के एयर कनेक्टिविटी को बढ़ाने और ऑफबीट गंतव्यों को जोड़ने के लिए प्रदेश में 'हेली पर्यटन सेवा' का विस्तार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक अनुकूल फिल्म-फ्रेंडली राज्य है, जिसने स्पेनिश फिल्म कमीशन के साथ एमओयू कर अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म पर्यटन को नई गति दी है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी कदम उठाये जा रहे है। प्रदेश में महिला सफारी चालकों और सर्व-महिला संचालित होटलों के माध्यम से सुरक्षित व जिम्मेदार पर्यटन को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है।

एग्जीबिटर्स, ट्रैवल और टूर ऑपरेटर को ग्रामीण पर्यटन, आत्मीय आतिथ्य और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेने का आमंत्रण

सचिव डॉ. इलैया राजा टी. ने अंतर्राष्ट्रीय ट्रैवल समुदाय, टूर ऑपरेटर्स और वैश्विक पर्यटकों को मध्यप्रदेश आने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का 'ग्रामीण पर्यटन' स्थानीय समुदायों और नागरिकों के साथ मिलकर संचालित हो रहा है, जिससे पर्यटकों को स्थानीय जीवन, कला और परंपराओं को अत्यंत निकट से देखने का अनूठा अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि किसी भी टूरिस्ट डेस्टिनेशन की वास्तविक सुंदरता केवल उसके प्राकृतिक दृश्यों या स्मारकों में नहीं, बल्कि वहाँ के स्थानीय नागरिकों के आत्मीय व्यवहार और सत्कार में निहित होती है। उन्होंने वैश्विक सैलानियों से मध्यप्रदेश के अनूठे और पारंपरिक खान-पान का लुत्फ उठाने का विशेष आग्रह किया। उन्होंने मालवा के मशहूर पोहा-जलेबी, तीखे व चटपटे रतलामी सेव, पारंपरिक दाल-बाफला, मुरैना-ग्वालियर की प्रसिद्ध गजक तथा नवाबी और बुंदेली जायके वाली स्वादिष्ट मटन करी का उल्लेख किया। सचिव डॉ. इलैया राजा ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्षभर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक उत्सव, नैसर्गिक संपदा, सुगम हेलीकॉप्टर कनेक्टिविटी, सुरक्षित वातावरण और प्रदेशवासियों का हृदयस्पर्शी आतिथ्य हर सैलानी के लिए मध्यप्रदेश की यात्रा को अविस्मरणीय बना देगा।

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