दिल्ली में 18 हजार सरकारी इमारतों पर लगे सोलर सिस्टम, 4 लाख घरों तक पहुंचाने का लक्ष्य

नई दिल्ली दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए अब केवल सर्दियों में अभियान चलाने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए सालभर और एक साथ कई मोर्चों पर काम करना होगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को द टाइम्स ऑफ इंडिया के 'आइडियाज फॉर इंडिया समिट' में यह बात कही। उन्होंने…

दिल्ली में 18 हजार सरकारी इमारतों पर लगे सोलर सिस्टम, 4 लाख घरों तक पहुंचाने का लक्ष्य

नई दिल्ली
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए अब केवल सर्दियों में अभियान चलाने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए सालभर और एक साथ कई मोर्चों पर काम करना होगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को द टाइम्स ऑफ इंडिया के 'आइडियाज फॉर इंडिया समिट' में यह बात कही। उन्होंने प्रदूषण, कूड़े के पहाड़ और यमुना में बढ़ते प्रदूषण को आपस में जुड़ी समस्याएं बताते हुए कहा कि इनके समाधान के लिए लंबे समय तक प्रभावी कदम उठाने होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की पहचान समस्याओं से नहीं, बल्कि उनके समाधान से होनी चाहिए। सरकार कचरा प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहनों, रूफटॉप सोलर और यमुना की सफाई जैसे क्षेत्रों में एक साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि धूल पर कार्रवाई करके धुएं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वाहनों से निकलने वाले धुएं, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और खुले में कचरा जलाने जैसी सभी वजहों पर एक साथ कार्रवाई जरूरी है।

दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए सालभर कार्रवाई
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार ने फरवरी 2025 में सत्ता संभालने के बाद से ही दिल्ली की पुरानी समस्याओं के समाधान पर काम शुरू कर दिया था। प्रदूषण किसी एक मौसम की समस्या नहीं है, इसलिए इसका समाधान भी पूरे साल चलने वाले प्रयासों से ही संभव है।

उन्होंने कहा, सरकार प्रदूषण की निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, लोगों से निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने की अपील करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें सार्वजनिक परिवहन और स्वच्छ विकल्प भी उपलब्ध कराने होंगे।

सरकारी इमारतों और घरों में लगेंगे रूफटॉप सोलर सिस्टम
दिल्ली सरकार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 18,000 सरकारी इमारतों पर सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि 400 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले पात्र परिवारों को 3 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम मुफ्त उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, तीन महीने में एक लाख से अधिक लोगों ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।

सरकार का लक्ष्य चार लाख घरों तक रूफटॉप सोलर सिस्टम पहुंचाना है। इससे घरों की बिजली संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। साथ ही, अतिरिक्त बिजली बेचकर परिवार अपनी आय भी बढ़ा सकेंगे।

रोजाना पैदा होने वाले कचरे को प्रोसेस करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की असली समस्या केवल लैंडफिल साइटों पर जमा कचरे के पहाड़ नहीं, बल्कि कचरे का पर्याप्त प्रसंस्करण नहीं होना है। प्रतिदिन जितना कचरा पैदा होता है, उतनी मात्रा में उसका निस्तारण और प्रसंस्करण नहीं हो पा रहा था।

इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार कचरा प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाकर 15,000 मीट्रिक टन तक करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का जोर कचरे को केवल एक जगह जमा करने के बजाय उसे उपयोगी संसाधन में बदलने पर भी है।

रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में प्रतिदिन करीब 2,000 टन गोबर पैदा होता है। पहले शहर में कोई बायोगैस प्लांट नहीं था, लेकिन अब डेढ़ साल के भीतर तीन बायोगैस प्लांट स्थापित किए गए हैं। इससे गोबर को नालों के जरिए यमुना तक पहुंचने से रोकने और नदी में प्रदूषण कम करने में मदद मिल रही है।

यमुना की सफाई के लिए सीवर नेटवर्क का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना को साफ करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से योजना तैयार की गई है। इसमें नालों के पानी को नदी में गिरने से रोकना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाना और उन्हें अपग्रेड करना, नालों से गाद निकालना तथा सीवर कनेक्शन का विस्तार करना शामिल है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के लगभग आधे हिस्से में किसी न किसी रूप में पर्याप्त सीवर कनेक्टिविटी की कमी है। इसे दूर करने के लिए अधिकृत कॉलोनियों, अनधिकृत बस्तियों और झुग्गी क्षेत्रों की मैपिंग की जा रही है, ताकि जरूरत के अनुसार सीवर नेटवर्क का विस्तार किया जा सके।

मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले डेढ़ साल में नालों से लाखों टन गाद निकाली गई है। उन्होंने कहा कि यमुना को साफ करने के लिए जरूरी है कि सीवेज को पहले एकत्र किया जाए, फिर उसे ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाकर शोधित करने के बाद ही नदी में छोड़ा जाए।

 

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