,

रिसर्च पर फोकस करेंगे PGI चंडीगढ़ के डॉ. ग्रोवर, प्रोफेसर पद से छोड़ा पद

चंडीगढ़. दिल्ली एम्स के बाद भारत के दूसरे सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान चंडीगढ़ पीजीआई के मनोरोग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. ग्रोवर को छह महीने की अतिरिक्त छुट्टी नहीं मिली तो नाराज होकर इस्तीफा ही दे दिया। उन्होंने पीजीआई प्रशासन से कहा कि या तो उन्हें वालंटरी रिटायरमेंट दे दी जाए या इस्तीफा स्वीकार कर…

रिसर्च पर फोकस करेंगे PGI चंडीगढ़ के डॉ. ग्रोवर, प्रोफेसर पद से छोड़ा पद

चंडीगढ़.

दिल्ली एम्स के बाद भारत के दूसरे सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान चंडीगढ़ पीजीआई के मनोरोग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. ग्रोवर को छह महीने की अतिरिक्त छुट्टी नहीं मिली तो नाराज होकर इस्तीफा ही दे दिया। उन्होंने पीजीआई प्रशासन से कहा कि या तो उन्हें वालंटरी रिटायरमेंट दे दी जाए या इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाए।

हालांकि, पीजीआई ने इस्तीफा खारिज कर दिया। बात यहीं नहीं रुकी, डाॅ. ग्रोवर ने पीजीआइ प्रशासन, प्रेसिडेंट और निदेशक के खिलाफ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल(कैट) में याचिका दायर कर दी। याचिका पर कैट ने उन्हें राहत देते हुए पीजीआई के उनका इस्तीफा खारिज करने वाले आदेश को रद कर दिया। हालांकि कैट ने पीजीआई को उनकी रिटायरमेंट या इस्तीफा स्वीकार करने के लिए नहीं कहा, लेकिन ट्रिब्यूनल ने इस विषय में तीन हफ्ते में विचार कर फैसला करने के निर्देश दिए हैं।

दो साल के लिए मांगी थी छुट्टी, मिली एक वर्ष की
डाॅ.ग्रोवर ने याचिका में कहा कि मेलबर्न के रायल काॅलेज आफ साइकेट्री में फैलोशिप के लिए उन्हें आस्ट्रेलिया जाना था। उन्होंने दो साल के लिए एक्स-इंडिया लीव मांगी थी लेकिन मिली एक साल की। उन्होंने दोबारा आवेदन किया लेकिन पीजीआई प्रशासन ने उसे स्वीकार नहीं किया। वह तीन फरवरी 2025 को आस्ट्रेलिया चले गए। इस बीच 25 सितंबर 2025 को उन्होंने तीन फरवरी 2026 से दो अगस्त 2026 यानी छह महीने के लिए छुट्टी बढ़ाने जाने की मांग की, लेकिन पीजीआई प्रशासन ने उनकी मांग को पुन: खारिज कर दिया।

भारत लौटकर दिया इस्तीफा
डाॅ. ग्राेवर दो फरवरी 2026 को भारत लौटे और उन्होंने पीजीआई को तीन महीने का नोटिस दे दिया और उन्हें वालंटरी रिटायर करने या उनकी इस्तीफा स्वीकार करने की मांग की। पीजीआई प्रशासन ने उनका इस्तीफा रद कर दिया। पीजीआई ने कहा कि हाल ही में दो डाॅक्टरों के संस्थान छोड़ने के कारण पहले ही फैकल्टी की कमी हो गई है। ऐसे में उन्हें रिटायरमेंट नहीं दी जा सकती।

12 साल पहले ही मांगी रिटायरमेंट
डाॅ. ग्रोवर की अभी उम्र 53 वर्ष है और पीजीआई में फैकल्टी की रिटायरमेंट के लिए आयु सीमा 65 वर्ष है। ऐसे में उन्होंने नाराज होकर 12 वर्ष पहले ही रिटायरमेंट की पेशकश कर दी। प्रो.ग्रोवर ने एक जनवरी 2000 को बतौर जूनियर रेजिडेंट पीजीआई जाइन किया था। इसके बाद असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तरक्की पाकर आखिर में 12 मई 2017 को वह प्रोफेसर बन गए। वह मनोरोग के जाने-माने डाॅक्टर हैं और कैटाटोनिया नामक बीमारी के इलाज के लिए विश्व स्तर पर उनका नाम है।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed