टाटा पंच का फ्लेक्स फ्यूल अवतार जल्द, इथेनॉल ब्लेंडिंग मिशन को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली भारत में फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) से चलने वाली कारें जल्द ही हकीकत बन सकती हैं। टाटा मोटर्स (Tata Motors) उच्च इथेनॉल-मिश्रित ईंधन..

Varad Avatar

by

3 minutes

Read Time

टाटा पंच का फ्लेक्स फ्यूल अवतार जल्द, इथेनॉल ब्लेंडिंग मिशन को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली
भारत में फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) से चलने वाली कारें जल्द ही हकीकत बन सकती हैं। टाटा मोटर्स (Tata Motors) उच्च इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के अनुकूल प्रोडक्शन-रेडी मॉडल पेश करने वाले पहले बड़े कार निर्माताओं में शामिल होने की तैयारी कर रही है। उद्योग जगत की चर्चाओं के अनुसार, टाटा मोटर्स इस साल के आखिर तक टाटा पंच का एक फ्लेक्स फ्यूल वर्जन लॉन्च कर सकती है। इस कॉम्पैक्ट एसयूवी को पहले फ्लेक्स फ्यूल रूप में प्रदर्शित भी किया जा चुका है। जो इस उभरते वैकल्पिक ईंधन सेगमेंट में प्रवेश करने के कंपनी के इरादे को दर्शाता है।
टाटा पंच का नया मॉडल किस तरह के ईंधन को सपोर्ट करेगा?
यह आगामी मॉडल देश के ईंधन आयात खर्च को कम करने की सरकारी नीति के अनुकूल तैयार किया जा रहा है:
    E85 ईंधन का सपोर्ट: इस नए पंच फ्लेक्स फ्यूल मॉडल से 85 प्रतिशत तक इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल पर चलने की उम्मीद है, जिसे आमतौर पर E85 कहा जाता है।
    रणनीतिक उद्देश्य: सरकार पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता को कम करने और ईंधन आयात लागत में कटौती करने के प्रयासों को तेज कर रही है। जिसमें यह तकनीक सहायक होगी।
पंच की फ्लेक्स फ्यूल रणनीति और इंजन में क्या बदलाव होंगे?
टाटा पंच इस समय कई पावरट्रेन विकल्पों के साथ आती है। जिसमें अब एक नया विकल्प जुड़ने जा रहा है:
    पावरट्रेन का विस्तार: टाटा पंच पहले से ही पेट्रोल और सीएनजी विकल्पों में उपलब्ध है। फ्लेक्स फ्यूल वेरिएंट के आने से इस मॉडल की ईंधन अनुकूलता का और विस्तार होगा।
    इंजन में बड़े बदलाव: सूत्रों के अनुसार, उच्च इथेनॉल मिश्रण को सपोर्ट करने के लिए एसयूवी के 1.2-लीटर पेट्रोल इंजन में महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएंगे। इन बदलावों में इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) और अन्य महत्वपूर्ण इंजन पुर्जों को अपडेट करना शामिल है।
    विशेष इंजीनियरिंग: फ्लेक्स फ्यूल वाहन विशेष रूप से काफी अधिक इथेनॉल सांद्रता वाले ईंधन को संभालने के लिए तैयार किए जाते हैं। जबकि मानक पेट्रोल कारें आमतौर पर E85 जैसे मिश्रण पर चलने के लिए डिजाइन नहीं की जाती हैं।
भारत के लिए फ्लेक्स फ्यूल वाहन क्यों महत्वपूर्ण हैं?
देश के ऊर्जा और पर्यावरण लक्ष्यों के लिहाज से इस तकनीक के कई मायने हैं:
    आयात बिल में कमी: सरकार कच्चे तेल के आयात को कम करने और देश के ईंधन बिल में कटौती करने की अपनी रणनीति के तहत इथेनॉल सम्मिश्रण (इथेनॉल ब्लेंडिंग) को दृढ़ता से बढ़ावा दे रही है।
    स्वच्छ गतिशीलता: घरेलू स्तर पर उत्पादित बायोफ्यूल (जैव ईंधन) का उपयोग करते हुए इसे स्वच्छ गतिशीलता समाधानों को समर्थन देने के एक तरीके के रूप में भी देखा जा रहा है।
    ऊर्जा संक्रमण: उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लेक्स फ्यूल तकनीक भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा संक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब देश पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकास को संतुलित कर रहा है।
बाजार में इस नई तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है:
    रेस में कई कंपनियां: टाटा मोटर्स फ्लेक्स फ्यूल तकनीक तलाशने वाली एकमात्र कंपनी नहीं है। कई कार निर्माताओं ने पहले ही अपने फ्लेक्स फ्यूल प्रोटोटाइप प्रदर्शित किए हैं। और वे इस सेगमेंट में अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश कर रहे हैं।
    तकनीकी बाधा: विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं और अनुकूल इंजनों की जरूरत के कारण व्यापक स्तर पर फ्लेक्स फ्यूल को अपनाना आसान नहीं होगा। सामान्य पेट्रोल वाहन बड़े इंजीनियरिंग बदलावों के बिना E85 या E100 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रणों पर कुशलतापूर्वक काम नहीं कर सकते हैं। जिससे समर्पित फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का विकास आवश्यक हो जाता है।
 

About the Author

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports