,

प्रकृति और प्रगति, विकास और पर्यावरण संरक्षण में तालमेल जरूरी

आर्थिक प्रगति को समाज की खुशहाली और मजबूत संस्थाओं के निर्माण से जोड़ना आवश्यक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के औद्योगिक विकास, किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं के सशक्तीकरण और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता तथा युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में निरंतर सक्रिय हैं। इसके साथ ही…

प्रकृति और प्रगति, विकास और पर्यावरण संरक्षण में तालमेल जरूरी

आर्थिक प्रगति को समाज की खुशहाली और मजबूत संस्थाओं के निर्माण से जोड़ना आवश्यक

भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के औद्योगिक विकास, किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं के सशक्तीकरण और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता तथा युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में निरंतर सक्रिय हैं। इसके साथ ही उनका यह भी प्रयास है कि प्रकृति और प्रगति, विकास और पर्यावरण संरक्षण में तालमेल कैसे हो तथा हम अपनी आर्थिक प्रगति को प्रकृति के संरक्षण, समाज की खुशहाली और मजबूत संस्थाओं के निर्माण से कैसे जोड़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि विकास का अर्थ केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है। विकास की वास्तविक सार्थकता तब है, जब उद्योगों के आगे बढ़ने, युवाओं, किसानों और महिलाओं को बेहतर अवसर मिलने के साथ ही पर्यावरण सुरक्षित रहे और समाज के प्रत्येक वर्ग के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आए। इसी उद्देश्य से गत दिवस "पर्यावरण, सामाजिक उत्तरदायित्व, सुशासन और सभ्यतागत ज्ञान के समन्वय" पर विचार मंथन किया गया।

संसाधनों के री-यूज को अपने कामकाज का हिस्सा बनाना होगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि इनके समन्वय में किसी एक व्यक्ति की उन्नति नहीं, बल्कि पूरे समाज की समृद्धि और सबके लिए बेहतर जीवन की सोच छिपी है। हमारी भारतीय ज्ञान परम्परा सदियों से इसी व्यापक दृष्टि का संदेश देती आई है। भगवद्गीता हमें सिखाती है कि कर्तव्य, विवेक, आत्मसंयम और लोक कल्याण एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। आधुनिक प्रबंधन और संस्थागत नेतृत्व के लिए भी ये मूल्य उतने ही उपयोगी हैं, जितने हमारे व्यक्तिगत जीवन के लिए। पर्यावरण ही हमारी समृद्धि का प्राकृतिक आधार है। हमारी अर्थव्यवस्था का आधार प्रकृति है। उद्योग को जल और ऊर्जा चाहिए, कृषि को स्वस्थ मिट्टी और अनुकूल पर्यावरण और प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ वायु और सुरक्षित जीवन चाहिए। हम पानी, जमीन या जंगलों पर जो भी असर डालते हैं, घूम-फिरकर उसका प्रभाव हमारे समाज और अर्थव्यवस्था पर ही पड़ता है। विकास का कोई भी फैसला लेते समय पर्यावरण संरक्षण को सबसे पहला स्थान मिलना चाहिए। जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता, प्रदूषण नियंत्रण और संसाधनों के री-यूज को अपने कामकाज का हिस्सा बनाना जरूरी है। उनका मानना है कि हमारी आने वाली समृद्धि इस बात पर टिकी है कि हम प्रकृति के साथ कितनी जिम्मेदारी से व्यवहार करते हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश इस दिशा में मिसाल पेश कर रहा है। सांची देश की पहली सोलर सिटी बन चुका है और वन क्षेत्र के मामले में भी प्रदेश, देश में अग्रणी है।

विश्वास और उत्तरदायित्व ही सुशासन की आधारशिला है
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि आम नागरिक के जीवन में आया बदलाव ही विकास की कसौटी है। विकास का वास्तविक अर्थ लोगों के जीवन में दिखाई देना चाहिए। प्रयास यह हो कि युवा को अवसर मिले, महिला को सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता मिले, श्रमिक को सम्मान मिले तथा वंचित परिवार तक शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचे। यही संवेदनशील नेतृत्व का सबसे बड़ा प्रमाण है। किसी भी संस्था की प्रतिष्ठा केवल उसके आकार, संसाधनों या उपलब्धियों से नहीं बनती, विश्वास और उत्तरदायित्व ही सुशासन की आधारशिला है। सरकार हो या उद्योग, विश्वास हमेशा नेतृत्व के आचरण से बनता है। पर्यावरण और समाज के प्रति प्रतिबद्धता तभी असरदार होगी, जब संस्थाएं पारदर्शी, जवाबदेह और न्यायपूर्ण हों। सरकार का दायित्व है कि नागरिकों को समय पर सेवाएं मिलें, व्यवस्थाएं अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनें।

समुदाय की गरिमा के सम्मान और उसे प्रगति का सहभागी बनाने के भाव से ही सामाजिक कार्य करें
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार इन तीनों पक्षों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण प्रेरणा-भगवद्गीता का कर्मयोग है, जो उत्कृष्ट कार्य और लोककल्याण की साझा दिशा तय करता है। अपने कार्य में उत्कृष्टता, निर्णयों में नैतिकता और उपलब्धियों में लोकहित का भाव ही आज के संस्थागत जीवन में कर्मयोग का सार है। उद्योग के लिए गुणवत्ता, नवाचार और रोजगार सृजन के साथ कर्मचारी, उपभोक्ता और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना ही लक्ष्य हो। शासन के लिए पद के दायित्व को सेवाभाव से निभाना और नागरिकों की समस्या के समाधान तक प्रयास करना उद्देश्य हो। अकादमिक जगत ज्ञान में सत्यनिष्ठा रखने, शोध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और युवाओं को विवेकशील तथा सक्षम बनाने की प्रेरणा से कार्य करें। सेवा में निरंतरता रखने, समुदाय की गरिमा का सम्मान करने और उसे अपनी प्रगति का सहभागी बनाने के भाव से ही सामाजिक कार्य किए जाएं। इन भावों को मन-वचन-कर्म में आत्मसात करने से ही ऐसा भारत आकार लेगा जहां आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता सुदृढ़ होगी, संस्थाओं के प्रति विश्वास बढ़ेगा और हम समावेशी विकास की ओर अग्रसर होंगे।

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed