,

अयोध्या की राह पर भोजशाल,हाई कोर्ट के फैसले का हिंदू और मुसलमानों के लिए क्या मतलब है?

 नई दिल्ली मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने..

Varad Avatar

by

4 minutes

Read Time

अयोध्या की राह पर भोजशाल,हाई कोर्ट के फैसले का हिंदू और मुसलमानों के लिए क्या मतलब है?

 नई दिल्ली
मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। इंदौर खंडपीठ ने अपने 242 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि 11वीं शताब्दी का यह परिसर मूल रूप से देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र था।
हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वर्ष 2003 के उस आदेश को रद कर दिया, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी। अदालत ने अब हिंदुओं को परिसर में प्रतिदिन पूजा का विशेष अधिकार देने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और अभिलेख यह साबित करते हैं कि विवादित स्थल भोजशाला था, जो परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत अध्ययन का प्रमुख केंद्र था।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “ऐतिहासिक साहित्य और पुरातात्विक संदर्भ यह स्थापित करते हैं कि यह क्षेत्र देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर और संस्कृत अध्ययन का केंद्र था। हिंदू पूजा की परंपरा समय-समय पर नियंत्रित जरूर हुई, लेकिन कभी समाप्त नहीं हुई।”
बेंच ने 28 मार्च को स्वयं स्थल का निरीक्षण भी किया था। अदालत ने विवादित परिसर को प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित स्मारक घोषित करते हुए कहा कि इसका प्रभाव 18 मार्च 1904 से माना जाएगा।
ASI को फटकार
हाईकोर्ट ने ASI की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि एजेंसी ने अपने वैधानिक दायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं किया और भोजशाला परिसर के संरक्षण में जानबूझकर लापरवाही बरती। कोर्ट ने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल को संरक्षित घोषित करने से पहले ASI की जिम्मेदारी होती है कि वह उस स्थल की मूल प्रकृति, स्वरूप और धार्मिक चरित्र का सही निर्धारण करे।
केंद्र और ASI को क्या निर्देश दिए गए?
अदालत ने केंद्र सरकार और ASI को भोजशाला परिसर का प्रशासन और प्रबंधन संभालने का निर्देश दिया है। इसके मुताबिक, ASI को संरक्षण, रखरखाव और धार्मिक गतिविधियों के नियमन का पूर्ण अधिकार होगा। परिसर को संस्कृत अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया। श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक स्थल की पवित्रता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि लंदन म्यूजियम में रखी गई देवी सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग पर विचार किया जाए।
अयोध्या फैसले की झलक
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के निर्णय का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों की व्याख्या अनुभव, ऐतिहासिक समझ और विवेकपूर्ण निर्णय के आधार पर की जानी चाहिए।
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारों का दायित्व है कि वे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थलों का संरक्षण करें और संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करें।
मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाएगा
इस मामले में मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी सहित मुस्लिम पक्ष की याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कर दीं। MKWS के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उनका आरोप है कि अदालत ने जिन रिपोर्टों पर भरोसा किया, वे एकतरफा थीं।
मुस्लिम पक्ष के वकील अशर वारसी ने कहा कि ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट त्रुटिपूर्ण है। वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह परिसर 700 वर्षों से मस्जिद के रूप में इस्तेमाल होता रहा है और उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले को पलट देगा।
जैन समुदाय के दावे पर अदालत की टिप्पणी
मामले में जैन समुदाय ने भी दावा किया था कि यह स्थल मूल रूप से मध्यकालीन जैन मंदिर था।
अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में जैन और हिंदू परंपराएं सदियों से साथ-साथ विकसित हुई हैं। पूजा पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन दोनों में समान आध्यात्मिक तत्व मौजूद हैं। कोर्ट ने कहा कि खुदाई में जैन तीर्थंकर की प्रतिमा मिलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि दोनों परंपराओं की मूर्तियां अक्सर एक-दूसरे के धार्मिक स्थलों में पाई जाती रही हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय ऐतिहासिक तथ्यों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में अहम कदम है।
क्या है भोजशाला विवाद?
धार स्थित भोजशाला को हिंदू पक्ष देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत पाठशाला मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। वर्ष 2003 में ASI ने व्यवस्था बनाई थी कि हिंदू मंगलवार को पूजा करेंगे और मुस्लिम शुक्रवार को नमाज अदा करेंगे। अब हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को खत्म करते हुए हिंदू पक्ष को दैनिक पूजा का अधिकार दे दिया है।
 

About the Author

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports