भोपाल
मॉडल ट्विशा शर्मा मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर मुकदमे की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने का समर्थन किया है। 29 अक्टूबर को दाखिल हलफनामे में एजेंसी ने कहा कि, आरोपी गिरिबाला सिंह भोपाल की जिला एवं सत्र न्यायाधीश रह चुकी हैं, जबकि उनके बेटे समर्थ सिंह भोपाल में वकालत करते हैं। ऐसे में दोनों की स्थानीय स्तर पर अच्छी पकड़ होने के कारण निष्पक्ष सुनवाई और गवाहों की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं हैं।
जांच में दखल और सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप
सीबीआई ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश पुलिस की शुरुआती जांच के दौरान भी गिरिबाला सिंह ने अनुचित हस्तक्षेप किया था। एजेंसी के मुताबिक, ट्विशा की मौत के बाद उन्होंने कथित तौर पर घटनास्थल को अपने हिसाब से व्यवस्थित करने और सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश की थी।
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि गिरिबाला सिंह ने संबंधित अवधि की सीसीटीवी फुटेज हासिल करने के लिए एक तकनीशियन से संपर्क किया था। 13 मई 2026 को उन्होंने एक्सप्रेशन ब्यूटी पार्लर की संचालिका से संपर्क कर 12 मई को ट्विशा के वहां आने के बारे में जानकारी मांगी और लोगों को भेजकर संबंधित सीसीटीवी फुटेज मंगवाई। सीबीआई के अनुसार, घटना के समय गिरिबाला सिंह भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष थीं। एजेंसी ने कहा कि उनके पद और प्रभाव को देखते हुए गवाहों पर दबाव बनाए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
17 अगस्त को दाखिल हुई थी चार्जशीट
सीबीआई ने 17 अगस्त 2026 को गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 (क्रूरता), 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 3(5) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था। हालांकि, एफआईआर में शामिल दहेज संबंधी धाराओं को चार्जशीट में हटा दिया गया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि दहेज हत्या और अन्य पहलुओं से जुड़ी जांच अभी जारी है।
पिता ने मांगी है दिल्ली में सुनवाई
बता दें कि, ट्विशा के पिता नवनीधि शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर भोपाल की दसवीं जिला एवं सत्र अदालत में लंबित मुकदमे को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल की अदालत में चल रहे ट्रायल पर रोक लगाते हुए सीबीआई और आरोपियों से जवाब मांगा था। शुक्रवार को सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के सामने याचिका सुनवाई के लिए आई, लेकिन आगे की सुनवाई के लिए टाल दी गई।
















