इजरायल में सत्ता परिवर्तन की आहट, नेतन्याहू के खिलाफ एकजुट हो रहा विपक्ष; 67 सीटों का दावा

 यरूशलम इजरायल के चर्चित प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। बीते चुनाव में उन्हें स्पष्ट जनादेश नहीं मिला। उन्हें क्या, किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ है। इसके बाद से वहां नई सरकार के गठन पर असमंजस के बादल नजर आ रहे हैं। हालांकि, अब जो खबर…

इजरायल में सत्ता परिवर्तन की आहट, नेतन्याहू के खिलाफ एकजुट हो रहा विपक्ष; 67 सीटों का दावा

 यरूशलम
इजरायल के चर्चित प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। बीते चुनाव में उन्हें स्पष्ट जनादेश नहीं मिला। उन्हें क्या, किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ है। इसके बाद से वहां नई सरकार के गठन पर असमंजस के बादल नजर आ रहे हैं। हालांकि, अब जो खबर सामने आ रही है वह नेतन्याहू की चिंता बढ़ा सकती है। दो प्रमुख अरब पार्टियां राआम (Ra'am) और जॉइंट लिस्ट (Joint List) नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट का समर्थन कर सकती हैं। आपको बता दें कि इन दोनों के पास 19 सीटें हैं।

टाइम्स ऑफ इजरायल की एक रिपोर्ट के अनुसार, जॉइंट लिस्ट नेतन्याहू की विरोधी पार्टियों को बाहर से समर्थन देने के लिए तैयार है। वह खुद सरकार का हिस्सा नहीं बनना चाहती है। सांसद अहमद तिबी ने कहा, "हम उस हर व्यक्ति की मदद करना चाहते हैं जो इस खराब सरकार को गिराना चाहता है। इसकी जगह एक नई सरकार लाना चाहता है। हम इस बदलाव का हिस्सा बनना चाहते हैं, उम्मीद का हिस्सा बनना चाहते हैं।" वह 'जॉइंट लिस्ट' में नंबर-2 माने जाते हैं।

जाइंट लिस्ट के अलावा, अरब राजनीतिक आंदोलन के एक प्रमुख चेहरे बनक उभरे जाफर फराह ने बताया कि 'राआम' और 'जॉइंट लिस्ट' दोनों ही इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को यह बता सकते हैं कि वे आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट का समर्थन करने के लिए तैयार हैं। फराह ने कहा कि वे इजरायली सेना (IDF) के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ गादी आइसेनकोट को अगले प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तावित करेंगे।

यित्जाक राबिन का दिया उदाहरण
सांसद अहमद तिबी ने कथित तौर पर आइसेनकोट से कहा कि उन्हें दिवंगत प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन की तरह बनना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 'जॉइंट लिस्ट' सरकार को बाहर से समर्थन देगी। आपको बता दें कि राबिन मुख्य रूप से 1993 में हुए ओस्लो समझौते के तहत फिलिस्तीन मुक्ति संगठन के साथ बातचीत करने के अपने फैसले के लिए जाने जाते हैं। उस समय इस फैसले की काफी आलोचना हुई थी, लेकिन दो अरब-नेतृत्व वाली राजनीतिक पार्टियों ने राबिन की सरकार का समर्थन किया था।

इजरायल में मौजूदा राजनीतिक गतिरोध के बीच अब वैसी ही स्थिति फिर से बनती दिख रही है। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित गठबंधन को लेकर अनिश्चितता के बीच जॉइंट लिस्ट के चेयरमैन यूसुफ जबरीन ने बताया कि नेतन्याहू-विरोधी पार्टियों के साथ बातचीत की गई है।

हमास के हमले के बाद पहला चुनाव
2023 में हमास के हमले के बाद इजरायल में पहली बार चुनाव हुए। नतीजों में नेतन्याहू का विरोध करने वाली यहूदी-बहुमत वाली पार्टियों ने 48 सीटें जीतीं। जबकि अरब-बहुमत वाली दोनों पार्टियों ने कुल मिलाकर 19 सीटें हासिल कीं। नेतन्याहू के गुट को 53 सीटें मिलीं। उनके पास पहले 68 सीटें थीं।

आपको बता दें कि 120 सदस्यों वाली इजरायली संसद में कोई भी पार्टी बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी है। अगर आइसेनकोट के खेमे और अरब पार्टियों के बीच गठबंधन हो जाता है तो नेतन्याहू-विरोधी गुट को 67 सीटों का स्पष्ट बहुमत मिल सकता है। और नेतन्याहू को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ना पड़ सकता है।

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