अमेरिका में चुनाव से भारत की बढ़ेंगी चुनौतियां? H-1B वीजा, व्यापार और डिफेंस पर रहेगी नजर

वॉशिंगटन  इस हफ्ते, 3 नवंबर को अमेरिका के मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) चुनाव हो रहे हैं। ये चुनाव अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की तस्वीर तय करेंगे, जिससे पता चलेगा कि रिपब्लिकन पार्टी के नेता डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के बचे हुए दो वर्षों में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) और सीनेट (संसद के दोनों सदन) पर…

अमेरिका में चुनाव से भारत की बढ़ेंगी चुनौतियां? H-1B वीजा, व्यापार और डिफेंस पर रहेगी नजर

वॉशिंगटन
 इस हफ्ते, 3 नवंबर को अमेरिका के मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) चुनाव हो रहे हैं। ये चुनाव अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की तस्वीर तय करेंगे, जिससे पता चलेगा कि रिपब्लिकन पार्टी के नेता डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के बचे हुए दो वर्षों में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) और सीनेट (संसद के दोनों सदन) पर किसका नियंत्रण होगा। डेमोक्रेटिक पार्टी किसी सदन में जीत जाती है तो कांग्रेस की ओर से प्रशासन के कामकाज की जांच बढ़ जाएगी। इसमें व्यापार, आव्रजन (इमिग्रेशन) और विदेश नीति जैसे मुद्दे हैं।

डेमोक्रेट अगर दोनों सदनों में जीत जाते हैं तो उन्हें कानून बनाने, जांच करने और फंडिंग (धन आवंटन) के मामलों में ज्यादा ताकत मिल जाएगी। इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी विदेश नीति पर कांग्रेस का सीधा नियंत्रण हो जाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप के पास व्यापक कार्यकारी शक्तियां बनी रहेंगी, जिसमें किसी कानून को वीटो (अस्वीकार) करने की शक्ति भी शामिल है। इसके बावजूद उनके कामकाज पर असका असर दिख सकता है।

भारत के लिए चुनाव के मायने
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, चुनाव नतीजे भारत के लिए अहम हैं क्योंकि कांग्रेस के फैसले और अमेरिकी सरकार की नीतियां भारतीय निर्यात, अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को प्रभावित करते हैं। डेमोक्रेट्स को बहुमत मिलता है तो टैरिफ, स्वास्थ्य सेवा, जीवन-यापन की लागत और राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों पर बहस और विधायी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। हालांकि ये प्रस्ताव कानून बनेंगे या नहीं, यह कांग्रेस में सीटों के अंतर, सीनेट की प्रक्रियाओं और राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

व्यापार समझौता और टैरिफ दोनों देशों के बीच लगातार चिंता का विषय रहा है। भारत के लिए व्यापार एक अहम मुद्दा है। अमेरिका भारतीय सामानों के लिए एक बड़ा बाजार है और अमेरिकी टैरिफ नीति में कोई भी बदलाव सीधे तौर पर भारतीय निर्यातकों को प्रभावित कर सकता है। इस साल फरवरी में वॉशिंगटन और दिल्ली ने अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा (फ्रेमवर्क) की घोषणा की थी। हालांकि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच कोई व्यापार समझौता अभी तक नहीं हो पाया है।

H-1B वीजा और आव्रजन नीति
अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों, खासकर H-1B वीजा धारकों के लिए इमिग्रेशन नीति बड़ी चिंता का विषय है। ट्रंप प्रशासन की H-1B आवेदनों के लिए प्रस्तावित 100,000 डॉलर की फीस को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। दो संघीय न्यायाधीशों ने अलग-अलग मामलों में इसे लागू होने से रोक दिया है। ये फैसले इस नीति पर कानूनी रोक लगाते हैं लेकिन जरूरी नहीं कि ये मुकदमे का अंतिम समाधान हों।

कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के नियंत्रण में बदलाव से भविष्य के आव्रजन कानूनों और निगरानी पर असर पड़ सकता है। डेमोक्रेट्स हाउस और सीनेट में बहुमत हासिल कर लेते हैं तो उनके पास अधिक ताकत होगी। हालांकि कोई भी नीति खासकर विदेश संबंधों से जुड़ी नीतियां- ट्रंप के वीटो, फिलीबस्टर (कानून पारित होने में बाधा डालने की प्रक्रिया) और अर्थव्यवस्था के लिए साझा राजनीतिक जिम्मेदारी के कारण सीमित रहेंगी।

डेमोक्रेट्स को कितनी सीटों की जरूरत
3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटें और सीनेट की 35 सीटें (विशेष चुनावशामिल ) हैं। फिलहाल प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के पास 218-214 की बढ़त है। कुछ खाली सीटों की वजह से बहुमत के लिए डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में तीन से चार सीटें जीतने की जरूरत है।

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports