सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की चेतन-नितिन सभरवाल की अपील, आयकर विभाग करेगा पुराने सौदों की जांच

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने भारत के पूर्व चीफ जस्टिस वाईके सभरवाल के दो बेटों चेतन सभरवाल और नितिन सभरवाल से जुड़े आयकर मामले में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने शेयरों की खरीद-बिक्री से मिले पैसे के इस्तेमाल और दिल्ली के सिकंदरा रोड पर खरीदी गई प्रॉपर्टी के मामले में आयकर विभाग की दोबारा…

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की चेतन-नितिन सभरवाल की अपील, आयकर विभाग करेगा पुराने सौदों की जांच

 नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने भारत के पूर्व चीफ जस्टिस वाईके सभरवाल के दो बेटों चेतन सभरवाल और नितिन सभरवाल से जुड़े आयकर मामले में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने शेयरों की खरीद-बिक्री से मिले पैसे के इस्तेमाल और दिल्ली के सिकंदरा रोड पर खरीदी गई प्रॉपर्टी के मामले में आयकर विभाग की दोबारा असेसमेंट की कार्रवाई को हरी झंडी दे दी है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने दोनों भाइयों की ओर से दायर चार अपीलों को खारिज कर दिया. इसके साथ ही वित्त वर्ष 2008-09 और 2009-10 के लिए जारी री-असेसमेंट नोटिस को बरकरार रखा गया है। 

क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2010 में दिल्ली के सिकंदरा रोड पर खरीदी गई एक प्राइम प्रॉपर्टी से जुड़ा है. आयकर विभाग को शक था कि इस प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए इस्तेमाल की गई रकम दो कंपनियों के शेयरों की बिक्री से हासिल हुई थी. विभाग ने शेयरों की बिक्री में तय की गई कीमत और उनकी वास्तविक कीमत के बीच बड़े अंतर को लेकर सवाल उठाए थे. जांच में यह भी सामने आया कि शेयर बेचकर मिली रकम का एक बड़ा हिस्सा प्रॉपर्टी खरीदने में लगाया गया था. इसके बाद आयकर विभाग ने दोनों भाइयों के टैक्स असेसमेंट की दोबारा जांच शुरू की थी। 

2007 में हुआ था समझौता
मामले के मुताबिक, अक्टूबर 2007 में चेतन सभरवाल, नितिन सभरवाल और दो अन्य शेयरधारकों ने पवन इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड (Pawan Impex Pvt Ltd) और एसवीआईआईटी सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड (SVIIT Software Pvt Ltd) के शेयर बेचने का समझौता किया था. ये शेयर जीवाईएस रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड (GYS Real Estate Pvt Ltd) को बेचे जाने थे. दोनों कंपनियों के शेयरों की बिक्री के लिए क्रमशः 195 करोड़ रुपये और 60 करोड़ रुपये की कीमत तय की गई थी. समझौते के मुताबिक, प्रत्येक शेयरधारक को बिक्री की कुल रकम में एक चौथाई हिस्सा मिलना था। 

शेयरों की कीमत पर हुआ शक
बाद में आयकर विभाग ने इस शेयर ट्रांजैक्शन की जांच की. जांच के दौरान विभाग ने पाया कि शेयरों की बिक्री से मिलने वाली रकम उन कंपनियों की संपत्तियों में मौजूद जमीन और इमारतों की वास्तविक कीमत के मुकाबले काफी ज्यादा दिखाई दे रही थी. विभाग ने शुरुआती तौर पर माना कि शेयरों की कीमत तय करने में वास्तविक मूल्य से काफी अधिक रकम दिखाई गई हो सकती है. इसी आधार पर शेयरों की बिक्री से प्राप्त रकम और उससे जुड़े टैक्स के पहलुओं की जांच की गई. विभाग ने इस मामले में डायरेक्टर जनरल की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की। 

प्रॉपर्टी खरीदने में इस्तेमाल हुई रकम
आयकर विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि शेयरों की बिक्री से मिली रकम का एक बड़ा हिस्सा अप्रैल 2010 में दिल्ली के सिकंदरा रोड स्थित प्रॉपर्टी खरीदने में इस्तेमाल किया गया था. इस निवेश के आधार पर सभरवाल भाइयों ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54F के तहत कैपिटल गेन टैक्स से छूट का दावा किया था. धारा 54F के तहत कुछ निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर संपत्ति की बिक्री से हुए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर आवासीय संपत्ति में निवेश के आधार पर छूट मिल सकती है. आयकर विभाग ने अब इस पूरे लेनदेन की जांच और टैक्स छूट के दावे को दोबारा परखने की जरूरत बताई थी। 

स्वीकार हो चुका था चेतन सभरवाल का रिटर्न
इस मामले में चेतन सभरवाल का असेसमेंट ईयर 2008-09 का इनकम टैक्स असेसमेंट दिसंबर 2010 में पूरा कर लिया गया था. उस समय उनके द्वारा घोषित आय को आयकर विभाग ने स्वीकार कर लिया था. हालांकि, बाद में विभाग की जांच में शेयरों की बिक्री की कीमत और उससे प्राप्त रकम के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे. इसके बाद विभाग ने पुराने असेसमेंट को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू की. इसी कार्रवाई को चेतन और नितिन सभरवाल ने अदालत में चुनौती दी थी। 

क्यों बरकरार है री-असेसमेंट नोटिस?
सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्टूबर को दिए अपने फैसले में कहा कि आयकर विभाग की ओर से 31 मार्च 2015 को जारी नोटिस के पीछे पर्याप्त आधार मौजूद था. बेंच ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 147 और 148 के तहत असेसमेंट दोबारा खोलने के लिए अधिकारी के पास यह मानने का उचित कारण होना चाहिए कि टैक्स के दायरे में आने वाली आय का आकलन नहीं हो पाया है. अदालत के मुताबिक, इस मामले में डायरेक्टर जनरल की जांच रिपोर्ट ने असेसिंग ऑफिसर को ऐसा विश्वास बनाने के लिए ठोस सामग्री उपलब्ध कराई थी. इसलिए नोटिस जारी करने की कार्रवाई को अवैध नहीं कहा जा सकता। 

'रीजन टू बिलीव' का मतलब अंतिम सबूत होना नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि 'रीजन टू बिलीव' का अर्थ किसी अधिकारी के पास यह मानने का उचित कारण या आधार होना है कि टैक्स योग्य आय का आकलन छूट गया है. इसके लिए असेसिंग ऑफिसर को नोटिस जारी करने से पहले ही यह अंतिम रूप से साबित करना जरूरी नहीं है कि टैक्स चोरी हुई है या कोई आय छिपाई गई है. अदालत ने कहा कि इस स्तर पर अधिकारी के पास उपलब्ध सामग्री के आधार पर जांच की जरूरत का उचित आधार होना पर्याप्त है. कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक अदालतें इस बात का मूल्यांकन नहीं कर सकतीं कि अधिकारी के पास मौजूद कारण पर्याप्त हैं या नहीं। 

कीमत बढ़ाकर दिखाने की दलील भी खारिज
PTI के मुताबिक, अदालत ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि शेयरों की कीमत ज्यादा दिखाए जाने भर से टैक्स योग्य आय के
आकलन से छूटने का मामला नहीं बन सकता. बेंच ने कहा कि शेयर बेचने वाले के हाथ में हुई आय का टैक्स असेसमेंट भी इस मामले में महत्वपूर्ण है. शेयरों की बिक्री से मिली रकम का इस्तेमाल बाद में कैपिटल एसेट खरीदने और टैक्स छूट का दावा करने के लिए किया गया था. ऐसे में अगर बिक्री की रकम वास्तविक कीमत से काफी ज्यादा थी, तो इस पूरे लेनदेन की जांच जरूरी हो सकती है. अदालत ने कहा कि बिक्री से मिली रकम की आड़ में आय को दूसरी तरह दिखाए जाने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 

जांच की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ
किया कि किसी लेनदेन की सच्चाई जानने के लिए जांच की जरूरत महसूस करना और जांच के बाद नोटिस जारी करने के लिए पर्याप्त आधार होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं. अदालत के मुताबिक, इस मामले में आयकर अधिकारी ने केवल किसी अस्पष्ट आशंका के आधार पर कार्रवाई नहीं की थी. उनके सामने जांच रिपोर्ट के रूप में ठोस सामग्री मौजूद थी, जिसके आधार पर टैक्स योग्य आय के आकलन से छूटने की आशंका पैदा हुई. इसी वजह से कोर्ट ने आयकर विभाग के नोटिस को वैध माना और दोनों भाइयों की चारों अपीलें खारिज कर दीं। 

कौन थे पूर्व चीफ जस्टिस वाईके सभरवाल?
वाईके सभरवाल भारत के 36वें चीफ जस्टिस ऑ
फ इंडिया (CJI) रहे थे. उन्होंने 1 नवंबर 2005 को देश के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला था और 14 जनवरी 2007 तक इस पद पर रहे. उनका न्यायिक करियर दिल्ली हाई कोर्ट, बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक फैला रहा. मौजूदा मामला उनके बेटों चेतन और नितिन सभरवाल के कारोबारी शेयर ट्रांजैक्शन और प्रॉपर्टी निवेश से जुड़ा है। 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports