,

उज्जैन के महाकाल दरबार में अनूठी दीपावली, फूलझड़ियों से जगमगाएगा मंदिर

उज्जैन   ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में दीपावली का उत्सव अपनी अनूठी परंपराओं और राजसी वैभव के साथ मनाया जाएगा। देश के अधिकांश मंदिरों में अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है, लेकिन महाकाल मंदिर में चतुर्दशी पर ही दीपोत्सव की परंपरा है। इस बार आठ नवंबर को चतुर्दशी और अमावस्या एक ही दिन होने से तड़के भस्म…

उज्जैन के महाकाल दरबार में अनूठी दीपावली, फूलझड़ियों से जगमगाएगा मंदिर

उज्जैन 
 ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में दीपावली का उत्सव अपनी अनूठी परंपराओं और राजसी वैभव के साथ मनाया जाएगा। देश के अधिकांश मंदिरों में अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है, लेकिन महाकाल मंदिर में चतुर्दशी पर ही दीपोत्सव की परंपरा है। इस बार आठ नवंबर को चतुर्दशी और अमावस्या एक ही दिन होने से तड़के भस्म आरती में राजाधिराज के दरबार में दीपावली मनाई जाएगी।

भगवान का तिल्ली के तेल से अभ्यंग स्नान होगा
सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के बाद भगवान का तिल्ली के तेल से अभ्यंग स्नान होगा। पुजारी परिवार की महिलाएं केसर-चंदन का उबटन लगाकर गर्म जल और सुगंधित द्रव्यों से स्नान कराएंगी। इसके बाद सोने-चांदी के आभूषणों से राजसी शृंगार किया जाएगा।

दीपावली के पारंपरिक पकवानों से अन्नकूट सजाया जाएगा
दीपावली के पारंपरिक पकवानों से अन्नकूट सजाया जाएगा। इसमें गुजिया, पपड़ी, खुरमे, खीर, पूड़ी, भजिया, चावल, दाल, सब्जियां और चटनियां शामिल होंगी। इस उत्सव की सबसे आकर्षक परंपरा फुलझड़ियों से आरती की है। सुबह से रात तक होने वाली पांचों आरतियों में फुलझड़ियां जलाई जाएंगी। दीपों और फुलझड़ियों की रोशनी में महाकाल का दरबार जगमगाएगा। शाम को नगरवासी दीपावली मनाएंगे।

इस बार विशेष संयोग यह है कि आठ नवंबर को चतुर्दशी और अमावस्या एक ही दिन होने से तड़के भस्म आरती में राजाधिराज के दरबार में दीपावली मनेगी, जबकि शाम को नगरवासी दीपोत्सव मनाएंगे। दीपावली पर तड़के चार बजे मंदिर के पट खुलेंगे। भस्म आरती में भगवान महाकाल का अभ्यंग स्नान कराया जाएगा। इसकी शुरुआत तिल्ली के तेल से मालिश के साथ होगी। इसके बाद पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान को केसर-चंदन का उबटन लगाकर उनका रूप निखारेंगी। फिर गर्म जल और सुगंधित द्रव्यों से स्नान कराया जाएगा।

चतुर्दशी से ही भगवान को गर्म जल से स्नान कराने का क्रम शुरू हो जाता है
चतुर्दशी से ही भगवान को गर्म जल से स्नान कराने का क्रम शुरू हो जाता है, जो फाल्गुन पूर्णिमा होली के दिन तक चलता है। स्नान के बाद भगवान का सोने-चांदी के आभूषणों से मनोहारी शृंगार किया जाएगा। फिर दीपावली के पारंपरिक पकवानों से अन्नकूट सजाया जाएगा। इसमें गुंजिया, पपड़ी, खुरमे, खीर, पूड़ी, भजिए, चावल, दाल, सब्जियां और चटनियां सहित अनेक व्यंजन शामिल होंगे। दीपोत्सव की एक और खास परंपरा फूलझड़ी से आरती की है। दीपावली पर सुबह से रात तक होने वाली पांचों आरतियों में फुलझड़ी जलाई जाती है। इस दौरान दीपों और फुलझड़ियों की रोशनी में भगवान महाकाल का दरबार अलौकिक छटा बिखेरेगा।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports