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नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बदल रही बालाघाट की तस्वीर, विकास की नई राह पर जिला: CM मोहन यादव

नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बालाघाट अब लिख रहा विकास की नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री के निर्देश पर बालाघाट के 100 गांवों का होगा कायाकल्प 330 करोड़ रुपए से होंगे 800 से अधिक विकास कार्य मिशन आदि सेवा से शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव…

नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बदल रही बालाघाट की तस्वीर, विकास की नई राह पर जिला: CM मोहन यादव

नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बालाघाट अब लिख रहा विकास की नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री के निर्देश पर बालाघाट के 100 गांवों का होगा कायाकल्प
330 करोड़ रुपए से होंगे 800 से अधिक विकास कार्य
मिशन आदि सेवा से शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समाज के प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक समुदाय को सुरक्षा के साथ विकास का लाभ मिलना ही चाहिए। विकास का प्रकाश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नक्सलवाद की छाया से मुक्त होने के बाद बालाघाट जिला अब विकास, शिक्षा, रोज़गार और आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर बालाघाट जिले के 100 गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए इन दिनों तेजी से काम किया जा रहा है। मिशन आदि सेवा के नाम से चलाये जा रहे इस मिशन के तहत इन गांवों के समग्र विकास के लिए 330 करोड़ रुपये की लागत के 800 से अधिक विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप इन लक्षित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास एवं विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आजीविका और रोजगार के नए-नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

इस संदर्भ में बालाघाट जिले के कलेक्टर आदित्य सिंह के नेतृत्व में एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। इस कार्ययोजना के तहत अधिकारियों द्वारा अब तक लगभग 70 गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया जा चुका है। प्रत्येक गांव में डिजिटल लाइब्रेरी और सभा मंच विकसित करने की योजना है। इससे बच्चों और युवाओं को डिजिटल शिक्षा तथा सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और जनजातीय संस्कृति को रोजगार से जोड़ने के लिए पर्यटन सर्किट और होम स्टे विकसित किए जाएंगे। बैहर विकासखंड के ग्राम लगमा में एक बैगा हाट भी तैयार किया गया है, जहां विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा के हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा। वहीं ई-मार्केट प्लेटफॉर्म के जरिए बांस शिल्प, शहद, जैविक उत्पाद, वनोपज और स्व-सहायता समूहों की सामग्री को व्यापक बाजार से जोड़ा जाएगा। दूरस्थ बैगा बहुल गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए बैगा आरोग्य एवं पोषण एक्सप्रेस की भी योजना है। युवाओं को शासकीय योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष पोर्टल और विकास कार्यों की निगरानी के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड भी तैयार किया जा रहा है। इन सभी पहलों से नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर आए गांवों में विकास, आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि के नए अवसर सृजित होंगे।

 

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