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बुद्ध की ज्ञानस्थली में 11 दिन गूंजेंगे त्रिपिटक के पाठ, CM सम्राट चौधरी करेंगे उद्घाटन

बोधगया(गयाजी)  भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध धर्म के बड़े आयोजन की गवाह बनने जा रही है। दिसंबर में यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से हजारों बौद्ध भिक्षु, श्रद्धालु और पर्यटक जुटेंगे। 2 से 12 दिसंबर तक होने वाले 21वें अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक चैंटिंग समारोह में करीब 25 हजार लोगों के पहुंचने…

बुद्ध की ज्ञानस्थली में 11 दिन गूंजेंगे त्रिपिटक के पाठ, CM सम्राट चौधरी करेंगे उद्घाटन

बोधगया(गयाजी)
 भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध धर्म के बड़े आयोजन की गवाह बनने जा रही है। दिसंबर में यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से हजारों बौद्ध भिक्षु, श्रद्धालु और पर्यटक जुटेंगे। 2 से 12 दिसंबर तक होने वाले 21वें अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक चैंटिंग समारोह में करीब 25 हजार लोगों के पहुंचने की संभावना है।

खास बात यह है कि इस बार भारत मुख्य आयोजक देश की भूमिका निभाएगा। बिहार सरकार का पर्यटन विभाग भी पहली बार आधिकारिक तौर पर आयोजन में सहभागी बनेगा।

समारोह का उद्घाटन 2 दिसंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। आयोजन को भव्य बनाने के लिए प्रशासन से लेकर आयोजक संस्था तक तैयारियों में जुट गए हैं।

25 हजार मेहमानों से गुलजार होगा बोधगया, कई देशों के श्रद्धालु पहुंचेंगे
इस अंतरराष्ट्रीय समारोह में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। करीब 25 हजार देशी-विदेशी लोगों के आने की संभावना को देखते हुए आवासन और अन्य सुविधाओं की व्यापक तैयारी की जा रही है। बोधगया के अलग-अलग बौद्ध मठों में श्रद्धालुओं के ठहरने का इंतजाम होगा।

यह आयोजन सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों की बौद्ध परंपराओं और संस्कृति को एक मंच पर लाएगा। 11 दिनों तक बोधगया में बुद्ध के उपदेशों का पाठ और धार्मिक गतिविधियां आयोजित होंगी।

2 दिसंबर को सम्राट चौधरी करेंगे उद्घाटन, कई बड़ी हस्तियों के आने की उम्मीद
समारोह का विधिवत उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और श्रीलंका के भारतीय राजदूत समेत कई विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना है।

इस बार आयोजन में बिहार सरकार का पर्यटन विभाग आधिकारिक सहभागी की भूमिका निभाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोधगया की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कालचक्र मैदान में बनेगा भव्य पंडाल, सुरक्षा से लेकर ठहरने तक की तैयारी
आयोजन के लिए बोधगया के ऐतिहासिक कालचक्र मैदान में विशाल टेंट पंडाल बनाया जाएगा। यहां धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित होंगी। करीब 25 हजार श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुविधाओं की तैयारी शुरू कर दी है।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, अग्निशमन व्यवस्था और आवासन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन तथा पर्यटन विभाग संभालेंगे। वहीं, बौद्ध मठों में ठहरने की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि देश-विदेश से आने वाले मेहमानों को परेशानी न हो।
महाबोधि मंदिर की सजावट से शोभायात्रा तक, फाउंडेशन संभालेगा धार्मिक आयोजन

समारोह के धार्मिक और पारंपरिक कार्यक्रमों की जिम्मेदारी लाइट ऑफ बुद्धा धम्मा फाउंडेशन को दी गई है। फाउंडेशन के निदेशक रंजन कुमार के अनुसार, बांगबो डिक्सी के नेतृत्व में महाबोधि मंदिर की सजावट, शोभायात्रा और श्रद्धालुओं के भोजन की व्यवस्था की जाएगी।

आयोजन को सफल बनाने के लिए बिहार सरकार, जिला प्रशासन और फाउंडेशन के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। धार्मिक कार्यक्रमों के साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

दूसरी बार भारत को मिली मुख्य आयोजक देश की जिम्मेदारी
21वें अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक चैंटिंग समारोह में इस बार भारत दूसरी बार मुख्य आयोजक देश बना है। इससे पहले थाईलैंड और कंबोडिया चार-चार वर्ष, म्यांमार चार वर्ष, श्रीलंका दो वर्ष, बांग्लादेश और लाओस संयुक्त रूप से दो वर्ष तथा वियतनाम दो वर्ष तक आयोजन की मेजबानी कर चुके हैं।

इसके अलावा इंटरनेशनल त्रिपिटक चैंटिंग काउंसिल (आईटीसीसीसी) की ओर से भी तीन बार आयोजन किया जा चुका है। इस बार भारत की मेजबानी को बोधगया के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक महत्व के लिहाज से खास माना जा रहा है।

क्या है त्रिपिटक, जिसके पाठ के लिए जुटते हैं दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालु?
त्रिपिटक बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथों में शामिल है। इसमें भगवान गौतम बुद्ध के उपदेशों, जीवन दर्शन, ध्यान साधना और बौद्ध संघ के अनुशासन से जुड़े सिद्धांतों का संकलन है। इसे तीन भागों में बांटा गया है।

    सुत्तपिटक: इसमें भगवान बुद्ध के उपदेशों और उनके संवादों का संग्रह है।
    विनयपिटक: इसमें बौद्ध भिक्षुओं और संघ के अनुशासन तथा आचरण से जुड़े नियम हैं।
    अभिधम्मपिटक: इसमें मन, चेतना और बौद्ध दर्शन की गहन व्याख्या की गई है।

त्रिपिटक का मूल संदेश शांति, करुणा और दुखों से मुक्ति का मार्ग दिखाना है। यही वजह है कि दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालु इसके सामूहिक पाठ के लिए बोधगया पहुंचते हैं।

पर्यटन को भी मिलेगा अंतरराष्ट्रीय पहचान का मौका
बोधगया पहले से ही दुनिया के प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थलों में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक चैंटिंग समारोह के आयोजन से यहां धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालुओं के आने से होटल, परिवहन, स्थानीय दुकानदारों और पर्यटन से जुड़े कारोबारियों को भी लाभ मिल सकता है।

 

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