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बिहार में IIT पटना समेत कई संस्थानों में खुल रहे N-Gen पोस्ट ऑफिस, जानें विद्यार्थियों को क्या होगा फायदा

पटना  युवाओं को डाक विभाग की सेवाओं से जोड़ने और शैक्षणिक परिसरों में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करने के उद्देश्य से बिहार में नेक्स्ट जेनरेशन (एन-जेन) डाकघर स्थापित किए जा रहे हैं। इस पहल के तहत डाकघर को केवल चिट्ठी और पार्सल भेजने के केंद्र तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए आधुनिक…

बिहार में IIT पटना समेत कई संस्थानों में खुल रहे N-Gen पोस्ट ऑफिस, जानें विद्यार्थियों को क्या होगा फायदा

पटना
 युवाओं को डाक विभाग की सेवाओं से जोड़ने और शैक्षणिक परिसरों में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करने के उद्देश्य से बिहार में नेक्स्ट जेनरेशन (एन-जेन) डाकघर स्थापित किए जा रहे हैं।

इस पहल के तहत डाकघर को केवल चिट्ठी और पार्सल भेजने के केंद्र तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए आधुनिक सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य शैक्षणिक परिसरों में रहने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को डाक विभाग की सेवाओं तक आसानी से पहुंच उपलब्ध कराना है।

इसके साथ ही युवा पीढ़ी को डाक विभाग की आधुनिक सेवाओं से जोड़ना और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना भी इसके प्रमुख लक्ष्यों में शामिल है।

बिहार में इस पहल के तहत आइआइटी पटना, मगध विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, भागलपुर इंजीनियरिंग कालेज और डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा जैसे शैक्षणिक संस्थानों में एन-जेन डाकघर स्थापित किए गए हैं।

वहीं, बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर; एजी बाजार उप डाकघर; नालंदा उप डाकघर; टीएनबी कालेज, भागलपुर और एसएन सिन्हा कालेज, औरंगाबाद में इसे लेकर आगे का काम प्रगति पर है।

इन संस्थानों में डाकघर विकसित होने से संबंधित परिसरों में रहने वाले विद्यार्थियों और कर्मचारियों को डाक सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।

साथ ही, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों में डिजिटल सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा।

क्या है एन-जेन डाकघर?
एन-जेन का पूरा नाम नेक्स्ट जेनरेशन पोस्ट आफिस है। यह डाक विभाग की ऐसी पहल है, जिसके तहत पारंपरिक डाकघरों को आधुनिक, डिजिटल और युवाओं की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।

इसका विशेष फोकस जेनरेशन-जेड यानी डिजिटल तकनीक के साथ बड़े हुए युवाओं और विद्यार्थियों पर है। हालांकि, ये डाकघर केवल युवाओं के लिए नहीं हैं; इनसे दूसरे नागरिक भी लाभ उठा सकते हैं।

सामान्य डाकघर की तरह यहां भी डाक और पार्सल से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ डिजिटल बुकिंग, क्यूआर कोड आधारित भुगतान, आधुनिक सेवा काउंटर और परिसर के अनुरूप सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाता है।

कुछ एन-जेन डाकघरों में मुफ्त वाई-फाई, विद्यार्थियों के लिए स्पीड पोस्ट में रियायत, पार्सल पैकिंग और डाक टिकट संग्रह जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। हालांकि, सुविधाओं का स्वरूप संबंधित डाकघर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

विद्यार्थियों को क्या होगा फायदा?
एन-जेन डाकघरों से विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक परिसर में ही डाक विभाग की सेवाएं हासिल करने में सहूलियत होगी।

उन्हें जरूरी दस्तावेज भेजने, किताबें और अन्य सामान पार्सल करने तथा डाक विभाग की बचत, बीमा और भुगतान सेवाओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए परिसर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों और दूसरे राज्यों से पढ़ाई करने आए छात्रों के लिए भी यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।

डाक विभाग इस पहल में विद्यार्थियों की भागीदारी को भी महत्व दे रहा है। कुछ परिसरों में छात्र आधुनिक डिजाइन, कलाकृति और प्रचार गतिविधियों में सहयोग कर रहे हैं।

इससे डाकघर केवल लेन-देन का स्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और डाक विभाग के बीच संवाद का माध्यम भी बन सकते हैं।

बिहार में इस पहल का विस्तार डाक विभाग के लिए युवाओं तक पहुंच बढ़ाने का अवसर है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि परिसरों में कौन-कौन सी सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध रहती हैं, सेवाओं का इस्तेमाल कितना बढ़ता है और विद्यार्थियों को डाक, पार्सल तथा डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं का कितना लाभ मिलता है।

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