,

₹75,272 करोड़ की सबसे बड़ी डिफेंस डील, भारत को जर्मनी से मिलेगी दुनिया की सबसे साइलेंट सबमरीन टेक्नोलॉजी

नई दिल्ली/बर्लिन भारत और जर्मनी के बीच रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी डील होने जा रही है. यह डील 8 अरब डॉलर (करीब 75,272..

Varad Avatar

by

3 minutes

Read Time

₹75,272 करोड़ की सबसे बड़ी डिफेंस डील, भारत को जर्मनी से मिलेगी दुनिया की सबसे साइलेंट सबमरीन टेक्नोलॉजी

नई दिल्ली/बर्लिन
भारत और जर्मनी के बीच रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी डील होने जा रही है. यह डील 8 अरब डॉलर (करीब 75,272 करोड़ रुपये) की है और अगले 90 दिनों के अंदर इस पर फाइनल मुहर लग सकती है. जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बातचीत के बाद इसकी जानकारी दी है. इस प्रोजेक्ट के तहत भारत में छह एडवांस सबमरीन बनाई जाएंगी. भारत सरकार वर्तमान में इस एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने के लिए जरूरी कदम उठा रही है. राजनाथ सिंह इस समय जर्मनी की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। 
भारत और जर्मनी की सबसे बड़ी डिफेंस डील क्या है?
भारत और जर्मनी के बीच होने वाला यह समझौता डिफेंस सेक्टर में एक नया इतिहास रचने जा रहा है. 8 अरब डॉलर यानी करीब 75 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की यह डील सबमरीन के निर्माण से जुड़ी है. जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कील शहर में राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद भरोसा जताया कि अगले तीन महीनों में इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे. यह पहली बार होगा जब जर्मनी अपनी सबमरीन प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी किसी गैर-यूरोपीय देश को ट्रांसफर करेगा. इस डील के लिए जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच पहले ही चर्चा हो चुकी है। 
भारतीय नौसेना की ताकत कैसे बढ़ेगी?
इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत कुल छह सबमरीन का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए जर्मनी की दिग्गज कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) और भारत की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड साथ मिलकर काम करेंगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद कील में स्थित TKMS की शिपयार्ड फैसिलिटी का दौरा किया. वहां उन्होंने टाइप 212 क्लास की सबमरीन की वर्किंग और उसकी क्षमताओं का जायजा लिया. यह सबमरीन अपनी साइलेंट ऑपरेटिंग क्षमता और मारक क्षमता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इनके आने से भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। 
डिफेंस रोडमैप से दोनों देशों को क्या मिलेगा?
सिर्फ सबमरीन ही नहीं, बल्कि दोनों देशों ने डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप पर भी साइन किए हैं. इस रोडमैप का मुख्य उद्देश्य डिफेंस इक्विपमेंट का साथ मिलकर विकास और प्रोडक्शन करना है. भारत और जर्मनी अब हाई-टेक टेक्नोलॉजी पर मिलकर काम करेंगे. इसमें संयुक्त ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग जैसे अहम हिस्से भी शामिल हैं. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन की ट्रेनिंग के लिए भी एक समझौता हुआ है. राजनाथ सिंह ने बर्लिन में पिस्टोरियस के साथ क्षेत्रीय और ग्लोबल सुरक्षा चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की है। 
क्या यह डील चीन और पाकिस्तान के लिए चुनौती है?
हिंद महासागर में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए भारत के लिए अपनी अंडरवाटर ताकत बढ़ाना बहुत जरूरी है. वर्तमान में भारत की सबमरीन फ्लीट को अपडेट करने की जरूरत है. जर्मनी के साथ यह डील इसी कमी को पूरा करेगी. यह समझौता न केवल भारत की सुरक्षा को पुख्ता करेगा, बल्कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में ‘मेक इन इंडिया’ को भी बढ़ावा देगा. दोनों देशों ने सैन्य संबंधों को अपनी रणनीतिक साझेदारी का मुख्य आधार बताया है. इससे भविष्य में भारत की निर्भरता अन्य देशों से कम होगी और अपनी टेक्नोलॉजी विकसित करने में मदद मिलेगी। 

About the Author

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports