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शुभेंदु अधिकारी की उम्मीदवारी के खिलाफ याचिका पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, जानें क्या कहा

कोलकाता पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की उम्मीदवारी के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बड़ा फैसला आया है। कोलकाता हाई कोर्ट ने इस..

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शुभेंदु अधिकारी की उम्मीदवारी के खिलाफ याचिका पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, जानें क्या कहा

कोलकाता
पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की उम्मीदवारी के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बड़ा फैसला आया है। कोलकाता हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणियों का आरोप लगाया था। मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट रूप से कहाकि संविधान की किसी विशेष धारा का उल्लेख न होने के कारण यह याचिका मान्य नहीं है।
जवाब नहीं दे सके वकील
प्रधान न्यायाधीश सुजॉय पाल और न्यायाधीश पार्थ सारथी सेन ने मामले के वादी से पूछा कि वह संविधान की किस धाराओं के तहत प्रत्याशी की उम्मीदवारी रद्द करने के लिए आवेदन कर रहे हैं? इसके जवाब में वादी के पक्ष के वकील कोई उत्तर नहीं दे सके। इसके चलते प्रधान न्यायाधीश की बेंच ने मामला खारिज कर दिया। गौरतलब है शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। दोनों के बीच यह मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का माना जा रहा है। भाजपा का दावा है कि ममता बनर्जी के मुकाबले शुभेंदु को मनौवैज्ञानिक बढ़त हासिल है।
नंदीग्राम में दे चुके हैं ममता को मात
ममता बनर्जी के करीबी समझे जाने वाले शुभेंदु ने 2021 में तृणमूल छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था और उन्होंने भाजपा उम्मीदवार के रूप में नंदीग्राम सीट पर बनर्जी को हराया था। पांच साल बाद, अब यह चुनावी मुकाबला बनर्जी के गढ़ में हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस के लिए, भवानीपुर सीट बरकरार रखना मुख्यमंत्री के अपने ही क्षेत्र में उनकी राजनीतिक सत्ता को बरकरार रखने जैसा है। भाजपा के लिए, इसे भेदना बंगाल की सबसे शक्तिशाली नेता के इर्द-गिर्द बनी ‘अजेय’ की छवि को तोड़ने जैसा होगा।
भवानीपुर कहलाता है ‘मिनी इंडिया’
कोलकाता नगर निगम के आठ वार्ड में फैला भवानीपुर अक्सर ‘मिनी इंडिया’ कहलाता है, एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र जहां बंगाली, गुजराती व्यापारी, पंजाबी और सिख परिवार, मारवाड़ी और जैन परिवार, साथ ही बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता रहते हैं। बिहार, ओडिशा और झारखंड से आए प्रवासी इस सामाजिक विविधता में एक और आयाम जोड़ते हैं। भवानीपुर में लगभग 42 प्रतिशत मतदाता बंगाली हिंदू हैं, 34 प्रतिशत गैर-बंगाली हिंदू और लगभग 24 प्रतिशत मुस्लिम हैं, जो इस निर्वाचन क्षेत्र को सामाजिक रूप से विविध और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाते हैं। ऐसा लगता है कि इसी समीकरण ने अधिकारी को बनर्जी को उनके गृह क्षेत्र में चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित किया है।
बूथ-दर-बूथ आंकड़ा
भाजपा ने महीनों से भवानीपुर में बूथ-दर-बूथ का आंकड़ा तैयार किया है। पार्टी नेताओं का दावा है कि मतदाताओं में कायस्थ 26.2 प्रतिशत, मुस्लिम 24.5 प्रतिशत, पूर्वी भारत का प्रवासी समुदाय 14.9 प्रतिशत, मारवाड़ी 10.4 प्रतिशत और ब्राह्मण 7.6 प्रतिशत हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, इस कवायद से यह पता लगाने में मदद मिली कि बंगाली हिंदू बहुसंख्यक क्षेत्र कौन से हैं, हिंदी भाषी व्यापारी समुदाय कहां केंद्रित हैं और किन बूथ पर मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव रहने की संभावना है।

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