लखनऊ
पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव परिणामों ने यूपी की राजनीति को नई दिशा दे दी है। मिशन-2027 की तैयारी में जुटी भारतीय जनता पार्टी को इन नतीजों से निश्चित रूप से मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी, जबकि विपक्षी दलों -खासकर समाजवादी पार्टी -के सामने अपने पीडीए समीकरण को बनाए रखने की कठिन चुनौती आ खड़ी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन राज्यों से मिली राजनीतिक ऊर्जा के दम पर भाजपा यूपी में तीसरी बार सत्ता हासिल कर पाएगी? सुशासन बनाम अतीत की अराजकता
पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की रणनीति
पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘बुलडोजर बाबा’ और ‘हिंदू हृदय सम्राट’ की छवि को प्रभावी ढंग से भुनाया और प्रदेश में सुशासन लागू करने का वादा किया, जिसका असर चुनाव परिणामों में स्पष्ट दिखा। माना जा रहा है कि भाजपा यूपी में भी इसी रणनीति को आगे बढ़ाएगी। पार्टी संगठन पहले से ही अपने कार्यकर्ताओं को वर्ष 2012-2017 बनाम 2017-2027 की तुलना के आधार पर विकास, सुशासन और रोजगार को मुद्दा बनाकर विपक्ष को घेरने की गोपनीय हिदायत दे चुका है।
समाजवादी पार्टी के पीडीए समीकरण की होगी कठिन परीक्षा
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ मिलकर पीडीए की रणनीति पर चलते हुए 43 सीटें जीती थीं और एनडीए गठबंधन को जोरदार चुनौती दी थी। अब मिशन-2027 में इस सफलता को दोहराना सपा के लिए आसान नहीं होगा। सपा प्रमुख लगातार पीडीए की राजनीति को धार देने में जुटे हैं, लेकिन भाजपा के सुशासन के दावों का जवाब देना और पूर्वांचल के जातीय समीकरणों को साधना उनके लिए बड़ी परीक्षा होगी।
कांग्रेस के सामने खुद को मजबूत करने की चुनौती
वर्ष 2024 में सपा के साथ गठबंधन कर कांग्रेस ने छह लोकसभा सीटें जीती थीं, जबकि विधानसभा में उसके दो विधायक हैं। पार्टी अब दलितों, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को संगठन में तरजीह देते हुए सम्मेलनों के माध्यम से अपना जनाधार मजबूत करने में लगी है। हालाँकि भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार मुस्लिम तुष्टिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते रहते हैं, जिसका तोड़ निकालना कांग्रेस के लिए सरल नहीं होगा।
बसपा को तलाशनी होगी नई सोशल इंजीनियरिंग की राह
मायावती के लिए भी ये नतीजे चुनौती लेकर आए हैं। बसपा ने वर्ष 2007 में सोशल इंजीनियरिंग के बल पर सरकार बनाई थी और उसे 30.43 प्रतिशत मत मिले थे। लेकिन बीते दो दशकों में पार्टी का जनाधार लगातार घटता रहा – वर्ष 2022 में यह 12.88 प्रतिशत और वर्ष 2024 में मात्र 9.39 प्रतिशत रह गया। ऐसे में मिशन-2027 में वर्ष 2007 जैसी सफलता दोहराना बसपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी。
बंगाल-असम चुनाव नतीजों से यूपी की राजनीति में हलचल, भाजपा को मनोवैज्ञानिक बढ़त
लखनऊ पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव परिणामों ने यूपी की राजनीति को नई दिशा दे दी है। मिशन-2027 की तैयारी में जुटी भारतीय जनता पार्टी को इन नतीजों से निश्चित रूप से मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी, जबकि विपक्षी दलों -खासकर समाजवादी पार्टी -के सामने अपने पीडीए समीकरण को बनाए रखने की कठिन चुनौती आ खड़ी…

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