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सिद्धार्थनगर में आंधी का कहर: 32 लाख की पानी टंकी तिनके की तरह टूटी, ऊपरी हिस्सा हवा में लटका

 सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के खुनियाव ब्लॉक के रमवापुर विशुनपुर गांव में जल जीवन मिशन योजना के तहत बनाई जा रही एक पेयजल..

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सिद्धार्थनगर में आंधी का कहर: 32 लाख की पानी टंकी तिनके की तरह टूटी, ऊपरी हिस्सा हवा में लटका

 सिद्धार्थनगर
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के खुनियाव ब्लॉक के रमवापुर विशुनपुर गांव में जल जीवन मिशन योजना के तहत बनाई जा रही एक पेयजल टंकी आंधी के कारण क्षतिग्रस्त हो गई. यह हादसा 5 मई को दोपहर करीब 12 बजे उस समय हुआ जब मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के कर्मचारी टंकी के ऊपरी हिस्से में जिंक एलम मटेरियल की बोल्टिंग कर रहे थे. अचानक आए तेज हवा के दबाव के कारण निर्माणाधीन टॉप रूफ टूटकर नीचे की ओर लटक गया. मौसम विभाग की चेतावनी के चलते मजदूर पहले ही नीचे उतर आए थे, जिससे इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। 
32 लाख की लागत से बन रही थी टंकी
हैदराबाद की मेघा इंजीनियरिंग कंपनी द्वारा बनाई जा रही इस पेयजल टंकी की कुल लागत 32.41 लाख रुपये बताई जा रही है. डेढ़ लाख लीटर की स्टोरेज क्षमता वाली यह टंकी निर्माणाधीन अवस्था में थी। 
कंपनी को जिले में ऐसी करीब 150 टंकियां बनाने का जिम्मा मिला हुआ है. स्थानीय लोगों ने जब टंकी के ऊपरी हिस्से को टूटते देखा, तो गांव में अफरातफरी मच गई, हालांकि मजदूरों की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा होने से टल गया। 
इंजीनियर ने बताया कैसे हुआ हादसा
जल जीवन मिशन के अधिशाषी अभियंता संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि टंकी का आरसीसी निर्माण पहले ही पूरा हो चुका था. वर्तमान में कंटेनर में जिंक एलम का काम लेयर दर लेयर चल रहा था. दो लेयर का काम पूरा होने के बाद आज बोल्टिंग की प्रक्रिया जारी थी. करीब 15-16 मीटर की ऊंचाई पर हवा का दबाव इतना अधिक था कि बोल्टिंग पूरी न होने की वजह से ढांचा भार नहीं सह सका. अब इसे दोबारा मानक के अनुसार तैयार कराया जाएगा। 
सुरक्षा के मद्देनजर काम रोकने के आदेश
घटना की सूचना मिलते ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया. मौसम विभाग द्वारा जारी खराब मौसम के अलर्ट को देखते हुए अधिशाषी अभियंता ने जिले में चल रहे सभी टंकी निर्माण कार्यों को फिलहाल रोकने के आदेश दिए हैं. इंजीनियर जायसवाल के अनुसार, जिले में लगभग 100 ऐसी टंकियां सुरक्षित रूप से पूर्ण हो चुकी हैं, लेकिन निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना और खराब मौसम में काम न करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। 

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