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एमपी में UCC पर बड़ा अपडेट: इस समुदाय को मिल सकती है 70% तक की छूट

भोपाल   मध्यप्रदेश में इस साल के अंत तक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो सकती है। सरकार ने इसके लिए कवायद तेज कर दी है।..

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एमपी में UCC पर बड़ा अपडेट: इस समुदाय को मिल सकती है 70% तक की छूट

भोपाल 
 मध्यप्रदेश में इस साल के अंत तक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो सकती है। सरकार ने इसके लिए कवायद तेज कर दी है। उच्च स्तरीय समिति गठित करने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के मुख्य सचिव को अलग से कहा है कि वे समिति से समन्वय के लिए अपनी निगरानी में अधिकारियों के एक दल को लगाएं ताकि समिति की बैठकें समय-समय पर होती रहें। समिति को जो सहयोग चाहिए, वह राज्य की ओर से उपलब्ध कराया जाए। खास बात यह है कि प्रदेश में यूसीसी में आदिवासियों को 50 से 70 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है।
असल में उत्तराखंड व गुजरात ने यूसीसी लागू कर दिया है। अब सीएम चाहते हैं कि मप्र इन दोनों राज्यों के बाद यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बने। हालांकि भाजपा व एनडीए शासित दूसरे राज्यों में भी यह कवायद तेजी से चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक यूपी व असम में भी तैयारियां हो चुकी हैं।
समिति को 60 दिन में करने होंगे ये काम
प्रदेश में मौजूदा विभिन्न व्यक्तिक, पारिवारिक विधियों, जिनमें विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण- पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक, लिव-इन का अध्ययन।
उत्तराखंड-गुजरात में अपनाए गए मॉडल व प्रक्रिया का अध्ययन।
राज्य के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए संतुलित-व्यावहारिक विधिक संरचना का प्रस्ताव देना।
विभिन्न हितधारकों से सुझाव व आपत्तियां लेकर उनका निराकरण कराना।
सुनवाई व परामर्श बैठकें कर प्रक्रिया में लोगों की सहभागिता।
प्रस्तावित व्यवस्था में महिला- बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, समानता एवं सुरक्षा से जरुरी प्रावधानों पर विचार देना।
लिव-इन संबंधों के विनियमन, पंजीयन से उत्पन्न अधिकारों के संबंध में सुझाव देना।
विधेयक के विधिक, प्रशासनिक एवं क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं का परीक्षण करना, ताकि भविष्य में विधिक जटिलता का सामना न करना पड़े।
क्या कहता है यूसीसी
विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामले वर्तमान में अलग-अलग व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों द्वारा शासित हैं। यूसीसी में कहा गया है कि यह सभी नागरिकों के बीच समानता, निष्पक्षता और कानूनी स्पष्टता वाले होने चाहिए। एक समान, संतुलित और व्यावहारिक कानूनी संरचना से देश व राज्यों के विकास में सहायता मिलेगी।
मप्र में अब तक ये काम हुआ
27 अप्रेल को यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई को अध्यक्ष बनाया है। जबकि सेवानिवृत्त आइएएस शत्रुघ्न सिंह, कानूनविद् अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह को सदस्य बनाया है। समिति के सचिव का जिम्मा जीएडी के अपर सचिव अजय कटेसरिया को दिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में यूसीसी को लेकर की जा रही तैयारियों पर अधिकारियों से लगातार फीडबैक ले रहे हैं। पिछले सप्ताह सामान्य प्रशासन विभाग की समीक्षा बैठक में भी इस संबंध में जानकारी ली गई थी।
कांग्रेस आदिवासियों को पूरी तरह यूसीसी से बाहर रखने के पक्ष में, विरोध पर कर रही विचार
उधर कांग्रेस भी यूसीसी पर नजर गड़ाए बैठी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी का एक दल यूसीसी को लेकर सरकार द्वारा की जा रही तैयारियों को देख रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस आदिवासियों को पूरी तरह यूसीसी से बाहर रखने के पक्ष में है।

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