नई दिल्ली
9 मई 1977… क्रिकेट इतिहास की वह तारीख, जिसने इस खेल की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया. तब ब्रिटेन के अखबार डेली मेल ने एक सनसनीखेज हेडलाइन छापी थी- वो दिन जब दुनिया के टॉप क्रिकेटर्स समुद्री लुटेरे बन गए. कहने का अर्थ है कि वो तारीख जिस दिन दुनिया के बड़े क्रिकेटरों ने पारंपरिक क्रिकेट व्यवस्था के खिलाफ ‘बगावत’ कर दी थी. इस क्रांति के पीछे ऑस्ट्रेलियाई मीडिया टायकून केरी पैकर थे, जिन्होंने वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट (WSC) शुरू कर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) और क्रिकेट बोर्ड्स को सीधी चुनौती दी थी.
पूरी कहानी टीवी ब्रॉडकास्ट अधिकारों से शुरू हुई. केरी पैकर अपने चैनल ‘चैनल 9’ के लिए ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के टीवी राइट्स चाहते थे, लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) ने उन्हें राइट्स देने से इनकार कर दिया. इसके बाद पैकर ने क्रिकेट सिस्टम को ही चुनौती देने का फैसला कर लिया और अपनी अलग क्रिकेट लीग शुरू कर दी. उस समय पैकर की सबसे बड़ी साइनिंग इंग्लैंड के कप्तान टोनी ग्रेग थे. उन्होंने दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ियों को वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई. इनमें विवियन रिचर्ड्स, बैरी रिचर्ड्स और डेनिस लिली जैसे दिग्गज शामिल थे.
जब यह खबर लीक हुई कि दुनिया के कई स्टार खिलाड़ी केरी पैकर की लीग में शामिल हो चुके हैं, तो क्रिकेट जगत में हड़कंप मच गया. वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट को ‘पैकर सर्कस’ कहा गया. टोनी ग्रेग से इंग्लैंड की कप्तानी छीन ली गई और खिलाड़ियों पर बैन लगाने तक की बातें होने लगीं. आईसीसी और क्रिकेट बोर्ड्स ने वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट और उसमें भाग लेने वाले खिलाड़ियों पर बैन लगाने की कोशिश की, लेकिन मामला अदालत तक पहुंच गया. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने खिलाड़ियों के पक्ष में फैसला सुनाया. अदालत ने कहा कि क्रिकेटरों को अपनी कमाई और करियर चुनने का पूरा अधिकार है.
पैकर को आखिरकार मिला ब्रॉडकास्टिंग राइट्स
वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट सिर्फ 17 महीने तक चला, लेकिन उसका असर हमेशा के लिए क्रिकेट में रह गया. आखिरकार केरी पैकर को वही मिला, जो वह चाहते थे- ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट क्रिकेट के ब्रॉडकास्ट अधिकार. लेकिन इससे भी बड़ी बात यह रही कि वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट ने क्रिकेट को पूरी तरह आधुनिक बना दिया.
आज क्रिकेट में जो चीजें आम लगती हैं, उनकी शुरुआत काफी हद तक वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट से हुई थी. वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट में खिलाड़ियों ने रंगीन कपड़े पहनकर मुकाबले खेले. साथ ही केरी पैकर ने मुकाबले शाम के समय फ्लडलाइट के अंडर आयोजित कराए. पहले तो पैकर का मजाक उड़ाया गया, लेकिन सिडनी में हुए डे-नाइट मुकाबले में 50 हजार से ज्यादा लोग जुटे, तो यह साबित हो गया कि यह एक सफल प्रयोग था. उस दौर में यह सब क्रिकेट के लिए क्रांतिकारी बदलाव थे.
वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट में तेज गेंदबाजों का दबदबा इतना ज्यादा था कि बल्लेबाजों को अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत महसूस होने लगी. डेविड हुक्स के जबड़े पर लगी खतरनाक गेंद के बाद हेलमेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा.
कई क्रिकेट एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर केरी पैकर नहीं होते, तो आज का आधुनिक वनडे क्रिकेट शायद कभी अस्तित्व में ही नहीं आता. वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट ने क्रिकेट को सिर्फ पारंपरिक टेस्ट फॉर्मेट तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे मनोरंजन और बड़े बिजनेस में बदल दिया.
वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट ने 9 मई 1977 को बदल दी थी क्रिकेट की पूरी तस्वीर
नई दिल्ली 9 मई 1977… क्रिकेट इतिहास की वह तारीख, जिसने इस खेल की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया. तब ब्रिटेन के अखबार..

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