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चार युगों की अवधारणा: कितनी लंबी है कलयुग की वास्तविक अवधि?

हिंदू धर्म में समय को चार युगों जैसे सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलयुग, में बांटा गया है, जिन्हें मिलाकर एक महायुग बनता है. इनमें कलयुग को सबसे अंतिम और नैतिक रूप से सबसे कमजोर युग माना जाता है. धर्मग्रंथों में बताया गया है कि कलयुग की शुरुआत महाभारत युद्ध के बाद, लगभग 3102 ईसा पूर्व…

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चार युगों की अवधारणा: कितनी लंबी है कलयुग की वास्तविक अवधि?

हिंदू धर्म में समय को चार युगों जैसे सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलयुग, में बांटा गया है, जिन्हें मिलाकर एक महायुग बनता है. इनमें कलयुग को सबसे अंतिम और नैतिक रूप से सबसे कमजोर युग माना जाता है. धर्मग्रंथों में बताया गया है कि कलयुग की शुरुआत महाभारत युद्ध के बाद, लगभग 3102 ईसा पूर्व में हुई थी. इस हिसाब से देखा जाए तो अभी कलयुग का बहुत छोटा हिस्सा ही बीता है और इसका लंबा समय बाकी है.
सबसे प्रचलित मान्यता
मान्यता के अनुसार, चारों युगों की अवधि इस प्रकार है जैसे सतयुग 17,28,000 वर्ष, त्रेतायुग 12,96,000 वर्ष, द्वापर युग 8,64,000 वर्ष और कलयुग 4,32,000 वर्ष. इस गणना के अनुसार कलयुग की कुल आयु 4 लाख 32 हजार वर्ष मानी जाती है. यही कारण है कि इसे एक बहुत लंबा और धीरे-धीरे बदलने वाला युग माना गया है, जिसमें समय के साथ धर्म और नैतिकता का ह्रास होता जाता है.
1250 वर्ष वाली मान्यता
कुछ पौराणिक मान्यताओं में युगों की अवधि को बहुत छोटे पैमाने पर भी समझाया गया है. इस मत के अनुसार हर युग की अवधि लगभग 1250 वर्ष होती है और इस तरह चारों युगों का पूरा चक्र केवल 5000 वर्षों में पूरा हो जाता है. इस दृष्टिकोण में युगों को प्रतीकात्मक रूप में देखा जाता है, जहां बदलाव अपेक्षाकृत तेजी से होते हैं.
कुछ विद्वानों, जैसे परमहंस राजनारायण जी, ने युगों की अवधि को एक अलग तरीके से समझाया है. उनके अनुसार सतयुग 1200 वर्ष, त्रेता 2400 वर्ष, द्वापर 3600 वर्ष और कलयुग 4800 वर्ष का होता है. इस मत में युगों को मानव आधारित समय से जोड़ा गया है, न कि देवताओं के समय से. इससे यह समझने की कोशिश की गई है कि युगों की गणना को अधिक व्यावहारिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी देखा जा सकता है.
वैदिक और ज्योतिष दृष्टिकोण
वैदिक ग्रंथों में “युग” शब्द का अर्थ हमेशा लाखों वर्षों की अवधि नहीं रहा है. कई जगह इसे समय, काल या दिन-रात के रूप में भी प्रयोग किया गया है. वहीं ज्योतिष और खगोल विज्ञान के अनुसार पृथ्वी को राशि मंडल का एक पूरा चक्कर लगाने में लगभग 25,920 वर्ष लगते हैं, जिसे कुछ विद्वान एक युग चक्र के रूप में भी देखते हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि अलग-अलग काल और विद्वानों के अनुसार युग की परिभाषा बदलती रही है.
कलयुग का अंत और भगवान कल्कि
हिंदू धर्म के अनुसार जब कलयुग में पाप, अधर्म, झूठ और अन्याय अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएंगे, तब भगवान विष्णु का अंतिम अवतार, यानी कल्कि अवतार, प्रकट होगा. मान्यता है कि भगवान कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर हाथ में तलवार लिए अवतार लेंगे और पृथ्वी से अधर्म का नाश करेंगे. उनके आगमन के साथ ही कलयुग समाप्त हो जाएगा और एक बार फिर से सतयुग की शुरुआत होगी, जिसे सत्य और धर्म का युग माना जाता है.

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